
पंजाब में बेमौसम बारिश का असर गेहूं उत्पादन पर सीधा दिखने लगा है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, गेहूं में प्रति एकड़ दो क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई है. अलग-अलग जिलों में गिरावट की मात्रा अलग है. वित्तीय नुकसान के लिहाज से देखें तो प्रति एकड़ 5,000 रुपये का घाटा है. 'हिंदुस्तान टाइम्स' की एक रिपोर्ट में इस बात का हवाला दिया गया है.
2025 की तुलना में पंजाब में इस साल गेहूं उत्पादन में भारी गिरावट का अनुमान है. पंजाब में गेहूं की कटाई के साथ मंडियों में सरकारी रेट पर बिक्री भी चल रही है. पंजाब के कृषि विभाग ने 'फसल कटाई प्रयोग' के आधार पर उत्पादन में गिरावट का अनुमान जारी किया है.
इस सीजन में 86 लाख एकड़ जमीन पर गेहूं की खेती की गई, और कुल पैदावार 182 लाख टन होने का अनुमान है. राज्य सरकार ने, जिसने 1 अप्रैल को 1,872 मंडियों में खरीद प्रक्रिया शुरू की थी, 122 लाख टन गेहूं खरीदने की व्यवस्था की है. अब तक, खरीद के लिए मंडियों में लगभग 50 लाख टन गेहूं पहुंच चुका है. किसानों को उनकी उपज के लिए 2,585 रुपये प्रति क्विंटल की कीमत दी जा रही है.
पिछले साल पंजाब में कुल 188 लाख टन की पैदावार दर्ज की गई थी, जिसमें से 119 लाख टन राज्य सरकार की एजेंसियों ने केंद्र के राशन वितरण के लिए खरीदा था.
मार्च के आखिर और अप्रैल के पहले हफ्ते में जब फसल पकने के अंतिम चरण में थी, तब बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण राज्य में फसल को नुकसान पहुंचा. इससे फसल बड़े पैमाने पर गिर गई और दानों को भी क्षति पहुंची. विभाग ने अब तक 'फसल कटाई प्रयोग' की 850 रिपोर्टें जुटाई हैं, जिनके आधार पर यह बताया गया है कि इस साल औसत पैदावार 20 क्विंटल प्रति एकड़ रही, जबकि पिछले साल यह औसत 22 क्विंटल प्रति एकड़ था.
राज्य के राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग के शुरुआती सर्वेक्षणों के अनुसार, बारिश के कारण 1.25 लाख एकड़ में फसलों को भारी नुकसान हुआ है, जिसके चलते नुकसान का सही आकलन करने के लिए 'गिरदावरी' (फसल सर्वेक्षण) का काम शुरू किया गया है. राजस्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, अंतिम रिपोर्ट कुछ ही दिनों में आने की उम्मीद है.
पठानकोट जिले में प्रति एकड़ सबसे कम पैदावार 16 क्विंटल दर्ज की गई है, जिसके बाद होशियारपुर (18 क्विंटल) और मोहाली (18.5 क्विंटल) का नंबर आता है. इन जिलों में पिछले साल भी पैदावार कम थी, लेकिन इस साल यह और भी कम हो गई है. हालांकि, जिन जिलों को इस सीजन में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, उनमें फरीदकोट भी शामिल है. यहां 2025 के 23 क्विंटल के मुकाबले अब पैदावार घटकर 20 क्विंटल रह गई है, यानी प्रति एकड़ 3 क्विंटल की गिरावट आई है.
इसी तरह, अब तक मिली रिपोर्टों के अनुसार, अमृतसर और बरनाला को इस सीजन में 22.5 क्विंटल से घटकर 20 क्विंटल पैदावार होने से नुकसान उठाना पड़ा है, यानी प्रति एकड़ 2.5 क्विंटल का नुकसान हुआ है. बठिंडा, कपूरथला और मानसा को भी पिछले सीजन की पैदावार के मुकाबले प्रति एकड़ दो क्विंटल का नुकसान हुआ है. इसके विपरीत, जालंधर जिले में पैदावार में बढ़ोतरी देखने को मिली है. यहां 2025 के 21.5 क्विंटल प्रति एकड़ के मुकाबले इस सीजन में पैदावार बढ़कर 22 क्विंटल हो गई है.
पंजाब कृषि विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, पैदावार में कमी के कारण किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए कोई व्यवस्था नहीं है. हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि जिस फसल की कटाई अभी हो रही है, उसे जल्दी बोया गया था और फसल के उन हिस्सों को नुकसान पहुंचा, क्योंकि मार्च में जब तापमान में अचानक बढ़ोतरी हुई, तब फसल पक रही थी.
अधिकारी ने अपना नाम जाहिर न करने की शर्त पर 'हिंदुस्तान टाइम्स' से कहा, "बाद में किए जाने वाले फसल कटाई सर्वे में पैदावार में सुधार हो सकता है."
केंद्र सरकार ने 17 अप्रैल को पंजाब में गेहूं की खरीद के नियमों में ढील देने की घोषणा की. पंजाब के लिए नियमों में ढील के अनुसार, गेहूं की फसल में चमक की कमी को मौजूदा 'शून्य' सीमा के मुकाबले 70% तक मंजूर किया गया है. सिकुड़े और टूटे हुए दानों की सीमा को 6% के मुकाबले 15% तक और डैमेज हुए दानों की सीमा को 2% के मुकाबले 6% तक बढ़ाया गया है.