
बिहार के कई इलाकों में बाढ़ का पानी अब कम हो रहा है, लेकिन पानी घटने के साथ ही नुकसान का दायरा भी साफ होता जा रहा है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 50 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. बिहार के 15 जिलों में बाढ़ की खबर है, जिससे राज्य का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हुआ है.
शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, नुकसान लगभग ₹10,000 करोड़ का हुआ है. यह एक शुरुआती अनुमान है. बाढ़ का पानी पूरी तरह से उतरने के बाद विस्तृत आकलन किया जाएगा.
खेती-बाड़ी सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक रही है. शुरुआती अनुमानों से पता चलता है कि लगभग 1.5 लाख हेक्टेयर में लगी फसलें प्रभावित हुई है.। धान, मक्का, सब्जियों और केले की फसलों को नुकसान पहुंचा है. कई इलाकों में खेत 10 दिनों से ज्यादा समय तक पानी में डूबे रहे.
बाढ़ से सड़कों, पुलों, पुलियाओं और अन्य बुनियादी ढांचों को भी नुकसान पहुंचा है. कई इलाकों में ग्रामीण सड़कें प्रभावित हुई हैं, जबकि बिजली आपूर्ति, पीने के पानी की सुविधाओं और सरकारी इमारतों को हुए नुकसान का भी आकलन किया जा रहा है.
कई जगहों पर तटबंध भी प्रभावित हुए हैं. कुछ इलाकों में तटबंध क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि कुछ जगहों पर बाढ़ का पानी तटबंधों के ऊपर से बह गया. संबंधित विभाग पानी उतरने के बाद नुकसान का आकलन करेंगे और अगले मॉनसून से पहले मरम्मत का काम किया जाएगा.
सरकार बाढ़ से प्रभावित और वेरिफाइड परिवारों को तत्काल राहत के तौर पर 7,000 रुपये दे रही है. वेरिफिकेशन की प्रक्रिया जिला स्तर पर की जा रही है.
जिन किसानों की फसलें बर्बाद हुई हैं, वे इनपुट सहायता के भी हकदार हैं. इसके तहत बिना सिंचाई वाली जमीन के लिए 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर, सिंचाई वाली जमीन के लिए 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर और गन्ने की फसल के लिए 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता का प्रावधान है. यह सहायता अधिकतम दो हेक्टेयर तक के लिए उपलब्ध है.
प्रभावित इलाकों के किसानों को सरसों और मटर समेत वैकल्पिक फसलों के बीज उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की जा रही है.
घरों और निजी संपत्ति को हुए नुकसान की पूरी जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है. बाढ़ का पानी उतरने के बाद विस्तृत सर्वेक्षण किया जाएगा. स्वास्थ्य, पशुधन, मत्स्य पालन, शिक्षा और पीने के पानी पर पड़े असर का भी आकलन किया जा रहा है.
फिलहाल, बिहार में बाढ़ से हुए नुकसान का शुरुआती अनुमान 10,000 करोड़ रुपये है. अंतिम आंकड़ा विभागों द्वारा विस्तृत आकलन पूरा होने के बाद ही पता चलेगा.(रोहित कुमार सिंह की रिपोर्ट)