
पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के तेहट्टा इलाके से कथित तौर पर जबरन बांग्लादेश ले जाए गए दो भारतीय किसानों की मंगलवार को घर वापसी हो गई. दोनों किसानों सचिन दास और नरत्तम विश्वास को भारत-बांग्लादेश सीमा पर हुई फ्लैग मीटिंग के बाद सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ को सौंप दिया गया. जिला प्रशासन के एक अधिकारी के मुताबिक, सचिन दास और नरत्तम विश्वास सीमा के भारतीय हिस्से में खेत में काम कर रहे थे. इसी दौरान कुछ बांग्लादेशी नागरिक कथित तौर पर दोनों को जबरन अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कराकर ले गए और बाद में उन्हें बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश यानी बीजीबी के हवाले कर दिया.
बताया गया कि यह घटना एक बांग्लादेशी नागरिक के भारतीय क्षेत्र में अवैध रूप से प्रवेश करने के बाद बीएसएफ द्वारा हिरासत में लिए जाने से जुड़ी थी. आरोप है कि बांग्लादेशी नागरिकों ने हिरासत में लिए गए व्यक्ति की रिहाई के लिए दबाव बनाने के मकसद से दोनों भारतीय किसानों को सीमा पार ले जाकर बीजीबी को सौंप दिया.
मामले के सामने आने के बाद भारत और बांग्लादेश की सीमा सुरक्षा एजेंसियों के बीच फ्लैग मीटिंग हुई. बातचीत के बाद हिरासत में लिए गए बांग्लादेशी नागरिक को बीजीबी को सौंपने और दोनों भारतीय किसानों को बीएसएफ के हवाले करने पर सहमति बनी. इसके बाद सचिन दास और नरत्तम विश्वास मंगलवार दोपहर अपने घर पहुंच गए.
घर लौटने के बाद सचिन दास ने बताया कि बीजीबी की हिरासत में उनके साथ शारीरिक मारपीट नहीं की गई. उन्होंने कहा कि जब वे बीजीबी के कब्जे में थे, तब करीब एक हजार भारतीय लोग तेहट्टा सीमा पर जुटे थे. वहीं, करीब 300 बांग्लादेशी नागरिक भी उन्हें देखने पहुंचे थे.
किसान सचिन दास ने कहा कि वहां मौजूद बांग्लादेशी नागरिकों ने उन्हें खाना, चाय, बिस्कुट और बीड़ी दी. उन्होंने कहा कि उनके साथ किसी तरह की शारीरिक प्रताड़ना नहीं की गई.
नरत्तम विश्वास ने कहा कि उन्हें भारतीय सीमा के भीतर से जबरन उठाकर ले जाया गया था. उन्होंने बताया कि वह कृषि मजदूर के तौर पर काम करते हैं और उनके पास अपनी कोई जमीन नहीं है. जिस जगह वह काम कर रहे थे, वहीं से उन्हें जबरन सीमा पार ले जाया गया और बीजीबी को सौंप दिया गया.
जानकारी के अनुसार, सचिन दास का खेत अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक है. वहीं नरत्तम विश्वास उसी इलाके में कृषि मजदूर के तौर पर काम करते हैं. दोनों के अचानक लापता होने के बाद उनके परिवारों में चिंता का माहौल था. बीएसएफ और बीजीबी के हस्तक्षेप के बाद दोनों भारतीय किसानों की सुरक्षित वापसी हो गई. (पीटीआई)