अब नहीं सड़ेगा टमाटर, बढ़ेगा निर्यात: शिवराज सिंह चौहान ने तय किया सब्जी सेक्टर का नया रोडमैप

अब नहीं सड़ेगा टमाटर, बढ़ेगा निर्यात: शिवराज सिंह चौहान ने तय किया सब्जी सेक्टर का नया रोडमैप

भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान वाराणसी में आज केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सब्जियों के प्रसंस्करण, शेल्फ लाइफ विस्तार और तकनीक आधारित खेती के माध्यम से किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे.

धर्मेंद्र सिंह
  • Varanasi ,
  • Feb 26, 2026,
  • Updated Feb 26, 2026, 5:28 PM IST

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर), वाराणसी में आज वैज्ञानिकों की समीक्षा बैठक में हिस्सा लिया. प्रक्षेत्र भ्रमण के दौरान उन्होंने किसानों से सब्जी बीजों की उपलब्धता, गुणवत्ता, उत्पादन लागत कम करने के उपायों और नई तकनीकों की जानकारी ली.

आधुनिक तकनीकों को खेत तक पहुंचाने पर जोर

वाराणसी स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान में आयोजित समीक्षा बैठक में ग्राफ्टेड बैंगन-टमाटर (ब्रिमेटो) और आलू-टमाटर (पोमेटो) जैसी उन्नत तकनीकों पर विस्तार से चर्चा हुई. वैज्ञानिकों ने इन तकनीकों की उत्पादन विधि, लाभ और किसानों की आय बढ़ाने में उनकी भूमिका पर प्रस्तुति दी. मंत्री ने इन नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी तकनीकों को शीघ्रता से किसानों तक पहुंचाना प्राथमिकता होनी चाहिए.

उन्होंने हाई-टेक नर्सरी को किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुए एफपीओ के माध्यम से गुणवत्तायुक्त बीज और पौध उपलब्ध कराने के निर्देश दिए.

शेल्फ लाइफ बढ़ाने और निर्यातोन्मुख खेती पर फोकस

केंद्रीय कृषि मंत्री ने विशेष रूप से टमाटर की शेल्फ लाइफ बढ़ाने, सब्जियों के सूखे पाउडर जैसे प्रसंस्कृत उत्पादों के विकास तथा निर्यात बढ़ाने वाली फसलों पर अनुसंधान को गति देने की आवश्यकता बताई.

संस्थान द्वारा विकसित सूक्ष्मजीव आधारित जैव उर्वरक, बायोस्टिमुलेंट और बायोपेस्टिसाइड उत्पादों का भी प्रदर्शन किया गया. मंत्री ने कहा कि—

वैज्ञानिक तकनीकों का खेत स्तर पर प्रभावी प्रसार

  • गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता
  • लागत घटाने वाली तकनीकें
  • बाजार से सीधा जुड़ाव
  • किसानों की आय वृद्धि में निर्णायक भूमिका निभाएंगे.

जैविक खेती और स्टार्ट-अप्स के साथ साझेदारी

उन्होंने जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, निर्यातोन्मुख सब्जी किस्मों के विकास, स्टार्ट-अप्स और एफपीओ के साथ साझेदारी मजबूत करने और युवाओं को कृषि-उद्यमिता से जोड़ने के निर्देश दिए.

संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने उपलब्धियों और किसानों के साथ किए जा रहे कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की. आईसीएआर के सहायक महानिदेशक डॉ. सुधाकर पांडेय ने संस्थान की गतिविधियों की जानकारी दी.

जलवायु परिवर्तन के अनुरूप कार्ययोजना

केंद्रीय कृषि मंत्री ने आगामी रबी सत्र के लिए क्षेत्रवार कार्ययोजना तैयार करने पर जोर देते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती को देखते हुए सब्जी उत्पादन प्रणाली को अधिक लचीला बनाना होगा. उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों और शोध संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर तकनीक हस्तांतरण की गति तेज करने पर बल दिया.

बैठक में वैज्ञानिकों, राज्य कृषि विभाग और केवीके के अधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे. कार्यक्रम का संचालन डॉ. नीरज सिंह और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ए.एन. सिंह ने किया.

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