PHOTOS: फर्रुखाबाद में किसान कारवां, किसानों को मिली आलू और मक्का से आय बढ़ाने की सीख

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PHOTOS: फर्रुखाबाद में किसान कारवां, किसानों को मिली आलू और मक्का से आय बढ़ाने की सीख

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फर्रुखाबाद जिला बहुत समय से आलू उगाने के लिए प्रसिद्ध है. यहां की मिट्टी बहुत उपजाऊ है और किसान मेहनती हैं. किसान अच्छी फसल उगाने के लिए हमेशा नई तकनीक सीखते रहते हैं. इसी लिए सरकार और इंडिया टुडे ने मिलकर किसान कारवां बनाया, जो किसानों को नई खेती के तरीके और जानकारी देने के लिए आता है.
 

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इस बार किसान कारवां मोहम्मदाबाद ब्लॉक के पुठरी गांव में आया. आसपास के कई गांवों से किसान आए. उन्होंने विशेषज्ञों से सीधे बात की और अपने खेतों की समस्याओं के बारे में सलाह ली. यह कारवां किसानों को नए तरीके सीखने और खेती सुधारने का मौका देता है.
 

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कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के वैज्ञानिक और कृषि विभाग के अधिकारी शामिल हुए. उन्होंने किसानों को बताया कि आलू की अच्छी किस्म कैसे चुनें, बीज कैसे सही ढंग से लगाएं, मिट्टी की जांच कैसे करें, खाद और उर्वरक का संतुलित इस्तेमाल कैसे करें, और रोग व कीट से बचाव कैसे करें. इस तरह किसानों को सही और आसान तरीके से उन्नत खेती करना सिखाया गया.

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डॉ. अभिमन्यू यादव ने किसानों से कहा कि मिट्टी की सुरक्षा बहुत जरूरी है. अगर मिट्टी कमजोर हो जाएगी तो फसल भी अच्छी नहीं होगी. उन्होंने बताया कि ग्रीन कंपोस्ट डालने से मिट्टी मजबूत होती है, पौष्टिक रहती है और फसल अच्छी होती है. इससे किसान लंबे समय तक अच्छी फसल उगा सकते हैं.
 

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गुंजा जैन ने बताया कि आधुनिक समय में खेती में विज्ञान जोड़ना जरूरी है. ड्रिप इरिगेशन (पानी धीरे-धीरे देने की तकनीक) और फसल सुरक्षा चक्र अपनाने से मिट्टी और हवा की सुरक्षा होती है. उन्होंने किसानों से कहा कि बिना जानकारी के कीटनाशक और रासायनिक खाद न खरीदें, ताकि कोई ठगी न हो और फसल सुरक्षित रहे.
 

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फर्रुखाबाद में सबसे ज्यादा आलू उगता है, लेकिन किसान केवल आलू पर निर्भर होने से सही दाम नहीं पाते. डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि रूस के साथ हुए करार में कुफरी सूर्या आलू के 20 लाख टन ऑर्डर से किसानों को फायदा मिलेगा. साथ ही मक्का की खेती भी अच्छा विकल्प है, क्योंकि देश में मक्का की मांग ज्यादा है और किसान इससे भी अच्छी कमाई कर सकते हैं.

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प्रगतिशील किसान सुधांशु गंगवार ने बताया कि वे पहले रासायनिक खेती करते थे, लेकिन नुकसान देखने के बाद पिछले 15 साल से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं. इससे उनकी आय लगभग दोगुनी हो गई है. पशुपालन में डॉ. महेंद्र ने कहा कि मिनरल देने से पशु स्वस्थ रहते हैं, दूध ज्यादा देते हैं और स्वस्थ गर्भधारण होता है.
 

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कार्यक्रम के अंतिम चरण में लकी ड्रा रखा गया. इसमें पांच किसानों को ₹500, दूसरे को ₹2000 और पहले को ₹3000 का पुरस्कार मिला.
किसानों ने कहा कि किसान कारवां से उन्हें विशेषज्ञों से सीधे जानकारी मिलती है. इससे खेती आसान और लाभकारी बन गई है. यह कार्यक्रम किसानों को आधुनिक और समृद्ध खेती की दिशा में मदद करता है.

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