मिट्टी बचाने की मुहिम तेज, सरकार ने किसानों से की संतुलित उर्वरक इस्तेमाल करने की अपील

मिट्टी बचाने की मुहिम तेज, सरकार ने किसानों से की संतुलित उर्वरक इस्तेमाल करने की अपील

केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने रासायनिक उर्वरकों के अधिक इस्तेमाल को कम करने पर जोर दिया. उन्होंने किसानों से ‘खेत बचाओ अभियान’ से जुड़ने और प्राकृतिक खेती को अपनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि पशुपालन और मछली पालन जैसी गतिविधियां किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं.

डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंहडेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह
क‍िसान तक
  • Patna,
  • Jun 21, 2026,
  • Updated Jun 21, 2026, 11:03 AM IST

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 23वीं किस्त जारी करने का कार्यक्रम 20 जून 2026 को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री ने किसानों को संबोधित करते हुए संतुलित उर्वरक उपयोग और मिट्टी के स्वास्थ्य प्रबंधन अपनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि रासायनिक प्रदूषण से धरती को बचाने के लिए किसानों को प्राकृतिक खेती और पर्यावरण अनुकूल कृषि तकनीकों की ओर बढ़ना होगा.

459 किसानों की मौजूदगी में कृषि नवाचारों की प्रदर्शनी

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) मौजूद रहे. वहीं, कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के सहायक महानिदेशक डॉ. आर. के. सिंह भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे. इस मौके पर 125 महिला किसानों समेत 459 से अधिक किसानों और अन्य प्रतिभागियों ने भाग लिया.

कार्यक्रम की शुरुआत मंत्रियों द्वारा संस्थान परिसर में पौधरोपण के साथ हुई. इसके बाद उन्होंने ढैंचा आधारित हरित खाद, प्राकृतिक खेती, एकीकृत कृषि प्रणाली मॉडल और मत्स्य और पशुधन इकाइयों का निरीक्षण किया. किसानों ने भी इन प्रदर्शन स्थलों का दौरा किया और नई कृषि तकनीकों की जानकारी ली.

सरकार का संतुलित उर्वरक उपयोग पर जोर

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने रासायनिक उर्वरकों के अधिक इस्तेमाल को कम करने पर जोर दिया. उन्होंने किसानों से ‘खेत बचाओ अभियान’ से जुड़ने और प्राकृतिक खेती को अपनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि पशुपालन और मछली पालन जैसी गतिविधियां किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं. साथ ही उन्होंने पशुओं के समय पर टीकाकरण और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल की जरूरत बताई.

आधुनिक तकनीकों को अपनाने की अपील

कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने किसानों से कृषि में नए प्रयोग और उन्नत तकनीकों को अपनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग से मिट्टी की क्वालिटी बेहतर होगी और किसानों की उत्पादन क्षमता और आय में वृद्धि होगी. उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे अपनी जमीन के छोटे हिस्से से प्राकृतिक खेती की शुरुआत करें. डॉ. आर. के. सिंह ने ‘खेत बचाओ अभियान’ की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि देशभर में अब तक करीब 85 हजार अभियानों के माध्यम से 75 लाख से अधिक किसानों और हितधारकों को संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूक किया जा चुका है.

सरकार का ‘खेत बचाओ अभियान’ पर जोर

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के निदेशक डॉ. अनुप दास ने बताया कि संस्थान द्वारा 1 अप्रैल से 30 मई 2026 तक संतुलित उर्वरक उपयोग अभियान चलाया गया. इसके बाद 1 जून 2026 से ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों को एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, धान की सीधी बुआई, सूखा सहनशील धान की किस्मों और समेकित कृषि प्रणाली जैसी तकनीकों की जानकारी दी जा रही है.

कार्यक्रम के दौरान संस्थान द्वारा विकसित सेम की नई किस्म ‘स्वर्ण विशिष्ट’ का भी विमोचन किया गया. यह किस्म अधिक उत्पादन देने वाली और जल्दी तैयार होने वाली बताई गई है. इसके अलावा प्राकृतिक खेती, जैव उर्वरक, हरित खाद और जल संरक्षण तकनीकों पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई गई.

कार्यक्रम में किसानों को दिए गए धान के बीज

कार्यक्रम में किसानों को सूखा सहनशील धान की किस्मों और उन्नत ग्रीष्मकालीन सब्जियों के बीज भी वितरित किए गए. विशेषज्ञों ने किसानों को प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण, हरित खाद और संतुलित उर्वरक उपयोग के फायदे बताएं. कार्यक्रम के अंत में किसानों से अपील की गई कि वे टिकाऊ और जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाएं, ताकि मिट्टी का स्वास्थ्य सुरक्षित रहे, उत्पादन बढ़े और किसानों की आय में सुधार हो सके. 

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