
गंगा-यमुना के दोआब में स्थित जिला फतेहपुर में किसान तक किसान कारवां पहुंचा. अपनी उपजाऊ भूमि की वजह से कृषि आधारित पहचान रखने वाले जिले में पिछले एक दशक से अधिक समय से खेती में काफी बदलाव हुए हैं. परंपरागत गेहूं, चना, मटर और बाजरा जैसी फसलों के लिए प्रसिद्ध इस क्षेत्र की आधुनिक पहचान अब बागवानी सहित नकदी फसलों के क्षेत्र से हो रही है. करीब जिला मुख्यालय से 40 से 45 किलोमीटर दूर किसान कारवां शनिवार को जिले के कौड़ियां गांव में अपना 28वां पड़ाव पार किया. इस दौरान जिले के किसानों ने बड़ी संख्या में कार्यक्रम में भाग लिया और इस अवसर पर उन्हें कृषि विभाग, पशुपालन विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र फतेहपुर के वैज्ञानिकों और अधिकारियों द्वारा खेती से जुड़ी नई जानकारी गई.
उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले से शुरू हुआ किसान तक का किसान कारवां कार्यक्रम जब फतेहपुर जिले में पहुंचा तो लोगों में एक अलग ही उत्साह देखने को मिला. इस कार्यक्रम के दौरान चंबल फर्टिलाइजर्स कंपनी द्वारा उर्वरकों के सही उपयोग पर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई, जिससे किसानों को उर्वरकों का बेहतर तरीके से उपयोग करने की दिशा में मदद मिली. कार्यक्रम के अंतर्गत लकी ड्रॉ द्वारा नकद राशि का वितरण और जादूगर सलमान द्वारा कृषि के संदेशों के साथ जादू दिखाए गए, जिससे किसान और उनके परिवार के सदस्य काफी खुश नजर आए.
पहले चरण में कृषि विज्ञान केंद्र, फतेहपुर की प्रभारी अधिकारी डॉ. साधना वैश ने श्रीअन्न की खेती को लेकर किसानों को जागरूक किया. उन्होंने बताया कि श्रीअन्न से अनेक प्रकार के खाद्य उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं. उन्होंने कहा कि श्रीअन्न के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जा रहा है. इसके साथ ही उन्होंने किसानों को बायो फोर्टिफाइड किस्मों के चयन पर जोर देते हुए कहा कि इनमें प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व होते हैं, जो स्वास्थ्य और उत्पादन दोनों दृष्टि से लाभकारी हैं. उन्होंने सब्जियों की उन्नत किस्मों के चयन की आवश्यकता पर भी बल दिया.
दूसरे चरण में चंबल फर्टिलाइजर के प्रतिनिधि कृष्ण मिश्रा ने जैविक खेती के साथ रासायनिक उर्वरकों के संतुलित और सही उपयोग के बारे में किसानों को जागरूक किया. उन्होंने कंपनी के उत्पादों की जानकारी भी दी. इसके अलावा बैंगन और गन्ना में लगने वाले प्रमुख रोगों और उनके नियंत्रण के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मिट्टी की उर्वराशक्ति लगातार घट रही है, इसलिए रासायनिक खादों का सीमित उपयोग करना चाहिए और नियमित रूप से मिट्टी की जांच कराना जरूरी है.
तीसरे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र, फतेहपुर के वैज्ञानिक डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि फतेहपुर जिले की भूमि ऊंची-नीची होने के कारण बारिश वाले पानी का संरक्षण करना बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा कि बारिश के समय किसानों को खेतों की मेड़ों को मजबूत बनाना चाहिए, ताकि पानी खेत में ही संरक्षित रह सके. यदि पानी अधिक हो जाए तो उसे धीरे-धीरे निकालना चाहिए, तेज निकासी से बचना चाहिए.
उन्होंने बताया कि खेत में कुछ समय तक बारिश का पानी ठहरने से मिट्टी की उर्वराशक्ति बढ़ती है. साथ ही किसानों को गोबर की खाद का उपयोग करने की सलाह दी. उन्होंने चेतावनी दी कि सड़क किनारे पड़े कूड़े-कचरे या घूरा को खेत में नहीं डालना चाहिए, क्योंकि इससे रोगों का खतरा बढ़ जाता है. उन्होंने आगे कहा कि जिले की मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा घट रही है, जिसे बढ़ाने के लिए किसानों को जैविक पदार्थों का उपयोग बढ़ाना होगा.
चौथे चरण में इफको के उपमहाप्रबंधक ए.के. सिंह ने उर्वरकों के संतुलित उपयोग को लेकर किसानों को जानकारी दी. उन्होंने कहा कि किसान खादों का अंधाधुंध प्रयोग कर रहे हैं, लेकिन उत्पादन पर अपेक्षित असर नहीं पड़ रहा है. उन्होंने आगे बताया कि अब सल्फर-कोटेड यूरिया बाजार में उपलब्ध है. इसकी बोरी 40 किलो की होगी, लेकिन किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है. यह बोरी पहले की 45 किलो वाली यूरिया बोरी जितनी ही प्रभावी है, बल्कि इसमें पोषक तत्व अधिक हैं. उन्होंने नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, नैनो कॉपर और नैनो जिंक के सही उपयोग के बारे में भी जानकारी दी. साथ ही बताया कि अब तरल उर्वरक भी आ रहे हैं, जिनकी उपयोग क्षमता 80 से 90 प्रतिशत तक अधिक है.
पांचवें चरण में उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ दर्शिका गुप्ता ने किसानों को पशु एम्बुलेंस द्वारा मिल रही सुविधाओं को लेकर जानकारी दी. साथ ही उन्होंने पशुपालकों को कृत्रिम गर्भाधान के बारे में जानकारी दी.
छठवें चरण में मैजिशियन सलमान द्वारा खेती, पशुपालन सहित स्वयं सहायता समूह से जुड़ी जानकारी दी गई. इसके साथ ही उन्होंने किसानों को गोबर का सही उपयोग करने का तरीका भी अपने मैजिक के जरिए बताने का काम किया.
आखिर में चरण में लकी ड्रॉ का कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 10 विजेताओं को 500 रुपये और दूसरा पुरस्कार 2000 रुपये कलावती को मिला. वहीं, प्रथम पुरस्कार किसान रामसेवक को 3000 रुपये दिए गए. वहीं फतेहपुर जिले में आयोजित किसान कारवां कार्यक्रम न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि किसानों को एक नई उम्मीद और उत्साह भी दिया. इस किसान कारवां की पहल से यह स्पष्ट होता है कि जब किसानों को सही जानकारी और मार्गदर्शन मिलता है, तो वे अपनी खेती को बेहतर बना सकते हैं और अपने जीवन को बदल सकते हैं.
किसान कारवां यह कोई एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक लंबी और सार्थक यात्रा है, जो 29 दिसंबर 2025 से शुरू होकर मई 2026 के अंत तक प्रदेश भर के सभी 75 जिलों तक पहुंचेगी. किसान तक का किसान कारवां यूपी के हर जिले में पहुंचकर किसानों, ग्राम प्रधानों, प्रगतिशील किसानों और महिला किसानों को एक साझा मंच देगा. यहां खेती से जुड़ी नवीनतम तकनीकों की जानकारी मिलेगी, सरकारी योजनाओं को सरल भाषा में समझाया जाएगा और उन सर्वोत्तम कृषि प्रथाओं पर चर्चा होगी, जो आज के समय में किसानों के लिए वास्तव में उपयोगी हैं.
हमारे इस किसान कारवां में हर पड़ाव पर होंगे विशेषज्ञों के व्याख्यान, आधुनिक कृषि उपकरणों और तकनीकों की प्रदर्शनियां, प्रशिक्षण सत्र और किसान गोष्ठियां. साथ ही, उन प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने नवाचार, मेहनत और समझदारी से खेती को एक नई दिशा दी है. किसानों के लिए यह मंच अनुभव साझा करने का भी होगा और सीखने का भी.
Frequently Asked Questions (FAQs)
1. किसान कारवां क्या है?
किसानों से सीधे जुड़ने वाला किसान तक का विशेष कृषि अभियान.
2. किसान कारवां का उद्देश्य क्या है?
किसानों की समस्याएं, समाधान और नई जानकारी सामने लाना.
3. किसान कारवां किन जगहों पर हो रहा है?
उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में.
4. किसान कारवां किन किसानों के लिए है?
छोटे, सीमांत, युवा, महिला और प्रगतिशील किसान-सभी के लिए.
5. किसान कारवां में क्या-क्या जानकारी मिलेगी?
खेती, लागत घटाने के तरीके, तकनीक और योजनाओं की जानकारी.
6. क्या किसान अपनी समस्या सीधे बता सकते हैं?
हां, किसान अपनी बात सीधे मंच पर रख सकते हैं.
7. क्या इसमें भाग लेने के लिए शुल्क है?
नहीं, किसानों के लिए यह पूरी तरह निःशुल्क है.
8. किसान कारवां की जानकारी कहां मिलेगी?
किसान तक के सोशल मीडिया हैंडल और यूट्यूब चैनल https://www.youtube.com/@kisantakofficial पर