जालना के किसान सुरज मद्दलवार, फूलों की खेती से कमाई की नई मिसाल

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जालना के किसान सुरज मद्दलवार, फूलों की खेती से कमाई की नई मिसाल

पारंपरिक खेती से हटकर नया रास्ता
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जालना जिले के पानशेंद्रा गांव के किसान सुरज मद्दलवार ने पारंपरिक फसल जैसे कपास और सोयाबीन की बजाय फूलों की खेती को अपनाकर सफलता की नई कहानी लिखी है. तीन पीढ़ियों से फूलों की खेती करने वाले मद्दलवार परिवार ने अब आधुनिक तकनीकों के साथ इसे और अधिक लाभदायक बना दिया है.
 

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सुरज लगभग 8 से 10 एकड़ जमीन पर कई प्रकार के फूल उगा रहे हैं. इनमें बिजली, गलांडा, गेंदे का फूल, निशिगंधा, एस्टर और डच रोज शामिल हैं. हर फूल की अलग पैदावार और बाजार मांग उन्हें अच्छे दाम दिलाती है.
 

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फूलों की खेती में एक एकड़ पर लगभग 50 से 60 हजार रुपये खर्च होते हैं. लेकिन इससे दो से ढाई लाख रुपये तक की आमदनी होती है, यानी करीब दो लाख रुपये शुद्ध मुनाफा. इस तरह सालाना कुल आय लगभग 15 से 20 लाख रुपये तक पहुंच जाती है.
 

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फूलों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इनकी मांग पूरे साल बनी रहती है. शादी, समारोह, त्योहार और धार्मिक कार्यक्रमों में फूलों की भारी मांग रहती है, जिससे बाजार में हमेशा अच्छे दाम मिलते हैं.
 

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सुरज अपने खेतों में ड्रिप इरिगेशन (ठिबक सिंचाई) का उपयोग करते हैं. इससे फसल को पर्याप्त पानी मिलता है और पानी की बचत भी होती है. इस साल अच्छी बारिश के चलते फूलों की पैदावार और बेहतर हुई.
 

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सुरज ने लगभग पौन एकड़ जमीन पर बैंगन की खेती भी की, जिसमें उन्होंने ‘बिजली’ फूल का अंतरपीक लगाया. बैंगन की वर्तमान बाजार कीमत 250–300 रुपये प्रति कैरेट है, जिससे यह प्रयोग उनके लिए लाभदायक साबित हुआ.
 

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सुरज अपने फूलों को छत्रपति संभाजीनगर, नांदेड, मुंबई, पुणे, हैदराबाद और इंदौर जैसे शहरों में भेजते हैं. बाजार में अच्छे दाम मिलने के कारण यह खेती उनके लिए निश्चित और लाभदायक विकल्प बन गई है. उनका मानना है कि पारंपरिक खेती के मुकाबले फूलों की खेती मौसम और बाजार के उतार-चढ़ाव से सुरक्षित और फायदे की दृष्टि से बेहतर है.