कर्नाटक में सूखे से 46,324 करोड़ के फसल नुकसान का अनुमान, डिप्टी सीएम ने केंद्र से मांगी तत्काल मदद

कर्नाटक में सूखे से 46,324 करोड़ के फसल नुकसान का अनुमान, डिप्टी सीएम ने केंद्र से मांगी तत्काल मदद

कर्नाटक में सूखे का संकट गंभीर हो गया है. राज्य में 177 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है और करीब 47.09 लाख हेक्टेयर फसल क्षेत्र में नुकसान का अनुमान है. उप मुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने केंद्र से तत्‍काल मदद की मांग की है.

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क‍िसान तक
  • Noida,
  • Oct 01, 2026,
  • Updated Oct 01, 2026, 7:40 PM IST

कर्नाटक में सूखे की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है. राज्य में अब तक 177 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया जा चुका है और खरीफ 2026 में फसलों को हुए नुकसान का अनुमान 46,324.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. इस बीच कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने केंद्र सरकार से किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को राहत देने के लिए तत्काल सहायता जारी करने की मांग की है. डिप्‍टी सीएम ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को अलग-अलग पत्र भेजकर कर्नाटक के सूखा प्रभावित इलाकों के लिए जल्द सहायता उपलब्ध कराने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि सूखे के व्यापक असर को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वित कार्रवाई जरूरी है, ताकि किसानों को समय पर राहत मिल सके.

177 तालुक सूखा प्रभावित घोषित

राज्य सरकार ने पहले खरीफ 2026 के लिए 101 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित करते हुए 3,705.30 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता की मांग की थी. इसके बाद वैज्ञानिक आकलन के आधार पर 76 और तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया. इस तरह प्रभावित तालुकों की संख्या बढ़कर 177 हो गई है. राज्य सरकार के अनुसार, अन्य 40 तालुकों में जमीनी स्तर पर नुकसान का आकलन यानी ग्राउंड-ट्रुथिंग जारी है. मौजूदा आकलन पूरा होने के बाद सूखा प्रभावित तालुकों की संख्या 220 से अधिक होने की संभावना जताई गई है.

नए घोषित 76 सूखा प्रभावित तालुकों में 26.08 लाख हेक्टेयर कृषि फसल क्षेत्र और 1.49 लाख हेक्टेयर बागवानी फसल क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है. इन दोनों को मिलाकर प्रभावित क्षेत्र करीब 27.57 लाख हेक्टेयर है. सरकारी आकलन के मुताबिक, फसलों को 33 फीसदी से लेकर 100 फीसदी तक नुकसान हुआ है. प्रभावित इलाकों के बड़े हिस्से में नुकसान 50 फीसदी से अधिक दर्ज किया गया है.

तुअर, मक्का, कपास और गन्ने को बड़ा नुकसान

सूखे की मार से तुअर, मक्का, कपास, गन्ना, सोयाबीन और हरे चने जैसी प्रमुख फसलें प्रभावित हुई हैं. बागवानी फसलों में प्याज, सुपारी और लाल मिर्च को भी नुकसान पहुंचा है. 76 नए सूखा प्रभावित तालुकों में फसल नुकसान से करीब 27,576.2 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान आंका गया है. राज्य सरकार ने मौजूदा SDRF मानकों के तहत इन क्षेत्रों के लिए 2,981.34 करोड़ रुपये की इनपुट सब्सिडी की जरूरत बताई है.

कर्नाटक के सभी 177 सूखा प्रभावित तालुकों को मिलाकर करीब 47.09 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसल नुकसान की रिपोर्ट है. राज्य सरकार के आकलन के अनुसार इससे होने वाला आर्थिक नुकसान 46,324.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. जी. परमेश्वर ने कहा है कि जारी आकलन के आधार पर खरीफ 2026 में कुल फसल नुकसान 55 लाख हेक्टेयर से अधिक हो सकता है.

कर्नाटक सरकार ने सूखे की दो चरणों में हुई घोषणा के आधार पर राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष यानी NDRF के मानकों के तहत कुल 7,142.64 करोड़ रुपये की सहायता मांगी है. इसमें 4,998.60 करोड़ रुपये इनपुट सब्सिडी और 2,144.04 करोड़ रुपये चारे, पेयजल आपूर्ति और अन्य राहत उपायों के लिए मांगे गए हैं.

राहत मानकों में बदलाव की मांग

अमित शाह को लिखे पत्र में जी. परमेश्वर ने SDRF और NDRF के तहत मिलने वाली सहायता के मदों और मानकों में जल्द संशोधन करने की मांग की है. उन्होंने खास तौर पर किसानों को मिलने वाली इनपुट सब्सिडी के मौजूदा प्रावधान को बदलने की जरूरत बताई है.

उप मुख्यमंत्री के मुताबिक, मौजूदा इनपुट सब्सिडी खेती की वर्तमान लागत के मुकाबले अपर्याप्त है और किसानों को हुए वास्तविक नुकसान के केवल सीमित हिस्से की भरपाई करती है. उन्होंने 16वें वित्त आयोग की अवधि शुरू होने का हवाला देते हुए राहत मानकों में लंबे समय से लंबित संशोधन को प्राथमिकता देने का आग्रह किया.

केंद्रीय टीम से जल्द आकलन पूरा करने की अपील

शिवराज सिंह चौहान को लिखे पत्र में जी. परमेश्वर ने कर्नाटक में सूखे की स्थिति का आकलन करने के लिए केंद्रीय टीम के पहुंचने का स्वागत किया. उन्होंने टीम से आकलन की प्रक्रिया जल्द पूरी करने और राज्य की सहायता संबंधी मांग पर शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया.

जी. परमेश्वर ने कहा कि सूखे की गंभीरता को देखते हुए राज्य और केंद्र सरकारों को मिलकर काम करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर और पर्याप्त सहायता मिलनी चाहिए तथा राहत का स्तर किसानों को हुए वास्तविक नुकसान को ध्यान में रखकर तय किया जाना चाहिए. (पीटीआई)

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