Gehu Gyan: फरवरी में गेहूं की फसलों का ऐसे रखें ध्यान, नहीं तो हो जाएगा भारी नुकसान!

Gehu Gyan: फरवरी में गेहूं की फसलों का ऐसे रखें ध्यान, नहीं तो हो जाएगा भारी नुकसान!

फरवरी के महीने में आमतौर पर सुबह और शाम को ठंडी हवाएं और सर्द मौसम रहता है, लेकिन इस साल मौसम के पैटर्न में तेज़ी से बदलाव देखा जा रहा है, जिससे गेहूं किसानों में काफी चिंता है. आइए जानते हैं गेहूं किसान फरवरी के महीने में क्या करें.

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संदीप कुमार
  • Noida,
  • Feb 09, 2026,
  • Updated Feb 09, 2026, 3:44 PM IST

फरवरी का महीना गेहूं की फसल के लिए सबसे नाजुक होता है, क्योंकि इस समय गेहूं की फसलों में बालियां निकल रही होती हैं या दाना भरने की प्रक्रिया (दूधिया अवस्था) शुरू हो जाती है. वहीं, इस महीने तापमान में अचानक बढ़ोतरी और तेज़ हवाएं किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है, क्योंकि कई बार तेज हवाएं चलने के कारण पौधे गिर जाते हैं, जिससे पैदावार में 20 से 30 फीसदी तक की कमी आ सकती है. इसलिए अपनी मेहनत से उगाई गई फसल को सुरक्षित रखने और अच्छी पैदावार पाने के लिए, इन 5 आसान तरीकों को जरूर अपनाएं, ताकि गेहूं की फसल गिरने से बची रहे और नुकसान न हो.

इन 5 आसान तरीकों को जरूर अपनाएं

1. सही समय करें सिंचाई- फरवरी महीने में अचानक तापमान बढ़ने के बाद हवाएं तेज चलने लगती हैं. अगर आप खेत में भारी सिंचाई करते हैं और उसी समय तेज हवा चल जाए, तो गीली मिट्टी होने के कारण पौधे जड़ से उखड़कर गिर जाते हैं. इसलिए हमेशा शाम के समय या जब हवा की गति बिल्कुल कम हो, तभी हल्की सिंचाई करें. ऐसे में ‘स्प्रिंकलर’ (फव्वारा तकनीक) का उपयोग इस समय सबसे सुरक्षित माना जाता है.

2. पोटाश और फास्फोरस का इस्तेमाल- फरवरी महीने में गेहूं फसल जिस अवस्था होती है. इस समय नाइट्रोजन का अधिक इस्तेमाल हानिकारक हो सकता है क्योंकि इससे पौधा लंबाई में ज्यादा बढ़ता है और कमजोर होकर गिर जाता है. इसलिए इस समय सही मात्रा में पोटाश और फास्फोरस का स्प्रे करें, क्योंकि पोटाश तने को मजबूती देता है और दानों को वजनदार बनाता है, जिससे पौधा हवा के थपेड़ों को सहने की शक्ति रखता है.

3. बोरॉन का करें छिड़काव- फरवरी महीने में गेहूं की फसल में दाना बनते समय बोरॉन की कमी से बालियां सूख सकती हैं या दाने छोटे रह सकते हैं. ऐसे में किसान फसलों में बोरॉन का छिड़काव कर सकते हैं. इससे परागण (Pollination) में मदद मिलता है और पौधे की कोशिकाओं को लचीला बनाता है. इससे दाने चमकीले और पुष्ट बनते हैं.

4. फसल की ऊंचाई पर करें नियंत्रण- अगर आपकी गेहूं की वैरायटी बहुत लंबी है, तो ऐसे में आप विशेषज्ञों की सलाह लेकर ‘प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर’ (PGR) का इस्तेमाल कर सकते है. यह पौधे की बेवजह की लंबाई रोककर उसकी ऊर्जा को बालियों की ओर मोड़ देता है और तने के निचले हिस्से को मोटा करता है.

5. मौसम पर नजर रखें- आधुनिकता के जमाने में आजकल सरकार की ओर से लॉन्च की गई मौसम की जानकारी वाले मोबाइल ऐप्स के जरिए मौसम की सटीक जानकारी मिल जाती है. ऐसे में अगर अगले 2-3 दिनों में तेज हवा या बारिश की चेतावनी है, तो सिंचाई को तुरंत रोक दें, और मौसम की जानकारी लेते रहें.  

फरवरी में क्यों होता है गेहूं को नुकसान

फरवरी में मौसम सामान्य से अधिक गर्म रहने और बारिश कम होने का अनुमान है. ऐसे में गेहूं की फसल में समय से पहले पकने की समस्या हो सकती है, जिससे बाली में दाने नहीं बनेंगे और दाने हल्के हो जायेंगे. कृषि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि तापमान लंबे समय तक सामान्य से अधिक बना रहता है, तो गेहूं की फसल समय से पहले पक सकती है जिससे कुल उत्पादन में गिरावट आने की आशंका है.

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