
आज देशभर में दीपों का त्योहार दिवाली मनाई जा रही है. घरों में दीप जलाने, रंगोली सजाने और मां लक्ष्मी के स्वागत की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. हिंदू धर्म में दिवाली का विशेष महत्व है. इस दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली की शाम प्रदोष काल में विधि-विधान से लक्ष्मी-गणेश पूजन करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है. इस बार दिवाली 8 नवंबर 2026, रविवार को मनाई जा रही है. ऐसे में अगर आप भी आज लक्ष्मी-गणेश की पूजा करने जा रहे हैं, तो आइए जानते हैं पूजा का शुभ मुहूर्त, प्रदोष काल का समय और अमावस्या तिथि कब तक रहेगी.
दिवाली के दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है. इस साल 8 नवंबर को लक्ष्मी-गणेश पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 54 मिनट से रात 7 बजकर 50 मिनट तक रहेगा. इस दौरान भक्त विधि-विधान से भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा कर सकते हैं. पूजा की कुल अवधि 1 घंटा 56 मिनट रहेगी. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में वृषभ लग्न का संयोग लक्ष्मी पूजन के लिए विशेष महत्व रखता है. इसे स्थिर लग्न माना जाता है. मान्यता है कि इस दौरान मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में धन-धान्य और सुख-समृद्धि का वास होता है.
सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर सभी देवी देवताओं की पूजा करें. शाम के समय लक्ष्मी पूजन के दौरान सबसे पहले शुद्धिकरण कर लें. सबसे पहले अपने ऊपर जल छिड़ककर शुद्धिकरण कर लें. इसके बाद सभी सामग्री पर भी जल छिड़क लें. इसके बाद हथेली में तीन बार जल लेकर उसे पी लें और चौथी बार हाथ धो लें. चौकी पर स्वास्तिक का चिह्न बनाकर लाल कपड़ा बिछा लें और भगवान गणेश, माता लक्ष्मी कुबेर भगवान और मां सरस्वती की नई मूर्तियों को स्थापित करें. इसके बाद दीप को जला लें. इसके बाद सबसे पहले संकल्प लें.
इसके बाद भगवान गणेश का ध्यान कर लें. इसके बाद माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और मां सरस्वती का स्मरण करें. इसके बाद कलश का ध्यान करें. अब मूर्तियों के सामने एक जल से भरा हुआ कलश रखना चाहिए. अब फल, फूल, मिठाई, दूर्वा, चंदन, घी, मेवे, खील, बताशे, चौकी, कलश, फूलों की माला आदि सामग्रियों का प्रयोग करते हुए पूरे विधि-विधान से लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा करनी चाहिए. इनके साथ- साथ देवी सरस्वती, भगवान विष्णु, मां काली और कुबेर की भी विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए. पूजा करते समय 11 छोटे दीप और एक बड़ा दीप जलाना चाहिए.
दिवाली पूजा के लिए रोली, चावल, पान-सुपारी, लौंग, इलायची, धूप, कपूर, घी या तेल से भरे हुए दीपक, कलावा, नारियल, गंगाजल, फल, फूल, मिठाई, दूर्वा, चंदन, घी, मेवे, खील, बताशे, चौकी, कलश, फूलों की माला, शंख, लक्ष्मी-गणेश, मां सरस्वती और भगवान कुबेर की मूर्ति, थाली, चांदी का सिक्का, 11 दीपक, मां लक्ष्मी के वस्त्र, मां लक्ष्मी के श्रृंगार का सामान.
महालक्ष्मी के महामंत्र ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद् श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मयै नम: का कमलगट्टे की माला से कम से कम 108 बार बार जाप करेंगे तो आपके ऊपर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहेगी.
"ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः ॥”
- "ॐ गं गणपतये नमः ॥"