
युद्धग्रस्त ईरान में बढ़ते तनाव का असर अब भारत के फल बाजार पर साफ दिखने लगा है. वहां से आने वाली सेब की खेप रुकने के बाद घरेलू बाजार में सप्लाई कम हो गई है, जिससे खासतौर पर कश्मीर घाटी के सेबों के दाम मजबूत हो गए हैं. कारोबारियों का कहना है कि जो खेप पहले ही रवाना हो चुकी थी, वही भारतीय बंदरगाहों तक पहुंची है, लेकिन नई सप्लाई फिलहाल बंद है. मुंबई के फल कारोबार से जुड़े व्यापारियों के मुताबिक ईरान से आयात ठप पड़ने के बाद बाजार में खाली जगह बन गई है, जिसे अब घरेलू सेब भर रहे हैं. इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है और स्थानीय किस्मों को बेहतर भाव मिलने लगा है.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, घाटी के व्यापारियों ने बताया कि इस समय ‘कुल्लू डिलीशियस’ सेब 140 से 145 रुपये प्रति किलो के आसपास बिक रहा है, जबकि ‘डिलीशियस’ वैरायटी 120 से 125 रुपये प्रति किलो के दायरे में पहुंच गई है. कीमतों में आई यह तेजी उन किसानों के लिए राहत लेकर आई है, जो पिछले सीजन में नुकसान झेल चुके थे.
दरअसल, बीते साल खराब मौसम और जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के बार-बार बंद रहने से सेब की ढुलाई प्रभावित हुई थी. कई जगह ट्रकों में लदा माल समय पर मंडियों तक नहीं पहुंच पाया और खराब हो गया, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था. ऐसे में इस बार बेहतर दाम मिलना उनके लिए राहत की खबर है.
मालूम हो कि कि भारत हर साल बड़ी मात्रा में ईरान से सेब आयात करता है. आयात में आई यह रुकावट घरेलू उत्पादकों के लिए सकारात्मक साबित हो रही है, क्योंकि बाजार में मांग के मुकाबले सप्लाई कम हो गई है. कश्मीर में पिछले सीजन के दौरान करीब 5 लाख मीट्रिक टन सेब नियंत्रित वातावरण भंडारण (CA स्टोरेज) में रखे गए थे. इनमें से आधे से ज्यादा स्टॉक पहले ही बाजार में आ चुका है, जबकि बड़ी मात्रा अभी भी भंडार में मौजूद है.
अनुमान है कि करीब 2.5 लाख टन सेब अभी भी स्टोरेज में रखा हुआ है. अब जैसे-जैसे कीमतों में सुधार हो रहा है, किसान और व्यापारी धीरे-धीरे अपना स्टॉक बाजार में उतार रहे हैं. देशभर की थोक मंडियों में कश्मीर से सेब की सप्लाई फिर तेज होने लगी है. ऐसे में अगर सेब के आयात में रुकावट बनी रहती है तो आने वाले दिनों में घरेलू सेब के दाम और मजबूत रह सकते हैं, जिससे बागवानों को फायदा मिलने की उम्मीद है.