छत्तीसगढ़ के सुकमा में इस वक्त बाढ़ का कहर बना हुआ है. इस बाढ़ से अब किसानों की हजारों एकड़ की धान और केले की फसल बरबाद हो रही है. अब तक के सर्वे में सामने आया है कि जिले भर में 2500 एकड़ की फसल बरबाद हो चुकी है. विडंबना ये है कि सुकमा किसानों को अभी तक पिछले साल की बरबाद हुई फसल का मुआवजा तक नहीं मिल पाया है. बताया जा रहा है कि जिला मुख्यालय में ही कुल 46 एकड़ तालाब के मछली पालन में लगभग 30 से 40 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान है.
सुकमा जिले में आई बाढ़ ने किसानों की सारी उम्मीदें डुबोकर रख दी हैं. जैसे-जैसे बाढ़ का पानी उतरता गया. सुकमा जिले के किसानों की मुसीबतें और भी बढ़ती गईं. पानी घटा तो तबाही का मंजर सामने आने लगा है. बाढ़ में हजारों एकड़ में लगी फसल लगभग बर्बाद हो चुकी है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ से सुकमा जिले में किसानों की फसलों का सर्वे जारी है और अभी तक करीब 2500 एकड़ धान की फसल बर्बाद हुई है. बताया जा रहा है कि जिले में सबसे ज्यादा नुकसान धान और केले की फसल को ही हुआ है. सुकमा में हुए नुकसान का पूरा आंकड़ा अभी नहीं आया है. हालांकि विभागीय आंकड़े जमा किए जा रहे हैं.
इसको लेकर सुकमा के कलेक्टर देवेश धरु ने बताया कि अभी सर्वे किया जा रहा है. इसके बाद रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजा जाएगा. जबकि इस साल मानसून का साथ मिलने से धान की अच्छी पैदावार का अनुमान लगाया गया था. सुकमा के किसान इस बार अच्छी पैदावार की आस लगाए बैठे थे, लेकिन बाढ़ ने किसानों की कमर तोड़ दी है. बाढ़ से आए पानी ने खेतों में रेत और मलबा छोड़ दिया है. वहीं अभी भी बहुत से किसानों के खेतों में पानी भरा हुआ है. अब इतना समय नहीं है कि फिर से रोपा लगाया जा सके. किसानों ने बताया कि कई किसान भूमि लीज पर लेकर खेती करते हैं. इस बार बाढ़ के चलते उन्हें ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है.
धान के अलावा जिले में हुई अति वर्षा से केले की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है. सुकमा के किसान अधिकांश भूसावाली और खरपुरा प्रजाति के केले की खेती करते हैं. लगातार हुई बारिश ने केले की फसल को बर्बाद कर दिया है. किसानों ने बताया कि भारी बारिश और बाढ़ की वजह से केले की फसल अनजान बीमारी की चपेट में आ जाती है. इसमें केले समय से पहले ही जमीन पर गिरने लगता है. किसानों का कहना है कि बाढ़ की वजह से उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है.
सुकमा जिले में बाढ़ से मछली पालन कर रहे किसानों को भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है. जिला मुख्यालय में ही 46 एकड़ के तालाबों में मछली पालन में लगभग 30 से 40 लाख रुपये के नुकसान होने का अनुमान है. बाढ़ का पानी तालाब के ऊपर से बहने से मछलियां भी बाढ़ के पानी के साथ बह गईं, जिससे किसानों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है. किसान सीताराम राजू ने बताया कि मछली पालन का कोई बीमा भी नहीं होता. उन्होंने कहा कि पिछले साल अगस्त में आई बाढ़ से उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ थे. हालांकि 9 महीने बाद 8 हजार रुपये प्रति हेक्टर के हिसाब से उन्हें सिर्फ 40 हजार रुपये का मुआवजा शासन की तरफ से मिला था, लेकिन ये मुआवजा नुकसान से बहुत कम है. इस नुकसान से वे उबर भी नहीं पाये थे कि इस साल भी बाढ़ से उन्हें फिर से बड़ा नुकसान हुआ है.
(रिपोर्ट- धर्मेन्द्र सिंह)
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