
पंजाब के संगरूर जिले में धूरी के नजदीकी गांव जहांगीर स्थित इथेनॉल फैक्ट्री के खिलाफ किसानों और ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है. फैक्ट्री के बाहर पिछले करीब एक महीने से किसान और आसपास के गांवों के लोग धरने पर बैठे हैं. प्रदर्शनकारियों ने पिछले दो दिनों से सड़क जाम कर रखी है. ग्रामीणों की मांग है कि फैक्ट्री को स्थायी रूप से बंद किया जाए. उनका आरोप है कि फैक्ट्री से निकलने वाली राख, धुएं और कथित दूषित पानी से आसपास के वातावरण, जमीन, भूजल और फसलों पर बुरा असर पड़ रहा है.
प्रदर्शन स्थल पर बड़ी संख्या में किसान, महिलाएं और ग्रामीण मौजूद हैं. प्रदर्शन शुरू करने से पहले महिलाएं सड़क पर बैठकर सतनाम वाहेगुरु का जाप करती हैं. इसके बाद फैक्ट्री के खिलाफ नारेबाजी की जाती है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है. इसी वजह से उन्होंने आंदोलन तेज कर दिया है.
धरने की अगुवाई कर रहे जसमाल सिंह जस्सा ने आरोप लगाया कि फैक्ट्री से निकलने वाली राख और कालिख लोगों के घरों तक पहुंच रही है. इससे आसपास की फसलों को भी नुकसान होने का दावा किया गया है. उन्होंने कहा कि जब तक फैक्ट्री बंद करने की मांग पूरी नहीं होती, तब तक ग्रामीणों का संघर्ष जारी रहेगा.
प्रदर्शन में शामिल गगनदीप कौर ने कहा कि ग्रामीणों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की. ग्रामीणों का कहना है कि उनकी शिकायतों पर उचित कार्रवाई होने के बाद ही समस्या का समाधान हो सकता है.
इस मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से फैक्ट्री को नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है. जानकारी के अनुसार, पराली की गांठों की प्रक्रिया के बाद निकलने वाली राख को ट्रकों के जरिए बाहर ले जाया जाता है. राख को ठंडा करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पानी के ट्रकों से रिसाव होने के मामले में नोटिस जारी किया गया है. फैक्ट्री को नोटिस का जवाब देने के लिए 22 अक्टूबर तक का समय दिया गया है. हालांकि, आरोपों और नोटिस से जुड़े मामले में विभागीय जांच के विस्तृत नतीजे अभी सामने नहीं आए हैं.
वहीं, फैक्ट्री के एमडी पुष्पिंदर सिंह ने ग्रामीणों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि फैक्ट्री विभागीय नियमों के अनुसार काम कर रही है. उन्होंने बताया कि फैक्ट्री से निकलने वाली राख का तापमान काफी अधिक होता है, इसलिए उसे पानी से ठंडा किया जाता है. इसके बाद राख को टिप्परों में भरकर बाहर ले जाया जाता है. इस दौरान कुछ पानी का रिसाव हो सकता है. पुष्पिंदर सिंह ने कहा कि फैक्ट्री प्रबंधन विभाग के नोटिस का जवाब देगा. उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन या ग्रामीण किसी भी समय अचानक जांच करवा सकते हैं.
फैक्ट्री प्रबंधन के मुताबिक, यहां पराली के अलावा मक्का और चावल से भी इथेनॉल तैयार किया जाता है. प्रबंधन का दावा है कि आसपास के खेतों से पराली की गांठें खरीदी जाती हैं, जिससे किसानों को आमदनी होती है. फैक्ट्री में प्रतिदिन करीब 1.25 लाख लीटर इथेनॉल तैयार करने की क्षमता है. पुष्पिंदर सिंह ने यह भी दावा किया कि करीब तीन साल पहले फैक्ट्री स्थापित करते समय गांव जहांगीर से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) लिया गया था. ग्रामीणों की सहमति के बाद ही फैक्ट्री का काम शुरू किया गया था. (कुलवीर सिंह की रिपोर्ट)