कर्नाटक विधानसभा में कस्तूरीरंगन रिपोर्ट और सूखे पर विशेष चर्चा, मंत्री ने ‘स्‍पेशल सेशन’ की बात नकारी

कर्नाटक विधानसभा में कस्तूरीरंगन रिपोर्ट और सूखे पर विशेष चर्चा, मंत्री ने ‘स्‍पेशल सेशन’ की बात नकारी

कर्नाटक सरकार ने विधानसभा की तीन दिन की बैठक को ‘विशेष सत्र’ कहने पर विपक्ष की आपत्ति स्वीकार करते हुए इसे मॉनसून सत्र के तहत विशेष चर्चा बताया है. चर्चा में कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के आधार पर पश्चिमी घाट को पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने के प्रस्ताव और राज्य में सूखे की स्थिति पर मंथन होगा.

Karntaka drought special discussionKarntaka drought special discussion
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Sep 21, 2026,
  • Updated Sep 21, 2026, 3:59 PM IST

कर्नाटक सरकार ने सोमवार को साफ किया कि विधानसभा की तीन दिन की बैठक को अलग से ‘विशेष सत्र’ कहना सही नहीं था. कानून और संसदीय कार्य मंत्री कृष्ण बायरे गौड़ा ने विधानसभा में विपक्ष की आपत्ति स्वीकार करते हुए कहा कि यह बैठक चल रहे मॉनसून सत्र का ही हिस्सा है और इसे विशेष चर्चा के तौर पर लिया जाना चाहिए. कृष्ण बायरे गौड़ा ने कहा कि विधानसभा को किसी नए या अलग विशेष सत्र के लिए नहीं बुलाया गया है. उन्होंने कहा कि लंबित जनहित के मुद्दों पर चर्चा के लिए मॉनसून सत्र की बैठक आगे बढ़ाई गई है. इस दौरान सदस्यों को महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा.

कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर किसानों की चिंता

बैठक में पश्चिमी घाट से जुड़े कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के मुद्दे पर चर्चा को प्रमुखता दी जा रही है. रिपोर्ट के आधार पर पश्चिमी घाट के बड़े हिस्से को पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र (ESA) घोषित करने का प्रस्ताव है. सरकार का कहना है कि इस विषय पर किसानों, स्थानीय निवासियों और अन्य संबंधित पक्षों की चिंताओं को सदन में रखा जाएगा.

केंद्र ने जारी किया सातवां ड्राफ्ट

केंद्र सरकार ने 27 जुलाई 2026 को पश्चिमी घाट के पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र से संबंधित सातवां ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया था. इस पर आपत्तियां और सुझाव दाखिल करने के लिए 60 दिन का समय दिया गया है. प्रस्ताव के तहत छह राज्यों में करीब 56,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र के दायरे में लाने की बात कही गई है.

10 जिलों के इलाके शामिल करने का प्रस्‍ताव

प्रस्तावित पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र में कर्नाटक का करीब 20,668 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र शामिल है. इसमें 10 जिलों के 33 तालुक और 1,449 गांव आते हैं. इनमें बेलगावी, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, कोडगु, हासन, उत्तर कन्नड़, दक्षिण कन्नड़, मैसूरु, शिवमोग्गा और उडुपी शामिल हैं.

राज्य पहले भी जता चुका है विरोध

कर्नाटक सरकार केंद्र की ओर से जारी पश्चिमी घाट से जुड़े ड्राफ्ट नोटिफिकेशन का पहले भी विरोध कर चुकी है. राज्य सरकार का कहना है कि प्रस्तावित प्रावधानों का असर पश्चिमी घाट क्षेत्र में रहने वाले लोगों और किसानों की आजीविका और भविष्य के विकास पर पड़ सकता है. मंत्री कृष्ण बायरे गौड़ा ने कहा कि राज्य का अंतिम रुख सभी सदस्यों और संबंधित पक्षों की बात सुनने के बाद तय किया जाएगा.

चर्चा के केंद्र में सूखे की स्थिति

विधानसभा की यह चर्चा ऐसे समय हो रही है जब कर्नाटक के कई हिस्से सूखे की स्थिति से जूझ रहे हैं. अब तक राज्य के 124 तालुक को सूखाग्रस्त घोषित किया जा चुका है. सरकार की ओर से अन्य प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति का आकलन भी जारी है.

कर्नाटक विधानसभा का मॉनसून सत्र पहले 27 अगस्त तक चलना प्रस्तावित था, लेकिन भाजपा के विरोध और सदन में व्यवधान के बीच इसे 24 अगस्त को ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था. अब सरकार ने लंबित जनहित के मुद्दों पर चर्चा के लिए बैठक आयोजित की है. (पीटीआई)

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