
बिहार में बागवानी करने वाले किसानों के लिए कृषि विभाग की ओर से एक राहत भरी खबर आई है. अभी तक किसान बागवानी में कीट प्रबंधन को लेकर जो दवाओं का छिड़काव करते थे, उसका खर्च स्वयं उठाते थे, जिसके चलते खेती में दवाओं पर अच्छी-खासी राशि खर्च हो जाती है, लेकिन अब किसानों की जेब पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा. क्योंकि, कृषि विभाग बागवानी से जुड़ी फसलों के कीट प्रबंधन को लेकर अनुदान देने जा रहा है. कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि इस साल से सरकार की ओर से "बगीचों में कीट प्रबंधन योजना" प्रारंभ की गई है, जिसके तहत आम, अमरूद और लीची के बगीचों में कीट एवं व्याधियों के वैज्ञानिक, सुरक्षित एवं समयबद्ध प्रबंधन के लिए कीटनाशी छिड़काव पर अनुदान देने का निर्णय लिया गया है.
कृषि मंत्री ने बताया कि "बगीचों में कीट प्रबंधन योजना" के तहत सरकार द्वारा आम, लीची और अमरूद के बगीचों में दवा छिड़काव को लेकर अलग-अलग राशि तय की गई है. इसमें आम के बगीचों में कीट-व्याधि एवं फल झड़न प्रबंधन के लिए विभाग की ओर से प्रति पेड़ प्रथम छिड़काव पर 57 रुपये तथा द्वितीय छिड़काव पर 72 रुपये की दर से 75 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा.
इसी प्रकार अमरूद में कीट-व्याधि प्रबंधन के लिए प्रथम छिड़काव पर 33 रुपये एवं दूसरे छिड़काव पर 45 रुपये प्रति पेड़ अनुदान मिलेगा. वहीं, लीची के बगीचों के लिए प्रथम छिड़काव पर 162 रुपये और दूसरे छिड़काव पर 114 रुपये प्रति वृक्ष अनुदान दिया जाएगा, जो करीब 75% के आसपास है.
विभाग के मंत्री ने बताया कि जो किसान इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, वे कृषि विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन कर अनुदानित छिड़काव सुविधा का लाभ प्राप्त कर सकते हैं. कृषि मंत्री ने किसानों से आम, लीची और अमरूद पर मिलने वाले अनुदान का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की. उन्होंने कहा कि यह योजना किसानों को बागवानी के क्षेत्र में कीट एवं रोगों पर लगने वाले खर्च को कम करने में सहायक सिद्ध होगी और किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी होगी.
कृषि मंत्री ने बताया कि उद्यानिकी फसलों में कीट एवं रोगों का प्रबंधन बहुत जरूरी है. अगर किसान समय रहते इन पर नियंत्रण नहीं कर पाते हैं, तो इसका उत्पादन पर सीधा असर देखने को मिलता है. लेकिन सरकार के द्वारा शुरू की गई इस योजना के जरिए अब किसानों का उत्पादन भी बढ़िया होगा. साथ हीं किसानों को समय पर दवा छिड़काव की सुविधा उपलब्ध कराएगी, जिससे फलों की गुणवत्ता में सुधार होगा, साथ ही उत्पादन में वृद्धि होगी और किसानों की आर्थिक स्थिति पहले से और बेहतर होगी.