जागरूकता से एटा के किसानों की बदली सोच, किसान कारवां में पहुंचे सैंकड़ों अन्नदाता

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जागरूकता से एटा के किसानों की बदली सोच, किसान कारवां में पहुंचे सैंकड़ों अन्नदाता

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पीतल की घंटियों और घुंघरुओं की झनकार के साथ अपनी ऐतिहासिक और समृद्ध विरासत को संजोए जिला एटा में किसान तक का किसान कारवां सुल्तानपुर गांव पहुंचा. राज्य के 75 जिलों की कवरेज में सुल्तानपुर जनपद किसान कारवां का सातवां पड़ाव रहा.
 

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कार्यक्रम में काफी संख्या में ग्रामीण किसान पहुंचे. वहीं, किसान कारवां कार्यक्रम में आए कृषि वैज्ञानिक,कृषि और पशुपालन से जुड़े अधिकारियों सहित इफको और चंबल फर्टिलाइजर के प्रतिनिधियों द्वारा किसानों को खेती से जुड़ी जानकारी दिया गया. वहीं, लकी ड्रा के जरिए कार्यक्रम में आए 10 किसानों की 500 तो दूसरे विजेता को 2000 और पहले विजेता को 3000 रुपये की राशि दी गई.
 

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पहले चरण में कृषि विभाग के एडीओ जितेंद्र कुमार ने सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे कृषि यंत्रों की जानकारी किसानों को दी.उन्होंने बताया कि जिन किसानों को कृषि यंत्रों की आवश्यकता है, वे आवेदन प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं. इस दौरान मटर, टमाटर सहित सब्जियों की खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई.
 

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दूसरे चरण में चंबल फर्टिलाइजर के एरिया मैनेजर भूपेंद्र राणा सिंह ने कंपनी के उत्पादों और किसानों को उर्वरकों के माध्यम से दी जा रही सहायता की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने किसानों से मिट्टी की जांच कराने की अपील की और कंपनी द्वारा उपलब्ध मिट्टी जांच सुविधा के बारे में बताया.
 

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तीसरे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र, एटा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनीष कुमार सिंह ने पराली प्रबंधन, प्राकृतिक खेती और गोबर के सही उपयोग पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि पुरानी और पारंपरिक तकनीकों को अपनाकर गोबर खाद का प्रभावी उपयोग किया जा सकता है.
 

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चौथे चरण में मैजिशियन सलमान ने अपने जादुई अंदाज में किसान तक के किसान कारवां के संदेशों को किसानों तक पहुंचाया. उन्होंने मुथूट फाइनेंस के माध्यम से किसानों को खेती के लिए आसानी से लोन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया समझाई. साथ ही चंबल फर्टिलाइजर के उत्पादों को भी रोचक तरीके से प्रस्तुत किया.
 

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पांचवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक नीरज सिंह ने किसानों को यह बताया कि कौन-सी खेती उनके लिए अधिक लाभकारी हो सकती है. उन्होंने पोषण वाटिका के सही उपयोग और इसकी खेती की विधि पर जानकारी दी. साथ ही सब्जी की खेती के साथ मेड़ों पर फलदार पौधे लगाने की सलाह दी और किसानों से अपील की कि वे अपने बच्चों के लिए उपजाऊ मिट्टी और फलदार वृक्ष छोड़कर जाएं.

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छठे चरण में केवीके एटा के डॉ. शिव प्रताप ने किसानों को आय दोगुनी करने के उपाय बताए. उन्होंने पशुपालन के माध्यम से आमदनी बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की.  साथ ही ठंड के मौसम में सब्जियों में लगने वाले रोगों और पाले से बचाव के उपायों की जानकारी साझा की.

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सातवें चरण में लकी ड्रा के तहत विजेताओं की घोषणा की गई. 500 रुपये के दस पुरस्कार धर्मेंद्र, तोड़ी लाल, वीरेंद्र, हरवेंद्र, देवजीत, कुंवर पाल, मुकेश कुमार, पिंकू, प्रवीण और हेमराज को दिए गए. दूसरे पुरस्कार के रूप में 2,000 रुपये की राशि विपिन कुमार को मिली, जबकि प्रथम पुरस्कार के रूप में 3,000 रुपये की राशि जगनेश कुमार को दी गई.

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