
रामगंगा नदी के तट पर बसा ऐतिहासिक और कृषि-औद्योगिक केंद्र वाला जनपद बरेली में किसान तक किसान कारवां अपने यूपी के 75 जिलों की यात्रा के 62वें पड़ाव के रूप में ब्लॉक भौजीपुरा के हमीरपुर गांव पहुंचा. सुरमा और झुमका बनाने को लेकर विश्व के बाजार में मशहूर रहने वाला जनपद बरेली कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में भी देश और विदेश में अपनी एक अलग पहचान रखता है.
पहले चरण में केवीके बरेली, डॉक्टर रंजीत सिंह ने किसानों को उर्वरकों के संतुलित प्रयोग के बारे में बताया. उन्होंने बताया कि बरेली जिले में जीवाश्म का स्तर 0.3 के आसपास है, जो काफी चिंताजनक है, जबकि 0.5 से अधिक होना चाहिए. आगे उन्होंने किसानों को मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने पर जोर दिया. उन्होंने किसानों की आय को दोगुना करने का सुझाव भी दिया.
दूसरे चरण में कृषि विभाग के दिनेश कुमार ने किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ कैसे लें, इसको लेकर जानकारी दी. उन्होंने किसानों को ई-केवाईसी करने को लेकर जागरूक किया. इसके साथ ही उन्होंने किसानों को फार्मर आईडी बनवाने पर जोर दिया और कहा कि अब कोई भी सरकार द्वारा चलाई जा रही योजना हो, या गेहूं की खरीद, या उर्वरक ये सभी उन्हीं किसानों को दिए जाएंगे जिनका फार्मर आईडी बना हुआ है.
तीसरे चरण में इफको बरेली के क्षेत्रीय अधिकारी कार्तिक सिंह ने किसानों को नैनो यूरिया और डीएपी के बारे में जानकारी दी. इसके साथ ही उन्होंने किसानों को नैनो यूरिया और दानेदार यूरिया के बीच का अंतर और इसके सही तरीके से उपयोग के बारे में बताया. इसके अलावा नैनो जिंक, नैनो कॉपर सहित सागरिका तरल के बारे में भी किसानों को विस्तार से जानकारी दी.
चौथे चरण में IVRI बरेली के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. जे.के. प्रसाद ने किसानों को बताया कि IVF के जरिए देसी नस्ल सुधार में क्रांतिकारी बदलाव आ रहा है. आगे उन्होंने कहा कि पशुओं के गर्भाधान के लिए सेक्स सॉर्टेड सीमेन के उपयोग के बारे में किसानों को जागरूक किया.
पांचवें चरण में IVRI बरेली के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अमित कुमार ने किसानों को पशुओं में उन्नत नस्ल के बारे में जानकारी दी. इसके साथ ही उन्होंने किसानों को सुकर फार्म को लेकर IVRI द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि सुकर फार्म किसानों की आय दोगुनी करने में काफी मददगार साबित होगा.
छठवें चरण में इफको एमसी के क्षेत्रीय अधिकारी हरीश कुमार गंगवार ने इफको एमसी से जुड़े उत्पादों के बारे में किसानों को विस्तार से बताया. साथ ही विभिन्न उत्पादों के बारे में भी जानकारी दी. आगे उन्होंने किसानों को माइकोजिन का प्रयोग कैसे करना है और इसके उपयोग से फसल को कितना फायदा मिलेगा, इसके बारे में भी जानकारी दी.
सातवें चरण में पशुपालन विभाग के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने नेपियर घास की खेती को लेकर सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के बारे में जानकारी दी. आगे उन्होंने किसानों को पशु बीमा को लेकर जानकारी देते हुए कहा कि अब किसान पशु बीमा करवा सकते हैं.
आठवें चरण में केवीके बरेली से डॉ. आर. एल. साग ने मिट्टी की उर्वरा शक्ति कैसे बढ़े, इसको लेकर किसानों को जानकारी दी. साथ ही उन्होंने सरकार के द्वारा चलाई जा रही उर्वरकों के संतुलित उपयोग से जुड़े हुए अभियान के बारे में भी किसानों को विस्तार से जानकारी दी. इसके साथ ही उन्होंने किसानों को समय-समय पर मिट्टी जांच कराने को लेकर जागरूक किया.
नौवें चरण में केवीके बरेली से डॉ. शार्दूल विक्रम लाल ने किसानों को पशु गर्भधारण से जुड़ी जानकारी विस्तार से दी. इसके साथ ही उन्होंने किसानों को नवजात बछड़ों और बच्चों में खीस के महत्व के बारे में भी विस्तार से बताया.
दसवें चरण में जादूगर सरनाम ने अपनी कला के माध्यम से खेती से जुड़ी जानकारी प्रस्तुत की. उन्होंने किसानों को गोबर खाद के उपयोग और पशुपालन को बढ़ावा देने का सुझाव दिया. इसके साथ ही उन्होंने किसानों से हर शुभ अवसर पर वृक्ष लगाने की अपील की. इसके अलावा उन्होंने किसानों को आय दोगुनी करने को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी.
ग्यारहवें चरण में धानुका के प्रतिनिधि ऋषभ शर्मा ने कंपनी के 90 उत्पादों के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने किसानों को धानुका के सेम्प्रा सहित अन्य उत्पादों का धान, गेहूं, गन्ना सहित अन्य फसलों में उपयोग कैसे करें, इसको लेकर जानकारी दी. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि धानुका के सभी उत्पादों पर बारकोड लगा रहता है, जिससे उत्पादों से जुड़ी पूरी जानकारी हासिल की जा सकती है.
अंतिम, 12वें चरण में लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया, जिसमें 10 विजेताओं को 500 रुपये और इसके साथ ही कुल पांच विजेताओं को 1000 रुपये दिए गए. ‘किसान तक’ का यह कारवां किसानों को आधुनिक तकनीक, बाजार से जुड़ाव और आय बढ़ाने के उपायों से जोड़ने का एक प्रभावी मंच प्रदान कर रहा है.