गेहूं की बढ़ते दाम ने उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ा दी है. उत्तर प्रदेश में गेहूं का मंडी भाव मौजूदा न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी रिकॉर्ड 28 फीसदी ऊपर पहुंच गया है. यह थोक दाम खुदरा कीमतें तो और भी ऊपर हैं. गेहूं का दाम नियंत्रित करने के लिए सरकार ने एफसीआई के माध्यम से बाजार में 25 लाख टन उतारने की घोषणा के साथ ही चेन सप्लायर्स, प्रॉसेसर्स की स्टॉक लिमिट को भी घटा दिया है. लेकिन, गेहूं की बढ़ती कीमतों ने चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इसका असर आटा और उससे बनने वाले खाद्य उत्पादों पर भी पड़ेगा.
उत्तर प्रदेश खाद्य आपूर्ति विभाग के 11 दिसंबर के ताजा आंकड़ों के अनुसार राज्य की थोक मंडियों में गेहूं का न्यूनतम भाव 2920 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया है. यूपी की टूंडला मंडी में गेहूं का थोक न्यूनतम दाम मौजूदा एमएसपी 2275 रुपये प्रति क्विंटल की तुलना में 28 फीसदी के भारी भरकम उछाल के साथ 2920 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया है. जबकि, गेहूं का अधिकतम थोक मंडी भाव 2935 रुपये प्रति क्विंटल पर है.
गेहूं थोक मंडी | न्यूनतम मूल्य (Min Price) प्रति क्विंटल | अधिकतम मूल्य (Max Price) प्रति क्विंटल |
भरुआसुमेरपुर | 2,770 | 2,780 |
मुस्करा | 2,800 | 2,800 |
लखीमपुर | 2,740 | 2,750 |
तिकुनिया | 2,600 | 2,600 |
बांगरमऊ | 2,710 | 2,710 |
जालौन | 2,786 | 2,786 |
अतर्रा एपीएमसी | 2,500 | 2,500 |
पवैया | 2,700 | 2,700 |
टूंडला | 2,920 | 2,935 |
भारतीय खाद्य निगम (FCI) के साथ राज्य एजेंसियों के पास गेहूं का 222.64 लाख टन स्टॉक मौजूद है. खाद्यान्न स्टॉक मानक के अनुसार एजेंसियों के पास 205.20 लाख मीट्रिक टन गेहूं का बफर स्टॉक होना चाहिए. यानी मानक से अधिक गेहूं की उपलब्धता बनी हुई है. केंद्र सरकार ने इस स्टॉक से 25 लाख टन गेहूं ई-ऑक्शन के जरिए खुले बाजार में उतारने की घोषणा की है. लेकिन, गेहूं का बाजार भाव ऊपर चढ़ा हुआ है.
केंद्र सरकार ने थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं, बड़ी और छोटी रिटेल चेन और प्रोसेसर्स पर गेहूं की स्टॉक लिमिट को और घटा दिया है. नए नियमों के मुताबिक होलसेलर्स अब 2,000 टन की जगह 1,000 टन गेहूं रख सकेंगे. रिटेलर्स 10 टन के बदले 5 टन गेहूं रख सकेंगे. जबकि, प्रोसेसर्स अपनी क्षमता का 50 फीसदी गेहूं ही रखेंगे, पहले यह लिमिट 60 फीसदी थी.
एक्सपर्ट ने उम्मीद जताई है कि गेहूं को ई-ऑक्शन के जरिए बाजार में उतारने और ट्रेडर्स के स्टॉक से गेहूं निकालने के निर्देशों के बाद बाजार में उपलब्धता बढ़ेगी, जो दाम को नीचे लाने में मदद करेगी.