रमज़ान में उम्मीदें टूटीं, निर्यात ठप, तरबूज के दाम गिरे, जालना के किसान परेशान

रमज़ान में उम्मीदें टूटीं, निर्यात ठप, तरबूज के दाम गिरे, जालना के किसान परेशान

खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव का असर अब महाराष्ट्र के जालना जिले के तरबूज उत्पादक किसानों पर साफ दिखाई दे रहा है. ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच युद्ध जैसी स्थिति के कारण खाड़ी देशों में निर्यात पूरी तरह प्रभावित हुआ है. रमज़ान में बढ़ी उम्मीदों के बावजूद किसानों को केवल 7 रुपये प्रति किलो के आसपास भाव मिल रहे हैं. उत्पादन लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है. स्थानीय मंडियों में तरबूज की आवक बढ़ने से कीमतें और गिरी हैं. किसान सरकार से राहत और बाजार समर्थन की मांग कर रहे हैं.

जालना के तरबूज किसानों की मेहनत पर संकटजालना के तरबूज किसानों की मेहनत पर संकट
क‍िसान तक
  • जालना,
  • Mar 16, 2026,
  • Updated Mar 16, 2026, 11:36 AM IST

खाड़ी देशों में चल रही युद्ध जैसी स्थिति का असर अब महाराष्ट्र के जालना जिले के तरबूज उत्पादक किसानों पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है. ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव की वजह से खाड़ी देशों को होने वाला तरबूज निर्यात फिलहाल पूरी तरह प्रभावित हो गया है. रमज़ान के महीने में खाड़ी देशों में तरबूज की मांग आमतौर पर बहुत बढ़ जाती है. इसी उम्मीद में जालना के किसानों ने इस बार बड़े पैमाने पर तरबूज की खेती की थी. किसानों को उम्मीद थी कि उन्हें 20 से 30 हजार रुपये प्रति टन तक भाव मिलेगा. लेकिन निर्यात ठप पड़ने के कारण बाजार भाव में भारी गिरावट दर्ज की गई है. वर्तमान में किसानों को तरबूज का भाव केवल करीब 7 हजार रुपये प्रति टन, यानी लगभग 7 रुपये प्रति किलो मिल रहा है.

उत्पादन लागत निकालना मुश्किल

किसानों का कहना है कि इस दाम में उत्पादन लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है. खेती, सिंचाई, मजदूरी, परिवहन और दवाइयों पर किया गया खर्च भी नहीं निकल पा रहा है. निर्यात रुकने और बाजार में मांग कमजोर पड़ने से तरबूज उत्पादक किसान गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं.

परतूर-घनसावंगी के किसान परेशान

जालना जिले के परतूर और घनसावंगी तहसीलों में किसान बड़े पैमाने पर तरबूज की खेती करते हैं. यहां के कई किसान हर साल खाड़ी देशों में होने वाली मांग को ध्यान में रखकर तरबूज की खेती करते हैं. रमज़ान के दौरान खाड़ी देशों के बाजारों में तरबूज की अच्छी खपत होने से किसानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद रहती है. लेकिन इस बार अंतरराष्ट्रीय तनाव और युद्धजन्य माहौल की वजह से निर्यात प्रक्रिया प्रभावित हो गई है.

बाजार में गिरावट का असर

निर्यात बंद होने का सीधा असर स्थानीय बाजारों पर पड़ा है. बड़ी मात्रा में तरबूज स्थानीय मंडियों में पहुंच रहा है, जिससे आवक बढ़ी है और कीमतें गिर गई हैं. किसानों का कहना है कि अगर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. कई किसानों के सामने आगे की खेती की तैयारी करने का भी संकट खड़ा हो गया है.

सरकार से राहत की मांग

फिलहाल अंतरराष्ट्रीय तनाव का सबसे बड़ा असर जालना के तरबूज उत्पादक किसानों की जेब पर पड़ रहा है. किसानों की मांग है कि सरकार इस मामले में ध्यान दे और उन्हें उचित राहत या बाजार समर्थन उपलब्ध कराया जाए. केवल निर्यात की समस्या ही नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत और भविष्य की तैयारी भी इस संकट से प्रभावित हो रही है. (गौरव साळी का इनपुट)

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