
महाराष्ट्र सरकार ने नासिक जिले में किसानों से प्याज की खरीद में कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए पांच सदस्यों की एक कमेटी बनाई है. यह खरीद नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (NAFED) और नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (NCCF) ने की थी.
राज्य के मार्केटिंग विभाग के एक सरकारी आदेश (GR) के अनुसार, नासिक जिले के कलेक्टर आयुष प्रसाद इस कमेटी के प्रमुख होंगे, जबकि कोऑपरेटिव सोसायटियों के डिप्टी जिला रजिस्ट्रार इसके सदस्य-सचिव होंगे.
प्रसाद ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया, "राज्य सरकार ने कमेटी को जांच करने और एक महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट और सुझाव सौंपने का निर्देश दिया है. पैनल ने किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और अन्य संबंधित लोगों से अपील की है कि वे प्याज की खरीद में इन दोनों एजेंसियों की किसी भी गड़बड़ी के बारे में औपचारिक रूप से शिकायत दर्ज कराएं. कमेटी ऐसी सभी शिकायतों की जांच करेगी."
नासिक में NAFED और NCCF के अधिकारियों ने इन आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया के लिए किए गए कॉल्स का कोई जवाब नहीं दिया.
पिछले सालों की तरह, केंद्र सरकार ने अपनी प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड (PSF) योजना के तहत NCCF और NAFED को किसानों से प्याज खरीदने का काम सौंपा था, ताकि बफर स्टॉक बनाया जा सके और ग्राहकों को कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव से बचाया जा सके. केंद्र सरकार ने इन दोनों एजेंसियों के जरिए दो लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य रखा था. हालांकि, ये एजेंसियां केवल 1.20 लाख टन के आसपास ही प्याज खरीद पाईं. खरीदे गए प्याज को देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजा गया है, जहां उन्हें सब्सिडी वाली कीमतों पर बेचा जा रहा है.
आधिकारिक सूत्रों से पता चला है कि नासिक के कुछ चुने हुए प्रतिनिधियों ने राज्य सरकार से शिकायत की थी कि इन दोनों एजेंसियों ने कुछ चुनिंदा FPOs से ही प्याज खरीदा, जबकि अपनी उपज बेचने के इच्छुक अन्य FPOs को नजरअंदाज़ कर दिया.
राज्य प्याज उत्पादक संघ के संस्थापक-अध्यक्ष भारत दिघोले ने कहा कि जब से इन दोनों एजेंसियों ने प्याज खरीदना शुरू किया था, तब से ही उनका संगठन खरीद प्रक्रिया की जांच की मांग कर रहा था. दिघोले ने कहा, "शुरू में, एजेंसियों ने प्याज मंडियों के पास खरीद केंद्र बनाए थे. बाद में, उन्होंने केंद्रों को दूसरी जगहों पर शिफ्ट कर दिया. उन्हें यह बताना चाहिए कि केंद्र क्यों शिफ्ट किए गए और क्या सभी किसानों और FPOs को अपनी उपज बेचने का समान मौका दिया गया था या नहीं."
एक रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र में सूखे जैसे हालात के कारण प्याज की कीमतें पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुनी हो गई हैं. महाराष्ट्र देश के कुल प्याज उत्पादन का लगभग 40% हिस्सा पैदा करता है.
हालांकि खरीफ की फसल की कुल बुआई का रकबा साल-दर-साल 1.2% कम हुआ है और सामान्य स्तर के आसपास बना हुआ है, लेकिन जिन राज्यों में प्याज का तीन-चौथाई, दालों का दो-तिहाई और चावल का आधा उत्पादन होता है, वहां बारिश में 10% से ज्यादा कमी देखी गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे फसल की पैदावार पर असर पड़ने की संभावना है और हालिया कीमतों के दबाव में यह पहले ही दिख रहा है.
अगस्त के कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के आंकड़ों से पता चला है कि खाद्य महंगाई में बढ़ोतरी हुई है, जो काफी हद तक कम मॉनसून के असर के अनुरूप है. उम्मीद है कि यह ट्रेंड सितंबर में भी जारी रहेगा. प्याज के अलावा, चीनी, चावल और दालों जैसी अन्य जरूरी फसलों की महंगाई में भी बढ़ोतरी हुई है.