हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. इस साल 7 सितंबर को जन्माष्टमी मनाई जाएगी. कहते हैं कि इसी दिन भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था. नन्हे कान्हा से लेकर द्वारकाधीश तक श्रीकृष्ण की महिमा काफी निराली है और उनकी इन लीलाओं के पीछे कोई न कोई कारण छिपा हुआ है. लेकिन, इस बार हम जन्माष्टमी से पहले हम यह जानने की कोशिश करेंगे कि भगवान श्रीकृष्ण को गायों से इतना लगाव क्यों था और उनका नाम गोपाल क्यों पड़ गया. क्यों श्रीकृष्ण गायों से इतना लगाव रखते थे.
धार्मिक जानकारों का कहना है कि श्रीकृष्ण को गायों के बहुत लगाव था, क्योंकि गाय को गुणों की खान माना जाता है. गाय का दूध, दही, घी, गोबर और मूत्र को पंचगव्य कहा जाता है. इन सभी चीजों को सेहत के लिए अच्छा माना जाता है. पूजा-पाठ में भी पंचगव्य को बेहद पवित्र माना गया है. गायों के के प्रति भगवान कृष्ण का लगाव हमें यह सिखाता है कि जीवन में आप चाहे कितने ही ऊंचे पद पर क्यों न हों, कितने ही गुणवान क्यों न हों, लेकिन अपने व्यवहार में अहंकार न आने दें. बताया गया है कि भगवान कृष्ण के गाय का नाम पदमा था. जिसका दूध बाल कृष्ण पिया करते थे.
मान्यता है कि गायों में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है. इसलिए भी भगवान श्रीकृष्ण को गाय अत्यंत प्रिय है. इसका कारण यह है कि गाय सब कार्यों में उदार और समस्त गुणों की खान है. गाय का मूत्र और गोबर तक काम आता है. मान्यता है कि गाय का दूध, दही और घी का सेवन कर लेने से शरीर के भीतर पाप नहीं ठहरता. आज भी गाय के दूध को औषधि के समान भी इस्तेमाल किया जाता है.
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भगवान श्रीकृष्ण को गाय अत्यंत प्रिय थी और वे ब्रज में ग्वालों के साथ मिलकर गाय चराया करते थे. भगवान श्रीकृष्ण को माखन चोर भी कहा जाता है क्योंकि कृष्ण को बचपन से ही माखन बड़ा पंसद था. गोविंद का अगर संधि विच्छेद किया जाए तो 'गो' शब्द के तीन अहम अर्थ सामने आते हैं. इसी शब्द के कारण श्री कृष्ण का नाम गोविंद पड़ा था. 'विंद' का अर्थ है आनंदित करने वाला.
सेमें गोपाल गोविंद का अर्थ गायों का पालन करने और गायों को आनंदित करने वाला है. भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी कथाएं बताती हैं कि उनकी बंसुरी की आवाज़ सुनकर सभी ग्वाल बालक और गाय उनके पास आ जाते थे. वो आनंदित हो उठते थे. यही कारण है कि इन्हें गोपाल या फिर गोविंद के नाम से भी जाना जाता है. भगवान कृष्ण को श्याम, मोहन, बंसीधर और कान्हा आदि भी कहते हैं.
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