गेहूं खरीद में देरी पर किसानों का बड़ा ऐलान, 17 अप्रैल को पंजाब में ‘रेल रोको’ आंदोलन

गेहूं खरीद में देरी पर किसानों का बड़ा ऐलान, 17 अप्रैल को पंजाब में ‘रेल रोको’ आंदोलन

पंजाब में गेहूं खरीद प्रक्रिया में देरी और क्वालिटी मानकों के नाम पर खरीद से इनकार के खिलाफ किसान संगठनों ने 17 अप्रैल को ‘रेल रोको’ आंदोलन का ऐलान किया है. किसानों का आरोप है कि फसल मंडियों में पड़ी है लेकिन सरकार MSP पर खरीद सुनिश्चित नहीं कर रही, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.

सीएम मान पर भड़के किसान नेता पंढेरसीएम मान पर भड़के किसान नेता पंढेर
क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Apr 15, 2026,
  • Updated Apr 15, 2026, 4:48 PM IST

पंजाब भर के किसान संगठनों ने गेहूं खरीद प्रक्रिया को तुरंत शुरू करने की मांग को लेकर 17 अप्रैल को 'रेल रोको' विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है. संगठनों ने खरीद में हो रही देरी को गंभीरता से लिया और बताया कि सरकारी खरीद एजेंसियों ने मंडियों से फसल उठाने से इनकार कर दिया है.

बारिश से प्रभावित और सिकुड़े हुए अनाज क्वालिटी के मानकों पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

कई संगठनों का विरोध

किसान नेता और 2024-25 शंभू बॉर्डर मोर्चा के संयोजक सरवन सिंह पंधेर ने बताया कि संयुक्त किसान मोर्चा (SKM-गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा के तहत कई संगठनों ने मिलकर यह विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है. आजाद किसान मोर्चा से जुड़े संगठनों ने भी इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया है.

संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि नियमों में ढील के साथ खरीद प्रक्रिया तुरंत शुरू नहीं की गई, तो 17 अप्रैल को दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक पूरे पंजाब में रेल यातायात ठप कर दिया जाएगा.

'दि ट्रिब्यून' के साथ बातचीत में किसान नेताओं ने अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि पंजाब के किसानों को पहले आई बाढ़ के कारण पहले ही भारी नुकसान उठाना पड़ा था, जिसके लिए उन्हें बहुत कम राहत मिली थी.

खरीद में ढिलाई का आरोप

एक अन्य किसान नेता मनजीत सिंह धनेर ने कहा कि हाल ही में खराब मौसम के कारण फसलों को और अधिक नुकसान पहुंचा है और गेहूं की क्वालिटी भी प्रभावित हुई है, लेकिन न तो केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकार ने इस मामले में कोई खास तत्परता दिखाई है.

उन्होंने आरोप लगाया कि मंडियों में गेहूं बिना बिके पड़ा है और किसानों को अपनी उपज कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिसका फायदा उठाकर व्यापारी उनकी मजबूरी का गलत लाभ उठा रहे हैं.

संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि नियमों में ढील के साथ खरीद प्रक्रिया तुरंत शुरू नहीं की गई, तो इस आंदोलन को और भी तेज किया जाएगा.

उन्होंने मंडियों में पर्याप्त व्यवस्था करने की भी मांग की, जिसमें जूट के बोरों की उपलब्धता और शौचालय और छाया जैसी बुनियादी सुविधाओं का होना शामिल है.

किसान नेताओं ने कहा कि रेल रोकने का फैसला उनकी मजबूरी थी, क्योंकि किसान अपनी कड़ी मेहनत से उगाई गई फसल को यूं ही बर्बाद होते हुए नहीं देख सकते थे.

उन्होंने केंद्र और पंजाब, दोनों सरकारों से आग्रह किया कि वे बिना किसी देरी के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं की खरीद सुनिश्चित करें और पूरे राज्य में किसान संगठनों को एक साथ कार्रवाई करने की अपील की.

खरीद एजेंसियों का टालू रवैया

इससे पहले, SKM के नेताओं प्रेम सिंह भंगू, मुकेश चंद्र शर्मा और बलदेव सिंह लटाला ने एक बयान में कहा कि हालांकि औपचारिक रूप से खरीद प्रक्रिया 1 अप्रैल से शुरू हो चुकी है, लेकिन खरीद एजेंसियां ​​बेमौसम बारिश के कारण अनाज में नमी, सिकुड़न और रंग बदलने की समस्या का हवाला देते हुए लगातार खरीद करने और किसानों की उपज को अपने रिकॉर्ड में दर्ज करने से इनकार कर रही हैं. 

उन्होंने कहा कि केंद्रीय टीम बेमौसम बारिश के कारण गेहूं को हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए पंजाब आई थी, लेकिन उसने अब तक लगभग 1.30 लाख एकड़ में खराब हुए गेहूं के लिए मुआवजा देने और खरीद की शर्तों में ढील देने के संबंध में कोई रिपोर्ट जमा नहीं की है.

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