भारत पर्व में बिहार का ‘मखाना’ बनेगा देश की शान, लोकल से ग्लोबल तक पहुंचेगा ‘सफेद सोना’

भारत पर्व में बिहार का ‘मखाना’ बनेगा देश की शान, लोकल से ग्लोबल तक पहुंचेगा ‘सफेद सोना’

बिहार का मखाना अब सिर्फ “तालाब का उत्पाद” नहीं, बल्कि “भारत की वैश्विक पहचान” बनने की दिशा में आगे बढ़ चुका है. भारत पर्व 2026 में बिहार की झांकी इस संदेश को देश और दुनिया के सामने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करेगी.

‘मखाना’ बनेगा देश की शान‘मखाना’ बनेगा देश की शान
क‍िसान तक
  • Patna,
  • Jan 23, 2026,
  • Updated Jan 23, 2026, 4:29 PM IST

बिहार का मखाना अब देश की शान में शामिल होने जा रहा है.  दरअसल, 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित भारत पर्व के अंतर्गत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की चयनित झांकियों का प्रदर्शन लाल किला, नई दिल्ली में किया जाएगा. इस प्रतिष्ठित आयोजन में बिहार की झांकी को भी शामिल किया गया है, जो राज्य की सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक सामर्थ्य को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करेगी.

आम जनता को दिखाई जाएगी झांकी

भारत पर्व के माध्यम से देश की सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक विविधताओं को झांकियों, हस्तशिल्प, पारंपरिक खानपान और लोक परंपराओं के जरिए आम जनता के समक्ष प्रदर्शित किया जाएगा. यह आयोजन “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को साकार करेगा, जहां राज्यों की विशिष्ट पहचान, परंपरागत ज्ञान, आजीविका के साधन और आधुनिक विकास की यात्रा एक साथ दिखाई देगी.

लोकल से ग्लोबल की थाली में सुपरफूड

इस वर्ष भारत पर्व में बिहार की झांकी का विषय है “मखाना: लोकल से ग्लोबल की थाली में सुपरफूड”. बिहार का ‘सफेद सोना’ कहे जाने वाला मखाना आज मिथिलांचल के पोखरों से निकलकर दुनिया भर में सुपरफूड के रूप में पहचान बना चुका है. यह स्थानीय हुनर और पारंपरिक श्रम का वैश्विक चेहरा है.

मखाना जिसे फॉक्स नट या कमल बीज भी कहा जाता है. मिथिलांचल के तालाबों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक पहुंच चुका है. दुनिया में मखाना की कुल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा भारत करता है, जिसमें बिहार की हिस्सेदारी लगभग 85 से 90 प्रतिशत है. वर्ष 2022 में मिथिला मखाना को GI टैग प्राप्त हुआ, जिससे इसे वैश्विक बाज़ार में विशिष्ट पहचान मिली.

मिथिला का मखाना, देश की शान

झांकी की दृश्य संरचना में मखाना की पूरी यात्रा को दो भागों में दर्शाया गया है. पहले भाग में कमल के पत्तों के बीच उभरा हुआ सफेद “लावा मखाना”, उसके सामने GI टैग का प्रतीक, और किनारों पर पारंपरिक मिथिला पेंटिंग की बॉर्डर आकर्षण का केंद्र है.

दूसरे भाग में मखाना की कटाई, बीज संग्रह, ग्रेडिंग, भुनाई, फोड़ाई, पैकिंग और क्वालिटी जांच की पूरी प्रक्रिया को जीवंत रूप में दिखाया गया है. एक ओर मिट्टी के चूल्हे पर लोहे की कड़ाही में मखाना भूनती महिला और दूसरी ओर लकड़ी के मूसल से मखाना फोड़ता पुरुष, यह दृश्य पारंपरिक श्रम, महिला सहभागिता और स्थानीय कौशल को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है. वहीं, झांकी यह संदेश देती है कि मखाना केवल एक कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि विरासत, श्रम, महिला भागीदारी और उद्यमिता का संगम है, जो बिहार को सीधे वैश्विक बाजारों से जोड़ता है.

बिहार से विश्व तक: झांकी का संदेश

भारत पर्व में बिहार की यह झांकी केवल मखाना की कहानी नहीं कहती, बल्कि यह दर्शाती है कि पारंपरिक ज्ञान जब आधुनिक तकनीक और नीति समर्थन से जुड़ता है, तो स्थानीय आजीविकाएं वैश्विक पहचान प्राप्त करती हैं. किसान, महिला श्रमिक और छोटे उद्यमी विकास की मुख्यधारा में शामिल होते हैं.

मखाना बोर्ड की स्थापना, निर्यात में बढ़ोतरी, GI टैग की मान्यता और भारत पर्व में झांकी का प्रदर्शन, ये सभी मिलकर यह स्पष्ट संदेश देते हैं कि बिहार का मखाना अब सिर्फ “तालाब का उत्पाद” नहीं, बल्कि “भारत की वैश्विक पहचान” बनने की दिशा में आगे बढ़ चुका है. भारत पर्व 2026 में बिहार की झांकी इस संदेश को देश और दुनिया के सामने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करेगी.

अब दुनिया की थाली में मखाना

केंद्रीय बजट 2025–26 में बिहार के मखाना किसानों के लिए एक ऐतिहासिक पहल की गई है. केंद्र सरकार ने बिहार में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की स्थापना की घोषणा की है, जिसके लिए लगभग 475 करोड़ रुपये के विकास पैकेज को मंजूरी दी गई है. इसका उद्देश्य मखाना के उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्द्धन और खरीद को सशक्त बनाते हुए किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना है. (रोहित सिंह की रिपोर्ट)

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