Fact Of The Day: पेड़-पौधों में 'नेचुरल घड़ी' करती है काम, दिन-रात का ऐसे चलता है पता

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Fact Of The Day: पेड़-पौधों में 'नेचुरल घड़ी' करती है काम, दिन-रात का ऐसे चलता है पता

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इंसान घड़ी देखकर दिन/रात के समय की सही स्थित‍ि का पता लगा लेते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पौधों को समय का पता कैसे चलता है? उन्‍हें कैसे पता चला है कि दिन लंबा है या छोटा. दरअसल, पौधों के अंदर भी एक तरह की जैविक घड़ी होती है, जो उन्हें दिन और रात की अवधि समझने में मदद करती है. पौधों की इस खास क्षमता को विज्ञान में प्रकाशकालिता यानी (फोटोपीरियोडिज्‍म- Photoperiodism) कहा जाता है.
 

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पौधों की कोशिकाओं में एक विशेष प्रकार का प्रकाश संवेदनशील प्रोटीन होता है, जिसे फाइटोक्रोम (Phytochrome) कहा जाता है. जब सूरज की रोशनी पौधों पर पड़ती है तो यह प्रोटीन सक्रिय हो जाता है और पौधे के अंदर कई जैविक संकेत भेजता है. इन संकेतों के आधार पर पौधे यह समझते हैं कि अभी दिन है या रात.
 

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कई वैज्ञानिक अध्ययनों में यह पाया गया है कि पौधे असल में दिन की बजाय रात की लंबाई को ज्यादा सटीक तरीके से पहचानते हैं. यानी पौधे यह देखते हैं कि अंधेरा कितनी देर तक रहता है. पौधों के अंदर भी एक प्राकृतिक समय प्रणाली होती है, जिसे दैनिक लय यानी (सर्केडियन रिदम- Circadian Rhythm) कहा जाता है.
 

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सर्के‍डियन रिदम लगभग 24 घंटे के चक्र पर काम करती है. इसी घड़ी की मदद से पौधे यह तय करते हैं कि कब बढ़ना है, कब पत्तियां खोलनी हैं और कब फूल बनाना शुरू करना है. साइंस मैग्‍जीन Nature and Science में प्रकाशित कई शोध बताते हैं कि यह जैविक घड़ी पौधों के विकास और फूल आने के समय को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
 

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वैज्ञानिक अध्‍ययनों में पाया गया है कि सभी पौधे एक जैसे नहीं होते. कुछ पौधे तब फूल बनाते हैं, जब रात लंबी होती है, जबकि कुछ पौधे तब फूल बनाते हैं जब रात छोटी होती है. उदाहरण के लिए धान और सोयाबीन जैसी कई फसलें छोटे दिन या लंबी रात में फूल बनाती हैं, जबकि गेहूं जैसी फसलें लंबे दिन में तेजी से बढ़ती हैं.
 

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इस कारण ही अलग-अलग फसलों की बुवाई का समय अलग होता है. अगर फसल को सही मौसम और सही दिन-रात की अवधि नहीं मिले तो उसका विकास और उत्पादन प्रभावित हो सकता है. पौधों के इस गुण को समझना किसानों और वैज्ञानिकों दोनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. कृषि वैज्ञानिक नई किस्में विकसित करते समय यह ध्यान रखते हैं कि फसल किस प्रकार की दिन-रात की अवधि में बेहतर बढ़ेगी. इससे अलग-अलग क्षेत्रों और मौसमों के लिए उपयुक्त किस्में विकसित करना संभव होता है.

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इसे बहुत आसान तरीके से समझें तो पौधे एक तरह की प्राकृतिक घड़ी और लाइट सेंसर के जरिए दिन और रात को पहचानते हैं. जब उन्हें लगता है कि मौसम और दिन-रात की अवधि सही है, तब वे फूल बनाना और बीज तैयार करना शुरू कर देते हैं.

यही कारण है कि प्रकृति में हर पौधे का अपना समय होता है. कोई पौधा बसंत में फूल देता है तो कोई सर्दियों में. यह सब पौधों की उसी अद्भुत प्राकृतिक प्रणाली की वजह से संभव होता है, जो उन्हें दिन और रात की अवधि को समझने में मदद करती है.
 

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