
बिहार सरकार वैसे अधिकारियों, पैक्स समितियों और राइस मिलरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की तैयारी में जुट गई है, जिन्होंने अभी तक शत-प्रतिशत चावल की आपूर्ति नहीं की है. सहकारिता विभाग ने खरीफ सीजन 2025–26 के दौरान धान खरीद के बाद चावल आपूर्ति में लापरवाही बरतने वाले 17 जिलों की पैक्स समितियों से स्पष्टीकरण मांगा है. इन सभी जिलों की समितियों के 10 या इससे अधिक लॉट चावल की आपूर्ति नहीं की गई है. साथ ही, इस मामले में 31 प्रखंडों के सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों से भी नोटिस के जरिए जवाब मांगा गया है.
सहकारिता विभाग ने बताया कि खरीफ सीजन 2025–26 के दौरान जितनी धान की खरीद हुई है, उसके मुकाबले चावल की आपूर्ति अभी भी 6 प्रतिशत कम है. दरअसल, विभाग की ओर से बीते साल 4.60 लाख किसानों से 36.78 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की गई थी. वहीं, खरीदी के बराबर 24.95 लाख मीट्रिक टन चावल राज्य खाद्य निगम को देना है. लेकिन विभाग अभी तक 23.42 लाख एमटी (94 प्रतिशत) चावल दे पाया है.
इसको लेकर विभाग के मंत्री रामकृपाल यादव ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि सभी संबंधित समितियां निर्धारित समय तक राज्य खाद्य निगम को शत-प्रतिशत चावल की आपूर्ति सुनिश्चित करें. वहीं, आपूर्ति नहीं करने वाले पैक्स, व्यापार मंडल, राइस मिल और संबंधित पदाधिकारियों पर कार्यवाही करने की बात कही.
सहकारिता विभाग ने बताया कि विभागीय समीक्षा में पाया गया कि राज्य के 17 जिलों में चावल की आपूर्ति कम है. इसमें बेगूसराय, भागलपुर, जमुई और समस्तीपुर को छोड़कर अररिया, औरंगाबाद, बांका, भोजपुर, दरभंगा, बक्सर, जहानाबाद, कैमूर, कटिहार, लखीसराय, नालंदा, रोहतास, सहरसा, शिवहर, सुपौल और पश्चिमी चंपारण शामिल हैं. जहां कई पैक्स समितियां ऐसी हैं, जिनके द्वारा 10 या इससे अधिक लॉट चावल की आपूर्ति नहीं की गई है. वहीं, 429 समितियां ऐसी हैं, जहां 5 लॉट या उससे अधिक चावल की आपूर्ति अभी भी लंबित है.
विभाग की ओर से राज्य के 31 प्रखंडों के प्रखंड सहकारिता पदाधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है, जहां अभी भी 40 लॉट या उससे अधिक चावल की आपूर्ति लंबित है. विभाग ने संबंधित प्रखंड सहकारिता पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि जिन समितियों में चावल के लॉट लंबित हैं, उनकी आपूर्ति जल्द से जल्द कराई जाए. वहीं, जिला पदाधिकारियों को पत्र के माध्यम से कहा गया है कि ऐसी समितियों और उनसे जुड़े राइस मिलों का निरीक्षण कर चावल की आपूर्ति जल्द कराई जाए. वहीं, चावल उपलब्ध कराने में यदि किसी तरह की लापरवाही या देरी की जाती है, तो पैक्स समितियों और राइस मिलों सहित जिला सहकारिता पदाधिकारी और प्रखंड सहकारिता पदाधिकारियों पर कार्रवाई की जाए.