छोटी काशी के नाम से मशहूर गाजीपुर जनपद के कोंडरी गांव में ‘किसान तक’ का किसान कारवां पहुंचा. उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे के साझा प्रयास से चल रहे इस विशेष अभियान के तहत प्रदेश के 75 जिलों में किसानों तक खेती की नई तकनीक और सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाई जा रही है. इस अभियान की कवरेज में गाजीपुर जनपद का यह 40वां पड़ाव रहा.
कार्यक्रम के पहले चरण में उद्यान विभाग के निरीक्षक सुरेंद्र पाल ने बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से किसानों के लिए कई फसलों के बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं. इसके साथ ही ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ योजना के तहत किसानों को सिंचाई के लिए पाइप 75 प्रतिशत सब्सिडी पर दिए जा रहे हैं, जबकि स्प्रिंकलर सिंचाई यंत्र 90 प्रतिशत सब्सिडी पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं.
दूसरे चरण में उप कृषि निदेशक विजय कुमार ने बताया कि किसानों के लिए फार्मर रजिस्ट्री कराना बहुत जरूरी है. आने वाले समय में खाद-बीज लेने से लेकर किसान सम्मान निधि का लाभ लेने तक फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य हो जाएगी. उन्होंने बताया कि जनपद में 80 प्रतिशत से अधिक किसानों की फार्मर रजिस्ट्री हो चुकी है.
तीसरे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र के मृदा वैज्ञानिक डॉ. डी.के. सिंह ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी के आवश्यक 16 पोषक तत्वों में कमी आ रही है. उन्होंने बताया कि अगर मिट्टी स्वस्थ नहीं होगी तो उत्पादन और मानव स्वास्थ्य दोनों प्रभावित होंगे, इसलिए संतुलित उर्वरक और जैविक तरीकों का प्रयोग जरूरी है.
चौथे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह ने बताया कि आजादी के समय लोगों की थाली में मोटे अनाज का प्रतिशत लगभग 54 प्रतिशत था, जो अब घटकर 4 प्रतिशत से भी कम रह गया है. उन्होंने किसानों को मोटे अनाज की खेती बढ़ाने की सलाह दी, क्योंकि इसमें लागत कम और लाभ अधिक होता है.
पांचवें चरण में प्लांट प्रोटेक्शन विभाग के वैज्ञानिक डॉ. ओंकार सिंह ने किसानों को फसलों में लगने वाले मित्र और शत्रु कीटों के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि कई बार किसान जानकारी के अभाव में मित्र कीटों को भी कीटनाशक से नष्ट कर देते हैं, जबकि ये कीट फसलों की रक्षा करते हैं.
छठवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र गाजीपुर के अध्यक्ष डॉ. वी.के. सिंह ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि विविधीकरण जरूरी है. उन्होंने पशुपालन, मछली पालन और अलग-अलग फसलों की खेती को अपनाने की सलाह दी. साथ ही किसानों को बीज, सिंचाई और कीटनाशकों के सही उपयोग की जानकारी रखने पर भी जोर दिया.
सातवें चरण में इफको एमसी के मंडल अधिकारी सतीश कुमार यादव ने बताया कि वर्ष 2015 में इफको एमसी की शुरुआत हुई थी. इसका उद्देश्य किसानों को अच्छी क्वालिटी के सुरक्षित कीटनाशक उपलब्ध कराना है. यह जापान की कंपनी के साथ मिलकर किसानों के लिए बेहतर उत्पाद उपलब्ध करा रही है.
आठवें चरण में पशुपालन विभाग के डॉ. सत्य प्रकाश ने बताया कि पशुओं में किलनी एक चूसक कीट है, जिससे दुग्ध उत्पादन प्रभावित होता है और पशु बीमार पड़ जाते हैं. इससे बचाव के लिए विभाग द्वारा उपलब्ध इवरमेक्टिन दवा के प्रयोग और साफ-सफाई बनाए रखने की सलाह दी.
नौवे चरण में इफको के मार्केटिंग इंचार्ज सचिन तिवारी ने किसानों को इफको के अलग-अलग उत्पादों के बारे में बताया. उन्होंने विशेष रूप से नैनो यूरिया और लिक्विड डीएपी के उपयोग और इसके लाभों पर विस्तार से जानकारी दी.
कार्यक्रम के अंत में किसानों के लिए लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया, जिसमें 500 रुपये के 10 पुरस्कार निकाले गए. वहीं, पहला इनाम महिला किसान सुनीता को मिला, जबकि दूसरा इनाम राम लखन ने जीता.