
मध्यप्रदेश के सागर की कृषि उपज मंडी में गुरुवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब हम्मालों की हड़ताल के चलते खरीदी ठप हो गई और गुस्साए किसानों ने सड़क पर उतरकर चक्काजाम कर दिया. तपती गर्मी में कई दिनों से परेशान किसान आखिरकार फट पड़े और इसी बीच वहां से गुजर रहे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी की गाड़ी को रोक लिया गया. मंडी के बाहर सैकड़ों किसान इकट्ठा थे. उनकी एक ही मांग थी, खरीदी तुरंत शुरू की जाए और अव्यवस्थाओं को खत्म किया जाए, जैसे ही जीतू पटवारी वहां पहुंचे, किसानों ने उन्हें घेर लिया और सीधे मंडी के अंदर ले गए. किसानों ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि वो कई दिनों से अनाज लेकर मंडी में बैठे हैं, लेकिन खरीदी नहीं हो रही, न छांव, न पानी, और ऊपर से भीषण गर्मी.
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जीतू पटवारी ने मौके पर ही सागर कलेक्टर संदीप जीआर को फोन लगाया. फोन पर उन्होंने तीखे शब्दों में नाराजगी जताते हुए कहा “कलेक्टर साहब, जीतू पटवारी बोल रहा हूं… यहां किसान 3-4 दिन से परेशान हैं, क्या आपको इसकी जानकारी नहीं? किसान गर्मी में पड़ा है, लेकिन खरीदी बंद है… प्रशासन क्या कर रहा है?” पटवारी ने कलेक्टर से तुरंत मंडी पहुंचकर व्यवस्था सुधारने और खरीदी शुरू कराने की मांग की. उन्होंने साफ चेतावनी दी कि अगर शाम 7 बजे तक समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे खुद वापस मंडी आएंगे और आंदोलन तेज करेंगे.
दरअसल, सागर मंडी में हम्मालों की हड़ताल के चलते खरीदी पूरी तरह प्रभावित हो गई है. मजदूरों के काम बंद करने से अनाज की तौल और लोडिंग रुक गई है, जिससे किसान फंस गए हैं. कई किसान तो कई दिनों से अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ मंडी में डेरा डाले बैठे हैं. गुस्साए किसानों ने मंडी के बाहर सड़क पर चक्काजाम कर दिया, जिससे यातायात भी प्रभावित हुआ. इसी दौरान पटवारी का काफिला वहां से गुजर रहा था और किसान उन्हें रोककर अपनी बात सुनाने लगे.
इस दौरान पटवारी ने केंद्र सरकार और कृषि नीतियों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा “यह लड़ाई भाजपा या कांग्रेस की नहीं, बल्कि किसानों के हक की है.” उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधते हुए कहा कि वे देशभर में किसानों की आय बढ़ने के दावे करते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है. जीतू पटवारी ने किसानों से पूछा कि क्या उनकी आय बढ़ी है? इस पर किसानों ने एक स्वर में ‘नहीं’ कहा.
इसके बाद उन्होंने कहा कि झूठ बोलकर किसानों को गुमराह किया जा रहा है. फिलहाल प्रशासन हरकत में आया है और स्थिति को संभालने की कोशिश की जा रही है. लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर मंडियों की बदहाल व्यवस्था और किसानों की समस्याओं को उजागर कर दिया है. (हिमांशु पुरोहित की रिपोर्ट)