सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि जब तक अर्थव्यवस्था आम आदमी के दरवाजे तक नहीं पहुंचेगी, तब तक मजबूती संभव नहीं है. किसानों को समृद्ध बनाने के लिए सबसे पहले प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पैक्स) को मजबूत करना होगा. इसी दिशा में प्रदेश में पैक्स को भंडारण विकास और विनियामक प्राधिकरण (WDRA) से जोड़ने (सदस्य बनाने) की जरूरत है. इससे किसानों को अपने निकटतम वेयरहाउस में फसल सुरक्षित रखने की सुविधा मिलेगी और उन्हें दूरदराज के इलाकों में भटकना नहीं पड़ेगा.
मंत्री सारंग ने शुक्रवार को अपेक्स बैंक समन्वय भवन में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित किया. उन्होंने जिला बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों से कहा कि वे मध्यप्रदेश की प्रत्येक पैक्स को WDRA का सदस्य बनाने का काम तुरंत शुरू करें. उन्होंने कहा कि जब तक भंडारण की व्यवस्थित व्यवस्था नहीं होगी, तब तक किसान अपने उत्पाद का पूरा लाभ नहीं उठा पाएंगे.
कार्यशाला में सारंग ने अपेक्स बैंक द्वारा प्रकाशित मानक परिचालन प्रक्रिया (SOP) वेयरहाउसिंग डेवलपमेंट एंड रेग्यूलेटरी अथॉरिटी की योजनांतर्गत वेयरहाउस पंजीकरण की पुस्तक का विमोचन भी किया. साथ ही प्रदेश में गोदाम निर्माण की योजना पर काम करने के लिए स्टेट वेयरहाउसिंग प्रबंध संचालक अनुराग वर्मा, मप्र राज्य सहकारी संघ के प्रबंध संचालक ऋतुराज रंजन और सहकारिता विभाग के संयुक्त आयुक्त महेन्द्र दीक्षित को अधिकृत किया.
आयुक्त सहकारिता और पंजीयक मनोज पुष्प ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के दौरान किसानों को प्रशिक्षित किया जाएगा कि वे अपने उत्पाद को बेहतर ढंग से कैसे रख सकते हैं और उसे डिजिटल माध्यम से किस तरह बेच सकते हैं. इस तरह की कार्यशालाएं आगे संभाग और जिला स्तर पर भी आयोजित की जाएंगी.
कार्यशाला में WDRA सदस्य अरुण कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि वर्ष 2051 तक देश की जनसंख्या 170 करोड़ और मध्यप्रदेश की 12 करोड़ होने का अनुमान है. प्रदेश का खाद्यान्न उत्पादन वर्तमान में 338 लाख मीट्रिक टन है, जो भारत के कुल उत्पादन का 12.10 प्रतिशत है. भविष्य को देखते हुए प्रदेश में वेयरहाउस निर्माण की एक सुनियोजित योजना बनाना जरूरी है.
सीडब्ल्यूसी क्षेत्रीय प्रबंधक रामकुमार ने कहा कि यदि देशभर में WDRA के अंतर्गत 50 हजार गोदाम पंजीकृत हो जाते हैं तो किसान सीधे वेयरहाउस तक पहुंच सकेंगे. इससे किसानों के उत्पाद सुरक्षित होंगे और किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी से बचाव होगा.
कार्यशाला में नेशनल ई-रिपोजिटरी लिमिटेड के विनीत गुप्ता, सीसीआरएल के एवीपी जसवीर गोदारा और संजय अग्रवाल ने डिजिटल व्यवसाय प्रणाली पर अपने विचार साझा किए. इस अवसर पर सहकारिता विभाग के अधिकारी, जिला बैंकों के सीईओ, वेयरहाउस व एफपीओ प्रतिनिधि और विभिन्न सहकारी संस्थाओं के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित थे.