
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर किसानों और आम लोगों में चिंता बढ़ती जा रही है. किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि यह डील किसानों के लिए खतरे की घंटी हो सकती है. उनका कहना है कि अगर खेती को इस समझौते में शामिल किया गया, तो छोटे किसान बड़े विदेशी किसानों से मुकाबला नहीं कर पाएंगे. इससे खेती पर बड़ा असर पड़ सकता है.
गुरनाम सिंह चढूनी का कहना है कि इस ट्रेड डील से खेती ही नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा. खासकर डेयरी, खाद्य सुरक्षा और MSP जैसी योजनाओं पर दबाव आ सकता है. अगर बाहर से सस्ता अनाज और डेयरी उत्पाद भारत आएंगे, तो किसानों को अपनी फसल कम दाम पर बेचनी पड़ेगी. इससे उनकी आमदनी घट सकती है.
किसानों को यह भी डर है कि इस समझौते के बाद बड़ी-बड़ी कंपनियों का खेती पर नियंत्रण बढ़ सकता है. इससे किसानों को महंगे बीज, खाद और दवाइयाँ खरीदनी पड़ सकती हैं. इससे खेती करना और मुश्किल हो जाएगा.
गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि इस मुद्दे के विरोध में 23 मार्च को कुरुक्षेत्र के पिपली अनाज मंडी में किसान-मजदूर जन क्रांति रैली आयोजित की जाएगी. इस रैली में बड़ी संख्या में किसान और मजदूर शामिल होंगे और अपनी आवाज उठाएंगे.
किसानों और संगठनों ने सरकार से इस ट्रेड डील को रद्द करने की मांग की है. साथ ही MSP की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी और किसानों को बेहतर सुविधाएं देने की बात कही है. उनका कहना है कि सरकार को किसानों के हित में फैसले लेने चाहिए.
किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन और तेज हो सकता है. उनका कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ किसानों की नहीं, बल्कि पूरे देश की भलाई की है.
कुल मिलाकर, भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर किसानों में चिंता और विरोध दोनों बढ़ रहे हैं. आने वाले समय में यह मुद्दा और बड़ा बन सकता है, क्योंकि किसान अपने हक के लिए आवाज उठाने के लिए तैयार हैं.
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