25 अगस्त तक सांसदों-विधायकों को ज्ञापन देगा SKM, MSP समेत 7 मांगों पर दबाव बनाने की अपील

25 अगस्त तक सांसदों-विधायकों को ज्ञापन देगा SKM, MSP समेत 7 मांगों पर दबाव बनाने की अपील

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) 17 से 25 अगस्त तक देशभर में सांसदों और विधायकों को ज्ञापन सौंपेगा. संगठन ने जनप्रतिनिधियों से MSP की कानूनी गारंटी, किसान कर्जमाफी, मजदूरों के लिए न्यूनतम वेतन और युवाओं को रोजगार समेत किसानों से जुड़ी प्रमुख मांगों पर केंद्र और राज्य सरकारों पर दबाव बनाने की अपील की है.

क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Aug 18, 2026,
  • Updated Aug 18, 2026, 5:37 PM IST

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने घोषणा की है कि वह 17 से 25 अगस्त के बीच देशभर में सांसदों और विधायकों को ज्ञापन सौंपेगा. संगठन का कहना है कि किसान प्रतिनिधि गांवों से जुलूस के रूप में निकलकर जनप्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे और किसानों, मजदूरों और आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर दखल की मांग करेंगे.

एसकेएम ने जनप्रतिनिधियों से केंद्र और राज्य सरकारों पर दबाव बनाकर किसानों के हित में नीतिगत बदलाव कराने की अपील की है. संगठन का आरोप है कि मौजूदा विकास मॉडल में बड़े कॉरपोरेट घरानों को अधिक प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि किसानों और श्रमिकों की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा.

MSP सहित किसानों की कई मांग

किसान संगठन की प्रमुख मांगों में सभी फसलों पर सी2+50 प्रतिशत फार्मूले के आधार पर एमएसपी की कानूनी गारंटी, किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी, युवाओं के लिए रोजगार और मजदूरों के लिए न्यूनतम वेतन शामिल हैं. इसके अलावा कृषि क्षेत्र में निजी कंपनियों की बढ़ती भूमिका पर रोक लगाने, सहकारी खेती को बढ़ावा देने और राज्यों को अधिक वित्तीय अधिकार देने की भी मांग की गई है.

एसकेएम ने कहा कि 9 दिसंबर 2021 को किसानों के आंदोलन के बाद केंद्र सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों को अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है. इनमें एमएसपी, किसानों के कर्ज, बिजली से जुड़े मुद्दे और किसानों पर दर्ज मुकदमों की वापसी जैसे विषय शामिल हैं.

26 नवंबर से किसानों का बड़ा आंदोलन

संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि लंबित मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो 26 नवंबर से किसानों का बड़ा और लंबा आंदोलन फिर शुरू किया जा सकता है. एसकेएम का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल किसानों की मांगों तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े व्यापक मुद्दों पर भी जनप्रतिनिधियों का समर्थन जुटाना है.

SKM ने यह भी मांग की है कि राज्यों का टैक्स पूल (जिसमें सेस और सरचार्ज भी शामिल हैं) में हिस्सा मौजूदा 31 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया जाए. उनका तर्क है कि खेती के संकट से निपटने, इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने और खेती पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए राज्यों को ज्यादा आर्थिक आजादी की जरूरत है.

संगठन ने कहा कि इस मेमोरैंडम का मकसद सिर्फ खेती-किसानी से जुड़ी अलग-अलग मांगों तक अभियान को सीमित न रखकर, चुने हुए प्रतिनिधियों को एक बड़े नीतिगत बदलाव के लिए एकजुट करना है. साथ ही, उनसे अपील की गई है कि वे अपने पद का इस्तेमाल करके केंद्र और राज्य सरकारों पर किसानों की आजीविका, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के लिए कदम उठाने का दबाव डालें.(PTI)

MORE NEWS

Read more!