
जुगाली करने वाले छोटे-बड़े सभी पशुओं के लिए हरे चारे का इंतजाम करना अब आसान नहीं रहा है. खासकर किसी भी मौसम में हरा चारा जुटाना. जब चारा ज्यादा हो जाता है तो उसे रखने का सही तरीका लोगों को पता नहीं है. जो पुराने तरीके हैं भी तो उनसे चारे की पौष्टिेकता खत्म हो जाती है और चारा खराब हो जाता है. एक्सपर्ट की मानें तो कुछ ऐसी ही छोटी-छोटी वजह के चलते चारे के दाम बढ़ रहे हैं. लेकिन साइलेज की मदद से इस परेशानी को दूर किया जा सकता है.
हाल ही में पुणे, महाराष्ट्र में आयोजित फीड टेक एक्सपो में आए एक्सपर्ट ने साइलेज के महत्व पर रोशनी डालते हुए इसके इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही है. साथ ही साइलेज को चारे के साथ-साथ पोष्टिैकता दूर करने का सबसे आसान रास्ता भी बताया है.
इसे भी पढ़ें: World Goat Day: ‘दूध नहीं दवाई है’ तो क्या इसलिए बढ़ रहा है बकरी के दूध का उत्पादन
फीड टेक एक्सपो में आए फीड एंड फोडर एक्सपर्ट फिरोज अहमद ने बताया कि साइलेज को एक महीने से लेकर 12 महीने तक चलाया जा सकता है. साइलेज को हम बंकर साइलेज, बैग साइलेज और पिट साइलेज के रूप में तैयार कर सकते हैं. साइलेज को सिर्फ मक्का-बाजरा से ही नहीं और भी दूसरी चारा फसल जैसे बरसीम-जाई से भी तैयार किया जा सकता है. अगर अच्छे तरीके से यानि तकनीक के साथ साइलेज तैयार किया जाए तो ये खराब नहीं होता है. अब तो कई ऐसे उपकरण आ गए हैं जो स्टोर किए गए साइलेज की जांच कर बता देते हैं कि साइलेज खराब हो रहा है या नहीं.
फीड टेक एक्सपो में आए एक अन्य फीड एंड फोडर एक्सपर्ट डॉ. क्रांति कुमार चक्रवर्ती का कहना है कि अगर आप डेयरी के बारे में सोच रहे हैं तो साइलेज को दरकिनार नहीं कर सकते. डेयरी प्लान के साथा साइलेज को भी शामिल करना होगा. ये डेयरी की रीढ़ की हड्डी है. ये पूरे साल हर मौसम में उपल्बध है.
इसे भी पढ़ें: Goat Milk: दूध के लिए पाली जाने वालीं बकरियों की नस्ल और उनकी कीमत, पढ़ें पूरी डिटेल
उन्होंने ये भी बताया कि ऐसा नहीं है कि साइलेज बनाने से हरे चारे की पौष्टिकता कम हो जाती है. हरा चारा हो या फिर बॉयोमास किसी से भी साइलेज तैयार करने पर उसकी पौष्टिकता में कोई कमी नहीं आती है. फिर चाहें चारे के हिसाब से उसे एक महीने रखा जाए या फिर 12 महीने. साइलेज की मदद से हम पशुओं की फीड-फोडर से जुड़ी बहुत सारी जरूरतों को पूरा कर सकते हैं.