किसानों की जीत! गुजरात में बिजली टावरों के लिए अब बाजार भाव पर मिलेगा मुआवजा

किसानों की जीत! गुजरात में बिजली टावरों के लिए अब बाजार भाव पर मिलेगा मुआवजा

गुजरात सरकार ने बिजली ट्रांसमिशन टावर और पावर लाइनों से प्रभावित किसानों के लिए नई मुआवजा नीति लागू करने का फैसला किया है. अब किसानों को 'जंत्री' दर के बजाय जमीन के मौजूदा बाजार भाव के आधार पर मुआवजा मिलेगा. जमीन का मूल्य निर्धारण करने के लिए मार्केट रेट कमेटी (MRC) बनाई जाएगी, जिसमें किसान प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा. नई नीति के तहत टावर क्षेत्र का दायरा बढ़ाया गया है, 100 प्रतिशत मुआवजा अग्रिम देने का प्रावधान किया गया है और राइट-ऑफ-वे (RoW) कॉरिडोर के लिए भी बाजार आधारित मुआवजा तय किया गया है.

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क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Jul 03, 2026,
  • Updated Jul 03, 2026, 7:38 PM IST

गुजरात सरकार ने उन किसानों के लिए मुआवज़े का एक नया तरीका घोषित किया है जिनकी जमीन का इस्तेमाल बिजली ट्रांसमिशन टावर और पावर लाइन के लिए किया जाता है. इसमें मौजूदा 'जंत्री' (सरकारी दर) पर आधारित फॉर्मूले की जगह अब बाजार भाव से जुड़े मुआवजे का सिस्टम लागू किया गया है. इस फैसले में जमीन का असली बाजार भाव तय करने के लिए 'मार्केट रेट कमेटी' (MRC) बनाने और मुआवजे की प्रक्रिया में किसानों के प्रतिनिधियों को शामिल करने का भी प्रावधान है.

बाजार भाव से जुड़ा मुआवजा

राज्य सरकार ने कहा कि अब तक किसानों को उनके खेतों से गुजरने वाले बिजली ट्रांसमिशन इंफ़्रास्ट्रक्चर के लिए 'जंत्री' दर का 200% मुआवजा मिलता था. अलग-अलग किसान संगठनों की मांगों के बाद, सरकार ने अब 'जंत्री' आधारित सिस्टम को हटाकर जमीन के मौजूदा बाजार भाव से दोगुना मुआवजा देने का फैसला किया है.

जमीन की कीमत तय करने के लिए MRC

जमीन का पारदर्शी और निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित करने के लिए, सरकार एक 'मार्केट रेट कमेटी' (MRC) बनाएगी. इस कमेटी में जिला कलेक्टर, प्रभावित जमीन मालिकों के प्रतिनिधि, किसान प्रतिनिधि, अधिकृत मार्केट वैल्यूअर और ट्रांसमिशन सर्विस प्रोवाइडर के प्रतिनिधि शामिल होंगे. सरकार ने कहा कि किसान प्रतिनिधियों को शामिल करने का मकसद यह पक्का करना है कि जमीन मालिकों को सही मुआवजा मिले.

टावर वाले इलाके के लिए अधिक मुआवजा

नई पॉलिसी में उस इलाके का दायरा भी बढ़ाया गया है जिसके लिए मुआवजा दिया जाता है, जहां ट्रांसमिशन टावर लगाए जाते हैं. सिर्फ टावर के असली बेस (आधार) पर मुआवजा तय करने के बजाय, अब स्ट्रक्चर के हर तरफ एक अतिरिक्त मीटर जोड़ा जाएगा.

उदाहरण के लिए, पहले 765 KV ट्रांसमिशन लाइन के लिए 625 वर्ग मीटर के हिसाब से मुआवजा मिलता था. नए फॉर्मूले के तहत, अब 729 वर्ग मीटर के लिए मुआवजा तय किया जाएगा.

पूरा पेमेंट पहले ही

सरकार ने पेमेंट का तरीका भी बदल दिया है. पहले, मुआवजा तीन चरणों में दिया जाता था- फाउंडेशन (नींव) के चरण में 40%, टावर लगाने के दौरान 40%, और पावर लाइन की स्ट्रिंगिंग (तार खींचने) के बाद 20%. नई पॉलिसी के तहत, 100% मुआवजा पहले ही दे दिया जाएगा.

'राइट-ऑफ-वे' (RoW) मुआवजा

सरकार ने MRC द्वारा तय बाजार भाव के आधार पर ट्रांसमिशन लाइनों के 'राइट-ऑफ-वे' (RoW) कॉरिडोर के लिए भी मुआवजे में बदलाव किया है.

मुआवजे की दरें इस प्रकार होंगी- ग्रामीण इलाकों में बाजार भाव का 30%, म्युनिसिपल इलाकों में बाजार भाव का 45%, और म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन इलाकों में बाजार भाव का 60%. इसमें चल रहे प्रोजेक्ट भी शामिल होंगे. सरकार ने साफ किया कि जिन किसानों को पहले की पॉलिसी के तहत मुआवजा मिल चुका है, लेकिन जिनके ट्रांसमिशन लाइन प्रोजेक्ट अभी भी चल रहे हैं, वे भी बदले हुए मुआवजा नियम के तहत फायदा पाने के हकदार होंगे.

यह फ़ैसला मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, कृषि मंत्री जीतूभाई वाघाणी, ऊर्जा मंत्री ऋषिकेश पटेल और ऊर्जा राज्य मंत्री कौशिक वेकारिया के बीच बातचीत के बाद लिया गया. सरकार ने कहा कि बदली हुई पॉलिसी का मकसद बिजली ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट से प्रभावित किसानों को बाजार-आधारित सही मुआवजा दिलाना है.

पूरे राज्य में विरोध-प्रदर्शन

हाल के महीनों में, गुजरात भर के किसानों ने खेती की जमीन पर हाई-वोल्टेज बिजली ट्रांसमिशन टावर और पावर लाइन लगाने का विरोध किया है. किसान संगठनों का कहना था कि खेती वाले खेतों के बीच में ट्रांसमिशन पोल लगाए जा रहे हैं, जिससे खेती के काम पर असर पड़ रहा है और जमीन का सही इस्तेमाल कम हो रहा है.

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए इस्तेमाल की गई जमीन के बदले दिया गया मुआवजा काफी नहीं है. इसके बजाय, मुआवजा 'जमीन अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013' के प्रावधानों के तहत तय किया जाना चाहिए और भुगतान जमीन की असल बाजार कीमत के हिसाब से होना चाहिए.

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