Fact Of The Day: किसानों का दोस्‍त है गोबर की बॉल से खेलने वाला यह कीड़ा, सबसे ताकतवर कीटों में शामिल है नाम

फोटो गैलरी

Fact Of The Day: किसानों का दोस्‍त है गोबर की बॉल से खेलने वाला यह कीड़ा, सबसे ताकतवर कीटों में शामिल है नाम

  • 1/7

अगर आपने कभी खेत, चरागाह या गांव के रास्तों के आसपास ध्यान से देखा हो तो एक छोटा काला कीड़ा गोबर की गोल गेंद बनाकर उसे धकेलते हुए जाता दिखाई देता है. इसे हिंदी में गुबरैला और अंग्रेजी में Dung Beetle कहा जाता है.

  • 2/7

दिखने में यह कीड़ा साधारण लग सकता है, लेकिन यह खेत की मिट्टी को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाता है. इसी कारण कई देशों में इसे खेत के प्राकृतिक सफाईकर्मी के रूप में भी देखा जाता है.
 

  • 3/7

गुबरैला अपनी ताकत के कारण वैज्ञानिकों के लिए भी दिलचस्प कीट माना जाता है. कई प्रजातियां अपने शरीर के वजन से कई गुना ज्यादा भार को धकेल सकती हैं. कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि Onthophagus taurus नाम की प्रजाति अपने शरीर के वजन से लगभग 1000 गुना से अधिक भार खींचने की क्षमता रखती है. इसी वजह से इसे दुनिया के सबसे ताकतवर कीटों में गिना जाता है. यह ताकत उसे गोबर की गेंद बनाकर उसे सुरक्षित जगह तक ले जाने में मदद करती है.
 

  • 4/7

गुबरैला खेत में पड़े पशुओं के गोबर को इकट्ठा करके गेंद बनाता है और उसे मिट्टी के अंदर दबा देता है. इस प्रक्रिया से गोबर धीरे-धीरे मिट्टी में मिल जाता है और मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ते हैं. इससे मिट्टी की संरचना बेहतर होती है और कई सूक्ष्म जीवों की गतिविधि भी बढ़ती है. गोबर के सड़ने से मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व जैसे नाइट्रोजन और फॉस्फोरस धीरे-धीरे उपलब्ध होते हैं, जो फसल की वृद्धि के लिए उपयोगी माने जाते हैं.
 

  • 5/7

खुले में पड़ा गोबर मक्खियों के लिए अंडे देने की जगह बन सकता है. मक्खियां कई तरह की बीमारियां फैलाने में भी भूमिका निभाती हैं. जब गुबरैला गोबर को जल्दी जमीन के अंदर दबा देता है तो मक्खियों के लार्वा के पनपने की संभावना कम हो जाती है. इस तरह यह कीट खेत और पशुशाला के आसपास स्वच्छता बनाए रखने में भी अप्रत्यक्ष मदद करता है.
 

  • 6/7

गुबरैला का जीवन चक्र भी गोबर से ही जुड़ा होता है. आमतौर पर मादा गुबरैला गोबर की छोटी गेंद बनाकर उसे मिट्टी में दबा देती है और उसी के अंदर अंडा देती है. कुछ समय बाद अंडे से लार्वा निकलता है और वह उसी गोबर को खाकर बढ़ता है. इसके बाद वह प्यूपा अवस्था में जाता है और फिर वयस्क गुबरैला बनकर बाहर निकलता है. प्रजाति और मौसम के अनुसार गुबरैला का पूरा जीवन चक्र कुछ हफ्तों से लेकर कई महीनों तक चल सकता है.
 

  • 7/7

विशेषज्ञ बताते हैं कि खेतों में अत्यधिक रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग कई उपयोगी कीटों को भी नुकसान पहुंचा सकता है. गुबरैला भी ऐसे कीटों में शामिल है. जहां खेतों में जैविक पदार्थ अधिक होते हैं और रसायनों का उपयोग कम होता है, वहां गुबरैले अधिक दिखाई देते हैं. 

नोट: सभी तस्‍वीरें एआई जनरेटेड हैं.
 

Latest Photo