
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक और कृषि स्तर पर चिंता तेज हो गई है. राज्य सरकार ने साफ कहा है कि किसी भी ऐसे फैसले को स्वीकार नहीं किया जाएगा जिससे प्रदेश के बागवानों और किसानों के हित प्रभावित हों. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सेब उत्पादकों और बागवानों की चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि अगर विदेशी फलों पर आयात शुल्क में कमी की जाती है तो हिमाचल की बागवानी आधारित अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ सकता है. सुक्खू ने कहा कि इससे पहले न्यूजीलैंड के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते के दौरान भी ऐसे ही मुद्दे उठे थे और उस समय किसानों और बागवानों के हित सुरक्षित रखने का भरोसा दिया गया था. इसके बावजूद उत्पादकों के बीच चिंता बनी हुई है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के किसान और बागवान पहले ही कई चुनौतियों से जूझ रहे हैं. ऐसे में आयात बढ़ाने वाली नीतियां स्थानीय उत्पादकों के लिए आर्थिक दबाव पैदा कर सकती हैं. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस मामले को केंद्र सरकार के सामने मजबूती से उठाएगी.
हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने भी इंडिया-यूएस ट्रेड डील के संभावित असर को लेकर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि आयात शुल्क में बड़ी कटौती या उसे हटाने का फैसला राज्य की कृषि और बागवानी व्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है.
पठानिया ने बताया कि बागवानी संगठनों ने प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर अपनी चिंताएं पहले ही दर्ज कराई हैं. उन्होंने कहा कि फल, सब्जियां और फ्लोरीकल्चर प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार हैं और लाखों लोगों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है.
उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से प्रभावित हुई है इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर लिए जाने वाले फैसलों में हिमाचल के हितों को पर्याप्त महत्व मिलना चाहिए. उन्होंने भरोसा जताया कि इस मुद्दे को आगे भी विभिन्न मंचों पर उठाया जाएगा.
प्रस्तावित इंडिया-यूएस ट्रेड डील (India-US Trade Deal) को लेकर हिमाचल के बागवानी क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है. स्थानीय उत्पादकों को आशंका है कि अगर विदेशी फलों का आयात आसान हुआ तो प्रदेश के सेब और अन्य फलों की बाजार प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है. इसी कारण राज्य सरकार ने केंद्र से किसानों और बागवानों के लिए सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की मांग की है. (एएनआई)