इंडिया टुडे ग्रुप के डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘किसान तक’ और उत्तर प्रदेश सरकार की पहल ‘किसान कारवां’ का पड़ाव आज सोमवार को श्रवण कुमार की नगरी अंबेडकरनगर पहुंचा. यूपी के 75 जिलों में चल रहे इस विशेष अभियान के तहत अंबेडकरनगर का पापंती इसका 37वां पड़ाव बना. कार्यक्रम में कृषि विभाग, उद्यान विभाग, इफको और कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों व अधिकारियों ने किसानों को आधुनिक खेती, पशुपालन, उन्नत बीज और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी. अंबेडकरनगर कृषि की दृष्टि से समृद्ध जिला माना जाता है. यहां बड़े पैमाने पर तंबाकू की खेती होती है और जिले में कृषि का क्षेत्रफल भी काफी बड़ा है. कार्यक्रम के दौरान किसानों ने खेती और पशुपालन से जुड़ी समस्याएं और अपने अनुभव साझा किए, जिनका समाधान विशेषज्ञों ने मौके पर ही बताया.
कार्यक्रम के पहले चरण में जनपद के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरविंद सिंह ने पशुपालकों को नवजात बछड़ों की देखभाल से जुड़ी अहम जानकारी दी. उन्होंने बताया कि गाय या भैंस के बच्चा देने के बाद निकलने वाला गाढ़ा पीला दूध, जिसे खीस कहा जाता है, नवजात बछड़े के लिए बेहद जरूरी होता है. इसे जन्म के दो घंटे के भीतर पिलाना चाहिए. इससे बछड़े की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. उन्होंने नंद बाबा योजना, नंदिनी योजना और मिनी नंदिनी योजना की जानकारी भी दी.
दूसरे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र अंबेडकरनगर के अध्यक्ष एवं प्रभारी डॉ. रामजीत ने पोषण वाटिका के महत्व को बताया. उन्होंने कहा कि पोषण वाटिका में सब्जियां, दालें और पोषक तत्वों से भरपूर फसलें उगाई जा सकती हैं. उन्होंने कृषि विविधीकरण पर जोर देते हुए कहा कि घटती जोत के कारण किसानों को एक साथ कई फसलों की खेती अपनानी चाहिए. जायद सीजन में खाली खेतों में हरी खाद का उपयोग कर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाई जा सकती है.
तीसरे चरण में कृषि विभाग के सहायक विकास अधिकारी कृषि शिवकुमार वर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार किसानों के साथ खड़ी है और उनके लिए कई योजनाएं संचालित कर रही है. उन्होंने किसानों से इन योजनाओं की जानकारी लेकर उनका लाभ उठाने की अपील की.
चौथे चरण में इफको के क्षेत्रीय प्रबंधक डॉ. देवी प्रसाद ने मृदा स्वास्थ्य के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने बताया कि स्वस्थ मिट्टी में उगने वाली फसलें भी बेहतर होती हैं. उन्होंने किसानों को सागरिका, डीकंपोजर, नैनो यूरिया और लिक्विड डीएपी के उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी.
पांचवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र के प्लांट पैथोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. शिवम कुमार ने किसानों को फसलों में लगने वाली बीमारियों की पहचान के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि फसलों में रोग जीवाणु, वायरस या फफूंद से हो सकते हैं. इसलिए पहले रोग की सही पहचान करें और फिर उसी के अनुसार उपचार करें.
छठे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र के उद्यान विशेषज्ञ डॉ. लोकेश यादव ने किसानों को आधुनिक खेती तकनीक अपनाने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि उद्यानिकी फसलों और विविध खेती से किसानों की आय बढ़ सकती है और मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है. उन्होंने उद्यानिकी से जुड़ी योजनाओं की जानकारी भी दी.
सातवें चरण में पौधारोपण की तैयारी समझाई
सातवें चरण में उद्यान विभाग के डॉ. प्रदीप मौर्य ने पौधारोपण की सही प्रक्रिया के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि इसकी तैयारी मई और जून में कर लेनी चाहिए. गड्ढे खोदकर उसमें गोबर की खाद और मिट्टी भर देनी चाहिए. बारिश का मौसम शुरू होते ही पौधारोपण करने से पौधों के जीवित रहने की संभावना बढ़ जाती है.
आठवें चरण में जादूगर सलमान ने गांव की महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के फायदे बताए. उन्होंने कहा कि समूह के माध्यम से महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हो सकती हैं और सामूहिक गतिविधियां शुरू कर सकती हैं.
नौवें चरण में हुआ लकी ड्रॉ
कार्यक्रम के अंतिम यानी नौवें चरण में लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया. इसमें पांच-पांच सौ रुपये के 10 इनाम निकाले गए. खास बात यह रही कि पहला और दूसरा इनाम भी महिलाओं को मिला. पहला पुरस्कार लीना को मिला जबकि दूसरा पुरस्कार सुनीता ने जीता.