कर्नाटक विधानसभा ने कस्तूरीरंगन रिपोर्ट खारिज की, केंद्र से खेती-बागवानी के इलाके ESA से बाहर रखने की मांग

कर्नाटक विधानसभा ने कस्तूरीरंगन रिपोर्ट खारिज की, केंद्र से खेती-बागवानी के इलाके ESA से बाहर रखने की मांग

कर्नाटक विधानसभा ने पश्चिमी घाट से जुड़ी कस्तूरीरंगन रिपोर्ट को मौजूदा स्वरूप में खारिज करते हुए केंद्र से इसमें संशोधन की मांग की है. राज्य ने कई क्षेत्रों को ESA के दायरे से बाहर रखने की मांग की है.

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क‍िसान तक
  • Noida,
  • Sep 22, 2026,
  • Updated Sep 22, 2026, 7:29 PM IST

कर्नाटक विधानसभा ने मंगलवार को पश्चिमी घाट के संरक्षण से जुड़ी के. कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट को मौजूदा स्वरूप में खारिज करने का प्रस्ताव पारित किया. विधानसभा में रिपोर्ट पर हुई विशेष चर्चा के बाद मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने सदन में प्रस्ताव पढ़कर सुनाया. इसमें केंद्र सरकार से रिपोर्ट और उससे जुड़े प्रस्तावित पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र यानी ESA की अधिसूचना की कमियों को दूर करने की मांग की गई है. प्रस्ताव में कहा गया कि कर्नाटक में पश्चिमी घाट राज्य के प्राकृतिक संसाधनों, जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है. राज्य सरकार ने कहा कि पश्चिमी घाट के संरक्षण के साथ स्थानीय लोगों की आजीविका और विकास से जुड़े मुद्दों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए.

1,449 गांवों को ESA में शामिल करने का प्रस्ताव

प्रस्ताव के मुताबिक, केंद्र सरकार ने 27 जुलाई 2026 को कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के आधार पर पश्चिमी घाट के लिए सातवां मसौदा पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र अधिसूचना जारी की थी. इसमें कर्नाटक के 10 जिलों के 1,449 गांवों में करीब 20,668 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को ESA के तहत शामिल करने का प्रस्ताव है.

खेती और बागान की जमीन को लेकर आपत्ति

कर्नाटक विधानसभा ने कहा कि प्रस्तावित ESA में केवल वन क्षेत्र ही नहीं, बल्कि कृषि भूमि, बागान, घर और अन्य मानवीय गतिविधियों वाले क्षेत्र भी शामिल हो गए हैं. राज्य सरकार के मुताबिक, इससे घर बनाने, परिवार की संपत्ति के बंटवारे और विरासत से जुड़े मामलों में स्थानीय लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है.

प्रस्ताव में कहा गया कि प्रस्तावित क्षेत्र की सीमाएं संयुक्त भौतिक सर्वेक्षण के बजाय सैटेलाइट डेटा के आधार पर तय की गई हैं. विधानसभा ने कहा कि मसौदा अधिसूचना में सर्वे नंबर के आधार पर स्पष्ट सीमाएं निर्धारित नहीं की गई हैं. राज्य सरकार ने इस वजह से जमीन की वास्तविक स्थिति और अधिसूचना में शामिल क्षेत्र के बीच अंतर की आशंका जताई है.

वन अधिकार और जमीन नियमितीकरण के मुद्दे भी उठे

विधानसभा ने बगैर हुकुम वन अधिकार, डीम्ड फॉरेस्ट, भूमि नियमितीकरण, अपील और अदालतों में लंबित मामलों से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया. प्रस्ताव में कहा गया कि इन मामलों का समाधान किए बिना ESA संबंधी अंतिम फैसला लेने से प्रभावित लोगों के सामने और समस्याएं खड़ी हो सकती हैं.

किसानों-श्रमिकों के लिए आर्थिक मदद की मांग

राज्य सरकार ने यह भी कहा कि कस्तूरीरंगन रिपोर्ट में ESA से जुड़े प्रतिबंधों से प्रभावित लोगों के लिए विशेष आर्थिक सहायता या वैकल्पिक आजीविका का पर्याप्त प्रावधान नहीं किया गया है. विधानसभा ने केंद्र से प्रभावित किसानों और मजदूरों के लिए वैकल्पिक रोजगार और आर्थिक सहायता की विस्तृत व्यवस्था के दिशा-निर्देश तैयार करने की मांग की.

प्रस्ताव में कहा गया कि किसी गांव के करीब एक-पांचवां हिस्सा वन सीमा में होने के आधार पर पूरे गांव को पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र घोषित करना वैज्ञानिक प्रक्रिया नहीं है. इस तरह के प्रावधान से स्थानीय आबादी में काफी असंतोष पैदा हुआ है.

कृषि और रिहायशी इलाकों को बाहर रखने की मांग

कर्नाटक विधानसभा ने केंद्र से कहा कि ESA का दायरा अधिसूचना में बताए गए वन क्षेत्रों और अन्य वन क्षेत्रों तक सीमित रखा जाए. कृषि और बागवानी भूमि, बागान, मानव बस्तियों तथा सार्वजनिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होने वाले क्षेत्रों को इससे बाहर रखने की मांग की गई है, हालांकि पहले से स्वीकृत या मंजूर गतिविधियों के संबंध में अलग व्यवस्था का सुझाव दिया गया है.

राज्य ने केंद्र से एक विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की है. यह समिति वन सीमाओं, मानव बस्तियों, पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्रों और कृषि क्षेत्रों की अलग-अलग पहचान करते हुए सर्वे नंबर के आधार पर भौतिक माप कर सकती है. राज्य सरकार ने खुद भी सर्वे नंबरों का भौतिक सत्यापन कराने का प्रस्ताव रखा है.

कर्नाटक ने मांगा एक साल का समय

प्रस्ताव में केंद्र से कर्नाटक को यह प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक वर्ष का समय देने का अनुरोध किया गया है. राज्य सरकार के मुताबिक भौतिक सर्वेक्षण पूरा होने के बाद वह अपनी रिपोर्ट केंद्र को सौंपेगी. इसके बाद केंद्र और राज्य सरकार के बीच विस्तृत चर्चा के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाना चाहिए.

केंद्र सरकार के 27 जुलाई के सातवें मसौदा नोटिफिकेशन में कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के आधार पर छह राज्यों में करीब 56,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने का प्रस्ताव है. मसौदे में आपत्तियां और सुझाव दर्ज कराने के लिए 60 दिनों का समय दिया गया है. कर्नाटक में प्रस्तावित ESA का दायरा 20,668 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें 10 जिले, 33 तालुक और 1,449 गांव शामिल हैं. इनमें बेलगावी, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, कोडागु, हासन, उत्तर कन्नड़, दक्षिण कन्नड़, मैसूरु, शिवमोग्गा और उडुपी जिले शामिल हैं. (पीटीआई)

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