ओडिशा-गुजरात मॉडल पर दोबारा शुरू होंगी बिहार की चीनी मिलें, सरकार ने दिया ये बड़ा आदेश

ओडिशा-गुजरात मॉडल पर दोबारा शुरू होंगी बिहार की चीनी मिलें, सरकार ने दिया ये बड़ा आदेश

बिहार सरकार रैयाम और सकरी चीनी मिलों को ओडिशा और गुजरात के मॉडल पर आधुनिक तकनीक के साथ फिर से शुरू करने जा रही है, जिससे गन्ना किसानों की आय और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे.

चालू होंगी बंद चीनी मिलेंचालू होंगी बंद चीनी मिलें
अंक‍ित कुमार स‍िंह
  • पटना,
  • May 20, 2026,
  • Updated May 20, 2026, 12:23 PM IST

बिहार के गन्ना किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है. लंबे समय से बंद पड़ी रैयाम और सकरी सहकारी चीनी मिलों को अब ओडिशा और गुजरात के सफल मॉडल पर दोबारा शुरू करने की तैयारी तेज कर दी गई है. राज्य सरकार इन मिलों को आधुनिक तकनीक से लैस कर नए सिरे से शुरू करना चाहती है, जिससे किसानों की आमदनी बढ़े और ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर पैदा हों.

हाल ही में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में इस परियोजना को लेकर अहम निर्णय लिए गए. बैठक में स्पष्ट निर्देश दिया गया कि दोनों मिलों को एक सफल और टिकाऊ मॉडल के रूप में विकसित किया जाए, जैसा कि ओडिशा और गुजरात में पहले से चल रहा है.

ओडिशा और गुजरात मॉडल पर जोर

राज्य सरकार ने इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) को निर्देश दिया है कि वे ओडिशा और गुजरात की चीनी मिलों की तर्ज पर डिटेल रिपोर्ट जल्द पेश करें. इन राज्यों में आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रबंधन और लगातार कच्चे माल की उपलब्धता के कारण मिलें सफलतापूर्वक चल रही हैं. उसी मॉडल को बिहार में लागू करने की योजना है.

आधुनिक तकनीक से लैस होंगी मिलें

रैयाम और सकरी मिलों को हाईटेक मशीनों और तकनीक के साथ तैयार किया जाएगा. दोनों मिलों की नजदीकी का फायदा उठाकर उन्हें एक साथ चलाने की योजना बनाई गई है. इससे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और मिलों को चलाने का खर्च भी कम होगा.

सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि मिलों को लगातार गन्ना मिलता रहे. इसके लिए आसपास के क्षेत्रों में गन्ना उत्पादन बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है. किसानों को बेहतर बीज, आधुनिक कृषि उपकरण और उन्नत तकनीक उपलब्ध कराई जाएगी.

किसानों को सीधा फायदा

मिलों के दोबारा चालू होने से गन्ना किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा. अब तक किसानों को अपना गन्ना दूर-दराज के इलाकों में बेचना पड़ता था, जिससे उनका समय और खर्च दोनों बढ़ते थे. लेकिन नई व्यवस्था में गन्ना स्थानीय स्तर पर बेचा जा सकेगा, किसानों को समय पर भुगतान मिलने की संभावना बढ़ेगी और बेहतर मांग के कारण कीमतों में सुधार हो सकता है.

युवाओं के लिए रोजगार के अवसर

इन मिलों के चालू होने से न सिर्फ किसानों बल्कि स्थानीय युवाओं को भी फायदा होगा. मिलों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे, जिससे गांवों में पलायन कम होने की उम्मीद है.

सरकार की तैयारी तेज

राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना संघ पहले ही दोनों मिलों की DPR (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार कर चुका है. अब अलग-अलग विभागों को आपसी तालमेल से प्रस्तावों को जल्दी मंजूरी देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि प्रोजेक्ट का काम जल्द शुरू हो सके.

गन्ना क्षेत्रों के लिए अलग बजट

सरकार गन्ना उगाने वाले जिलों के विकास के लिए अलग बजट तैयार करने जा रही है. जिलाधिकारियों को एक्शन प्लान बनाकर जल्द रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं. इससे क्षेत्रीय स्तर पर बुनियादी ढांचे और खेती से जुड़ी सुविधाओं में सुधार होगा.

ओडिशा और गुजरात के मॉडल पर चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने की योजना बिहार के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है. इससे गन्ना किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है.

MORE NEWS

Read more!