
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में 25 साल पुराने किसान हत्याकांड मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. एडीजे-2 दशरथ मिश्रा की अदालत ने किसान राम बहादुर राय की हत्या के मामले में 12 लोगों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. इसके साथ ही अदालत ने सभी दोषियों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. वहीं, एक आरोपी को पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के कारण बरी कर दिया गया.
इस फैसले के बाद मृतक किसान के परिवार ने राहत की सांस ली है. परिवार का कहना है कि लंबे इंतजार के बाद आखिरकार उन्हें न्याय मिला है.
यह पूरा मामला साल 2000 का है. मुजफ्फरपुर जिले के हथौड़ी थाना क्षेत्र के झाऊआ गांव में किसान राम बहादुर राय की हत्या कर दी गई थी. बताया गया कि खेत की मेड़ और जमीन के विवाद को लेकर यह घटना हुई थी.
आरोप है कि विवाद के दौरान राम बहादुर राय पर भाले से हमला किया गया, जिससे उनकी मौत हो गई. इस घटना में तीन अन्य लोग भी गंभीर रूप से घायल हुए थे. हत्या के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और कुल 17 लोगों को आरोपी बनाया गया था.
इस मामले की सुनवाई लंबे समय तक चली. सुनवाई के दौरान चार आरोपियों की मौत हो गई. इसके बाद बचे हुए 13 आरोपियों में से 12 लोगों को अदालत ने दोषी पाया और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई.
दोषी पाए गए लोगों में लोभित राय, सिकंदर राय, मुनींद्र राय, नरेश राय, रामनाथ राय, अमृत राय, विनोद राय, मोहित राय, भूपेंद्र प्रसाद यादव, मनोज राय और देव नारायण राय समेत कुल 12 लोग शामिल हैं.
मृतक किसान राम बहादुर राय के बेटे मनोज कुमार ने अदालत के फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने बताया कि घटना के समय उनकी उम्र केवल 17 साल थी और उन्होंने अपने पिता की हत्या अपनी आंखों के सामने देखी थी.
मनोज कुमार ने कहा कि 25 साल तक उन्होंने न्याय का इंतजार किया. अब अदालत के फैसले से उन्हें संतोष मिला है. उन्होंने उम्मीद जताई कि इस फैसले से समाज में गलत काम करने वालों को कड़ा संदेश मिलेगा.
मामले के अपर लोक अभियोजक (APP) ब्रज मोहन सिंह ने बताया कि साल 2000 में खेत की मेड़ और जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद हुआ था. इस मामले में अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने कई महत्वपूर्ण सबूत पेश किए.
उन्होंने कहा कि इन्हीं सबूतों के आधार पर अदालत ने 12 आरोपियों को दोषी माना और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई.
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि जमीन और खेत की मेड़ से जुड़े विवाद कई बार गंभीर रूप ले सकते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में बातचीत और कानूनी रास्ते से समाधान निकालना जरूरी है, ताकि किसी भी तरह की हिंसा को रोका जा सके. मुजफ्फरपुर के इस मामले में 25 साल बाद आए फैसले को पीड़ित परिवार के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है.
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