
मध्य प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को ऊर्जा उत्पादन से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में सोमवार को मंत्रालय, भोपाल में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग, मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (MPUVNL) तथा इंडो-जर्मन एग्रीवोल्टाइक सहयोग परियोजना (IGCA) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए. इस समझौते के तहत प्रदेश में एग्री सौर पीवी (Agri Solar PV) परियोजनाओं के विकास को बढ़ावा दिया जाएगा, जिसमें जर्मन संस्था GIZ तकनीकी और नीतिगत सहयोग प्रदान करेगी.
एग्रीवोल्टाइक या एग्री सौर पीवी एक ऐसी आधुनिक प्रणाली है, जिसमें किसान अपनी कृषि भूमि पर खेती जारी रखते हुए उसी जमीन पर सौर ऊर्जा का उत्पादन भी कर सकते हैं.इस मॉडल में खेतों के ऊपर या निर्धारित ऊंचाई पर सोलर पैनल लगाए जाते हैं, जिससे खेती और बिजली उत्पादन दोनों कार्य एक साथ संभव हो पाते हैं.
इस व्यवस्था से किसानों को अपनी कृषि भूमि का दोहरा लाभ मिलेगा.एक ओर वे फसल उत्पादन जारी रख सकेंगे, वहीं दूसरी ओर सौर ऊर्जा बेचकर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकेंगे.
राज्य सरकार एग्री सौर पीवी परियोजनाओं के लिए किसानों को विशेष सब्सिडी उपलब्ध कराएगी. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसान अपनी जमीन के पूर्ण मालिक बने रहेंगे और खेती भी जारी रख सकेंगे.
सरकार का मानना है कि यह मॉडल किसानों के लिए "डबल सौगात" साबित होगा, क्योंकि इससे कृषि आय के साथ-साथ ऊर्जा उत्पादन से भी नियमित कमाई का नया स्रोत विकसित होगा.
यह पहल केंद्र सरकार की पीएम-कुसुम 2.0 योजना सहित विभिन्न नवीकरणीय ऊर्जा कार्यक्रमों के अनुरूप है. एग्रीवोल्टाइक मॉडल के माध्यम से राज्य में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, भूमि उपयोग की दक्षता बढ़ाने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सतत विकास को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है.
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कृषि भूमि का बेहतर उपयोग होगा और अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता कम होगी. साथ ही खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्यों को भी मजबूती मिलेगी.
समझौते के तहत जर्मन सहयोगी संस्था GIZ प्रदेश में एग्रीवोल्टाइक परियोजनाओं की पहचान, तकनीकी मूल्यांकन, आर्थिक विश्लेषण, डिजाइन, वित्तीय व्यवहार्यता तथा परियोजना क्रियान्वयन में सहयोग करेगी.
इसके अलावा संस्था किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO), ऊर्जा डेवलपर्स, डिस्कॉम और अन्य हितधारकों के लिए प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित करेगी.इससे किसानों को नई तकनीक को समझने और अपनाने में मदद मिलेगी.
राज्य सरकार और इंडो-जर्मन एग्रीवोल्टाइक सहयोग परियोजना मिलकर ऐसा नीतिगत एवं नियामक ढांचा विकसित करेंगे जिससे कृषि उत्पादकता प्रभावित न हो और खाद्य सुरक्षा भी सुनिश्चित बनी रहे.
विशेषज्ञों का कहना है कि एग्रीवोल्टाइक तकनीक भविष्य में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में भी सहायक साबित हो सकती है.इससे किसानों को मौसम संबंधी जोखिमों से कुछ हद तक सुरक्षा मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी.
यह गैर-बाध्यकारी समझौता ज्ञापन मई 2030 तक प्रभावी रहेगा. इस अवधि में प्रदेश में एग्री सौर पीवी मॉडल को बढ़ावा देने, नीति निर्माण, परियोजनाओं के विकास और किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित की जाएंगी.
एमओयू हस्ताक्षर कार्यक्रम में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव, मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध संचालक अमनवीर सिंह बैंस, भारत स्थित जर्मन दूतावास के अधिकारी, एग्रीवोल्टाइक संगठन के प्रतिनिधि एलेक्जेंडर तथा जर्मन संस्था GIZ के वरिष्ठ अधिकारी सहित कई विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे.