
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर चल रहा आदिवासी किसानों और विस्थापित परिवारों का आंदोलन अब बड़ा मुद्दा बन गया है. पिछले 12 दिनों से किसान और प्रभावित लोग धरने पर बैठे हैं. अब इस आंदोलन में कांग्रेस पार्टी की भी एंट्री हो गई है. मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार खुद धरना स्थल पर पहुंचे और आंदोलन कर रहे किसानों से मुलाकात की. उन्होंने किसानों की समस्याएं सुनीं और उनका समर्थन किया.
केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित किसानों और आदिवासी परिवारों का कहना है कि उन्हें अभी तक सही मुआवजा नहीं मिला है. उनका आरोप है कि जमीनों का सर्वे भी ठीक तरीके से नहीं किया गया है. कई परिवारों को डर है कि परियोजना के कारण उनकी जमीन चली जाएगी और उनके सामने रोजगार की समस्या खड़ी हो जाएगी.
आंदोलन कर रहे लोगों का कहना है कि जमीन जाने के बाद उनका जीवन प्रभावित होगा. उन्होंने सरकार से सही मुआवजा, बेहतर पुनर्वास और रोजगार की व्यवस्था करने की मांग की है. इस आंदोलन का नेतृत्व जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर कर रहे हैं.
धरना स्थल पर पहुंचे नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सबसे पहले किसानों और आदिवासी परिवारों से बातचीत की. उन्होंने लोगों से उनकी परेशानियां जानीं और उनकी समस्याओं को समझा. प्रभावित परिवारों ने उन्हें अपनी मांगों से जुड़े आवेदन भी दिए.
उमंग सिंघार ने अधिकारियों से कहा कि किसानों की समस्याओं को जल्द सुना जाए और दिए गए आवेदनों पर कार्रवाई की जाए. उन्होंने मौके पर मौजूद बिजावर एसडीएम से भी इस मामले में जल्द समाधान निकालने की बात कही.
आंदोलन कर रहे लोगों ने पुलिस प्रशासन पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से धरना दे रहे हैं, लेकिन रात के समय पुलिसकर्मी धरना स्थल पर आकर उन्हें परेशान करते हैं और डराने की कोशिश करते हैं.
इन शिकायतों के बाद उमंग सिंघार ने सागर रेंज के आईजी मिथिलेश शुक्ला से फोन पर बात की. उन्होंने पुलिस के व्यवहार की जांच करने और उचित कार्रवाई करने की मांग की.
उमंग सिंघार ने प्रशासन से सवाल किया कि इतने दिनों से आंदोलन कर रहे लोगों के लिए खाने, पीने के पानी और इलाज जैसी जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था क्यों नहीं की गई. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि धरना स्थल पर लोगों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं.
आंदोलन को खत्म करने और समस्या का समाधान निकालने के लिए एक नई पहल भी की गई है. उमंग सिंघार ने एक प्रस्ताव तैयार किया, जिसमें आंदोलनकारी संगठन और प्रशासन के बीच बातचीत के लिए संयुक्त समिति बनाने की बात कही गई है.
इस समिति में जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर की टीम और प्रशासन के अधिकारी शामिल होंगे. समिति परियोजना से जुड़ी जानकारी और किसानों की मांगों की जांच करेगी. आंदोलनकारी किसानों ने भी इस पहल का स्वागत किया है, लेकिन उनका कहना है कि अंतिम फैसला प्रशासन की कार्रवाई देखने के बाद लिया जाएगा.
केन-बेतवा लिंक परियोजना का यह मामला अब सिर्फ किसानों और विस्थापितों की समस्या तक सीमित नहीं रहा है. कांग्रेस के नेता के धरना स्थल पर पहुंचने के बाद यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है.
धरना स्थल पर पूर्व विधायक आलोक चतुर्वेदी, पूर्व विधायक नीरज दीक्षित, कांग्रेस जिला अध्यक्ष गगन यादव, युवक कांग्रेस के कार्यकर्ता, बिजावर एसडीएम और किशनगढ़ थाना प्रभारी समेत कई लोग मौजूद रहे.
अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार किसानों की मांगों को लेकर क्या कदम उठाती है और संयुक्त समिति की बातचीत से इस आंदोलन का क्या समाधान निकलता है. (लोकेश चौरसिया का इनपुट)
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