
महाराष्ट्र के विदर्भ में किसानों की आत्महत्या का मुद्दा लंबे समय से गंभीर चिंता का विषय रहा है. अब सरकारी विभागों से करोड़ों रुपये का भुगतान नहीं मिलने के कारण निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदार भी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं. इसकी एक दर्दनाक तस्वीर अमरावती जिले के जरूड गांव में सामने आई, जहां 52 वर्षीय सड़क निर्माण ठेकेदार सुनील वागदरे ने कथित तौर पर करीब ढाई करोड़ रुपये के बकाया भुगतान और आर्थिक परेशानियों के बीच 7 अक्टूबर को आत्महत्या कर ली.
इस घटना के बाद अब अमरावती में सरकारी भुगतान नहीं मिलने से परेशान ठेकेदारों का गुस्सा सड़क पर उतर आया है. दिवाली के ठीक पहले सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के कार्यालय के सामने ठेकेदारों ने महाराष्ट्र सरकार की प्रतीकात्मक तेरहवीं का आयोजन कर अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया. विधिवत पूजा-पाठ कर PWD कार्यालय के गेट पर सरकार की तेरहवीं की रस्म निभाई गई. इतना ही नहीं, महाराष्ट्र शासन के नाम से तेरहवीं की निमंत्रण पत्रिका भी छपवाई गई और आंदोलन के दौरान नकली नोटों की बारिश कर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की गई.
ठेकेदारों का आरोप है कि उन्होंने सरकार के विकास कार्यों के तहत सड़क और अन्य निर्माण कार्य पूरे किए, लेकिन काम पूरा होने के बावजूद उन्हें उनका भुगतान नहीं मिल रहा है. करोड़ों रुपये के बिल लंबे समय से लंबित हैं. ऐसे में दिवाली के त्योहार पर ठेकेदारों और उनसे जुड़े मजदूरों और परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. ठेकेदारों ने सरकार से तत्काल बकाया बिलों का भुगतान करने की मांग की है.
अमरावती के सार्वजनिक निर्माण विभाग कार्यालय के सामने हुए इस विरोध प्रदर्शन में ठेकेदारों ने सरकार के खिलाफ प्रतीकात्मक तेरहवीं का कार्यक्रम आयोजित किया. विधिवत पूजा की गई और महाराष्ट्र शासन के नाम से तेरहवीं की निमंत्रण पत्रिका छापकर सरकारी व्यवस्था के प्रति अपना आक्रोश जाहिर किया.
आंदोलन के दौरान नकली नोटों की उधड़ाई कर ठेकेदारों ने यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकार के विकास कार्यों में करोड़ों रुपये खर्च होने के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन काम करने वाले ठेकेदारों को उनका मेहनताना तक नहीं मिल रहा है.
ठेकेदारों का कहना है कि सरकारी काम पूरा करने के बाद भी भुगतान के लिए उन्हें विभागों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. बकाया राशि नहीं मिलने से उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है. बैंकों के कर्ज, ब्याज, कर्मचारियों और मजदूरों का भुगतान और अन्य व्यावसायिक जिम्मेदारियां निभाना मुश्किल हो गया है.
इस पूरे मामले में सबसे दर्दनाक उदाहरण जरूड गांव के ठेकेदार सुनील वागदरे की आत्महत्या है. 52 वर्षीय सुनील वागदरे ने 7 अक्टूबर को अपने खेत में आम के पेड़ से फांसी लगाकर जान दे दी थी. परिवार के मुताबिक, PWD से उनके करीब ढाई करोड़ रुपये के बिलों का भुगतान लंबित था. उन पर बैंक का कर्ज भी था और भुगतान नहीं मिलने के कारण वह परेशान रहते थे.
सुनील अपने पीछे पत्नी वर्षा, छोटा बेटा चिराग, बड़ी बेटी स्नेहा और परिवार के अन्य सदस्यों को छोड़ गए हैं. आज तक की टीम जब उनके घर पहुंची तो परिवार उनकी तस्वीर के सामने दीपक और अगरबत्ती जलाकर उन्हें याद कर रहा था. घर में दिवाली की खुशियों की जगह मातम पसरा हुआ है.
परिवार के सदस्यों ने बताया कि यदि उनके पिता को समय पर उनके काम का बकाया पैसा मिल गया होता तो आज वह उनके साथ दिवाली मना रहे होते. बेटी ने भावुक होकर कहा कि इस दिवाली ने उनके घर के कमाने वाले दीपक को बुझा दिया. उनकी इच्छा है कि जो उनके परिवार के साथ हुआ, वह किसी दूसरे परिवार के साथ न हो.
सुनील वागदरे के बचपन के दोस्त और परिवार के करीबी सदस्य सोपान ढोले ने बताया कि सुनील लंबे समय से PWD विभाग से अपने काम के पैसे मांग रहे थे. सड़क निर्माण का काम पूरा करने के बावजूद भुगतान नहीं हो रहा था. इस वजह से वह आर्थिक तनाव में थे.
सोपान ढोले ने भावुक होकर कहा कि सुनील अपनी परेशानी कभी चेहरे पर जाहिर नहीं होने देते थे. वह उनसे हर बात साझा करते थे, लेकिन उनके ऊपर इतना दबाव था, इसका अंदाजा नहीं था. आज उन्हें इस बात का बेहद अफसोस है कि वह अपने दोस्त को इस संकट से बाहर नहीं निकाल सके.
उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि घोषणाएं और दावे तो बहुत किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर ठेकेदारों को उनका पैसा नहीं मिल रहा. इस घटना ने पूरे परिवार और उनके करीबियों को तोड़ दिया है.
अमरावती में सरकार की प्रतीकात्मक तेरहवीं और सुनील वागदरे की आत्महत्या, दोनों घटनाएं एक ही सवाल खड़ा कर रही हैं. जब सरकारी निर्माण कार्य पूरे हो चुके हैं तो ठेकेदारों के करोड़ों रुपये के बिल आखिर क्यों अटके हैं?
दिवाली जैसे बड़े त्योहार के समय जब हर परिवार खुशियां मनाने की तैयारी करता है, तब सरकारी भुगतान के इंतजार में ठेकेदार कर्ज और आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं. ठेकेदारों की मांग है कि सरकार तत्काल लंबित बिलों का भुगतान करे और ऐसी व्यवस्था बनाए जिससे भविष्य में किसी अन्य ठेकेदार को आर्थिक संकट के कारण इस तरह की नौबत का सामना न करना पड़े.