
पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जालंधर ग्रामीण पुलिस ने जिलेभर में विशेष अभियान चलाया है. इसके तहत पराली जलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है. वहीं, किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में बताकर इसके सही प्रबंधन के लिए जागरूक भी किया जा रहा है. इस अभियान की निगरानी खुद जालंधर ग्रामीण के एसएसपी हरविंदर सिंह विर्क कर रहे हैं.
एसएसपी हरविंदर सिंह विर्क इस अभियान पर व्यक्तिगत रूप से नजर रख रहे हैं. वह खुद गांवों में जाकर किसानों से बातचीत कर रहे हैं और उन्हें पराली न जलाने की अपील कर रहे हैं. उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पराली जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के साथ-साथ किसानों को जागरूक करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाए.
जालंधर ग्रामीण पुलिस के मुताबिक, पराली जलाने की घटनाओं को लेकर अब तक 16 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं. इसके अलावा जिले के सभी सब-डिवीजनों में डीएसपी की निगरानी में थाना प्रभारी गांवों में किसानों के साथ बैठकें कर रहे हैं. इन बैठकों में किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान और फसल अवशेषों के सही प्रबंधन के तरीकों की जानकारी दी जा रही है.
पुलिस किसानों को बता रही है कि पराली जलाने से निकलने वाला धुआं हवा को प्रदूषित करता है. इससे सांस संबंधी बीमारियां, अस्थमा और आंखों में जलन की समस्या हो सकती है. इसके अलावा दिल और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ता है. धुएं के कारण सड़कों पर दिखाई देना कम हो जाता है, जिससे सड़क हादसों की आशंका बढ़ जाती है. पराली जलाने से खेतों की मिट्टी को भी नुकसान पहुंचता है. आग लगाने से मिट्टी में मौजूद फायदेमंद सूक्ष्म जीव प्रभावित होते हैं और जमीन की उपजाऊ शक्ति कम हो सकती है. इसका असर खेती और पर्यावरण दोनों पर पड़ता है.
जालंधर ग्रामीण पुलिस ने किसानों से अपील की है कि वे पराली को आग न लगाएं. इसके बजाय सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई कृषि मशीनों और दूसरे वैज्ञानिक तरीकों से फसल अवशेषों का प्रबंधन करें. पुलिस का कहना है कि पर्यावरण की सुरक्षा सभी की साझा जिम्मेदारी है और इस अभियान को सफल बनाने के लिए किसानों सहित हर नागरिक का सहयोग जरूरी है. (दविंदर कुमार की रिपोर्ट)