
बिहार के राजस्व और भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिंहा ने साफ कहा है कि बिहार सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है कि हर नागरिक को बिना किसी रुकावट के राजस्व सेवाएं और आर्थिक न्याय मिले. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे. अगर कहीं भी लापरवाही या काम में बाधा पाई जाती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
राज्य में चल रही राजस्व कर्मियों की हड़ताल को लेकर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है. प्रधान सचिव सी.के. अनिल ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर व्यवस्था को दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने बताया कि पिछले दो महीनों से राजस्व कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर हैं, जिसे पहले ही अवैध घोषित किया जा चुका है. इस वजह से जमीन से जुड़े काम जैसे दाखिल-खारिज, रसीद, और अन्य सेवाओं में देरी हो रही है, जिससे आम लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है.
सरकार का लक्ष्य है कि राज्य के लगभग 4.5 करोड़ जमाबंदीदारों को सरल, पारदर्शी और बिना रिश्वत के सेवाएं मिलें. इसके लिए अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे बिचौलियों और दलालों की भूमिका खत्म करें और सीधे जनता को सेवाएं उपलब्ध कराएं. साथ ही यह भी कहा गया है कि अगर कोई कर्मचारी हड़ताल के दौरान काम में बाधा डालता है या नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
प्रधान सचिव ने अपने पत्र में यह भी कहा कि राजस्व अधिकारी सिर्फ प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं निभाते, बल्कि वे सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने का भी महत्वपूर्ण माध्यम हैं. उन्होंने यह चिंता भी जताई कि डिजिटल सुविधाओं की कमी (डिजिटल डिवाइड) के कारण कई योजनाओं का लाभ अभी भी गांव और अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंच पा रहा है. इसलिए जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों को और सक्रिय होने की जरूरत है.
सरकार ने यह भी बताया कि ‘इज ऑफ लिविंग’ के तहत लोगों को बेहतर सेवाएं देने का लक्ष्य रखा गया है. इसके अलावा, राज्य में ‘समृद्धि यात्रा’ और ‘भूमि सुधार जन कल्याण संवाद’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए सरकार सीधे जनता से जुड़कर उनकी समस्याएं सुन रही है और समाधान करने की कोशिश कर रही है.