
कर्नाटक में इस बार कमजोर मॉनसून और कम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. राज्य में बारिश सामान्य से काफी कम होने के कारण कई इलाकों में सूखे जैसे हालात बन गए हैं. इसे देखते हुए मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 20 जुलाई को कैबिनेट की आपातकालीन बैठक बुलाई है. इस बैठक में सूखे की स्थिति, किसानों की समस्याओं और राहत के उपायों पर चर्चा की जाएगी. इसके अलावा सभी जिलों के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर जमीनी हालात की भी समीक्षा की जाएगी.
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने बताया कि इस बार राज्य में सामान्य से करीब 30 प्रतिशत कम बारिश हुई है. मॉनसून की देरी और कम वर्षा का सीधा असर खरीफ फसलों, सिंचाई और पीने के पानी पर पड़ रहा है. कई इलाकों में किसानों की बुवाई प्रभावित हुई है, जबकि कुछ स्थानों से सूखे के कारण लोगों के पलायन की भी जानकारी मिली है. उन्होंने कहा कि सरकार के पास सभी जिलों के बारिश के आंकड़े और जमीनी स्थिति की पूरी जानकारी है. इन्हीं तथ्यों के आधार पर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी.
सरकार ने फिलहाल राज्य के सभी प्रमुख जलाशयों में मौजूद पानी को केवल पीने के लिए सुरक्षित रखने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंचाई के लिए पानी तभी छोड़ा जाएगा, जब बांधों में पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा. उन्होंने किसानों से अपील की कि वे इस उम्मीद में बुवाई न करें कि सरकार बाद में सिंचाई के लिए पानी छोड़ देगी. मौजूदा हालात को देखते हुए किसानों को कम पानी वाली फसलों पर ध्यान देना चाहिए और पानी का सोच-समझकर इस्तेमाल करना चाहिए.
मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य में सूखे की स्थिति का आकलन करने के लिए केंद्र की एक टीम भेजने का अनुरोध किया है. साथ ही केंद्र से आर्थिक सहायता देने की भी मांग की है. उन्होंने कहा कि फिलहाल केंद्र की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है, लेकिन राज्य सरकार जल्द ही विस्तृत रिपोर्ट और बारिश से जुड़े सभी आंकड़े केंद्र सरकार को भेजेगी, ताकि जल्द सहायता मिल सके.
डी.के. शिवकुमार ने कहा कि कावेरी नदी के पानी को लेकर पड़ोसी राज्य तमिलनाडु का दबाव बना हुआ है. हालांकि उन्होंने साफ किया कि कर्नाटक अपने किसानों और लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए ही कोई फैसला करेगा. उन्होंने कहा कि खेती के लिए पानी तभी छोड़ा जाएगा, जब जलाशयों में पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा. उन्होंने यह भी कहा कि अगर संसद में कावेरी जल विवाद का मुद्दा उठता है, तो कर्नाटक के सांसद भी राज्य का पक्ष मजबूती से रखेंगे.
मुख्यमंत्री ने बेंगलुरु के पास प्रस्तावित 'ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप' परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रही बीजेपी और जेडी(एस) की पदयात्राओं पर भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक कारणों से किया जा रहा है और सरकार किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई करेगी. कर्नाटक सरकार का कहना है कि फिलहाल उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता सूखे से निपटना, किसानों को राहत देना और राज्य में पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना है. (PTI)