
बिहार सरकार ने नेशनल मखाना बोर्ड के तहत 2026-27 वित्तीय वर्ष के लिए 'मखाना विकास योजना' शुरू की है. इस योजना के तहत खेती से लेकर एक्सपोर्ट तक, पूरी सप्लाई चेन में सब्सिडी दी जाएगी.
इस योजना का मकसद मखाना (जिसे फॉक्स नट्स भी कहते हैं) के उत्पादन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग को बढ़ावा देकर किसानों की इनकम बढ़ाना है. बिहार भारत में मखाने का सबसे बड़ा उत्पादक है.
अधिकारियों ने बताया कि मखाने की खेती करने वाले किसान, खेती के आधुनिक तरीके अपनाने और उत्पादन बढ़ाने के लिए 71,600 रुपये तक की मदद पाने के हकदार होंगे.
सरकार ने अलग-अलग कैटेगरी में प्रोसेसिंग यूनिट्स लगाने के इच्छुक उद्यमियों के लिए भी ग्रांट देने की घोषणा की है.
इस योजना के तहत, माइक्रो प्रोसेसिंग यूनिट्स को 5 लाख रुपये तक, छोटी यूनिट्स को 19.5 लाख रुपये, मीडियम यूनिट्स को 1.5 करोड़ रुपये और बड़ी यूनिट्स को 3.5 करोड़ रुपये तक की मदद मिल सकती है. खेत-स्तर पर प्रोडक्ट मैनेजमेंट यूनिट्स को 2 लाख रुपये की मदद मिलेगी.
बाजार तक पहुंच को मजबूत करने के लिए, राज्य सरकार मखाना बिक्री केंद्र बनाने के लिए 10 लाख रुपये तक की मदद देगी.
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में हिस्सा लेने वाले व्यवसायों को 25 लाख रुपये तक की मदद मिल सकती है, जबकि एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए सर्टिफिकेशन में मदद के तौर पर 2.5 लाख रुपये तक की राशि तय की गई है.
वैश्विक बाजारों में मखाने को पहचान दिलाने में मदद के लिए ब्रांडिंग और प्रचार गतिविधियों के लिए अतिरिक्त 25 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं.
सरकार ने कहा कि इस योजना का मकसद बिहार में मखाने को एक संगठित उद्योग के रूप में विकसित करना है, जिससे नए रोजगार के अवसर पैदा हों और साथ ही किसानों को बेहतर मुनाफा भी मिले.
आवेदन करने के इच्छुक किसानों और उद्यमियों से 'बिहार कृषि ऐप' के जरिए अपने आवेदन जमा करने को कहा गया है.
बिहार पहले से ही भारत में मखाने के उत्पादन में सबसे आगे है, ऐसे में इस योजना को ग्रामीण इनकम को मजबूत करने और राज्य के कृषि-व्यवसाय क्षेत्र का विस्तार करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.