MSEDCL ने पैसे लेकर 7 साल तक किसान को नहीं दिया सोलर पंप, उपभोक्ता आयोग ने सुनाया से फैसला

MSEDCL ने पैसे लेकर 7 साल तक किसान को नहीं दिया सोलर पंप, उपभोक्ता आयोग ने सुनाया से फैसला

महाराष्ट्र के नागपुर में 69 वर्षीय किसान को सोलर कृषि पंप कनेक्शन के लिए सात साल तक इंतजार करना पड़ा. किसान ने जुलाई 2019 में 16,560 रुपये जमा किए थे, लेकिन बिजली कंपनी ने कनेक्शन नहीं दिया. अब उपभोक्ता आयोग ने 60 दिन में पंप लगाने का आदेश दिया है.

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क‍िसान तक
  • Noida,
  • Nov 01, 2026,
  • Updated Nov 01, 2026, 8:35 PM IST

महाराष्ट्र के नागपुर जिले में एक किसान को सोलर कृषि पंप कनेक्शन देने में सात साल की देरी करना बिजली वितरण कंपनी को भारी पड़ गया. नागपुर की अतिरिक्त जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (MSEDCL) को सेवा में कमी का दोषी ठहराया है. आयोग ने कंपनी को किसान के खेत में 60 दिन के भीतर 3 हॉर्सपावर (HP) का सोलर कृषि पंप लगाने का निर्देश दिया है.

जुलाई 2019 में जमा किए थे 16,560 रुपये

मामला नागपुर जिले की पारशिवनी तहसील के मौजा डुंडाखैरी गांव का है. यहां रहने वाले 69 वर्षीय किसान ने अपने 1.83 हेक्टेयर खेत में स्थित कुएं के लिए 3 HP के सोलर कृषि पंप कनेक्शन का आवेदन किया था. MSEDCL की ओर से डिमांड नोट जारी होने के बाद किसान ने 10 जुलाई 2019 को 16,560 रुपये जमा कर दिए थे. इसके बावजूद बिजली कंपनी ने न तो पंप लगाया और न ही कनेक्शन उपलब्ध कराया.

किसान का आरोप था कि उसने कनेक्शन के लिए कई बार बिजली कंपनी के कार्यालय के चक्कर लगाए. जनवरी 2021 में कानूनी नोटिस भेजने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसके बाद फरवरी 2021 में उसने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई.

बिजली कंपनी ने पेश की दो पत्रों की दलील

MSEDCL ने आयोग में अपना पक्ष रखते हुए दावा किया कि किसान ने दिसंबर 2019 और सितंबर 2020 में दो पत्र देकर सोलर पंप कनेक्शन लेने से इनकार कर दिया था. कंपनी के मुताबिक, किसान ने इसके बजाय सामान्य थ्री-फेज बिजली कनेक्शन की मांग की थी.

हालांकि, किसान ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि उसे अंग्रेजी नहीं आती. उसने आरोप लगाया कि बिजली कंपनी के कर्मचारियों ने उसके हस्ताक्षर का गलत इस्तेमाल करके ये पत्र तैयार किए थे. किसान ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत वापस लेने के लिए उस पर दबाव बनाया गया.

आयोग ने कंपनी के रिकॉर्ड में पकड़ी कई विसंगतियां

22 अक्टूबर को दिए गए अपने आदेश में आयोग ने MSEDCL के दावों और उसके रिकॉर्ड के बीच कई विरोधाभास पाए. आयोग ने कहा कि अगर किसान ने दिसंबर 2019 में वास्तव में सोलर पंप योजना से अपना आवेदन वापस ले लिया था तो कंपनी को उसकी जमा राशि लौटाकर आवेदन बंद कर देना चाहिए था.

इसके उलट, कंपनी ने मई 2020 में किसान की ओर से टाटा पावर सोलर लिमिटेड का ऑनलाइन वेंडर चयन स्वीकार किया था. इसके बाद सितंबर 2020 में खेत का संयुक्त निरीक्षण भी किया गया. आयोग के मुताबिक, इन तथ्यों से साफ होता है कि बिजली कंपनी ने उस समय भी किसान के आवेदन को सक्रिय माना था.

60 दिन में लगाना होगा सोलर पंप

आयोग ने माना कि MSEDCL ने जुलाई 2019 में पैसे लेने के बावजूद अब तक कनेक्शन उपलब्ध नहीं कराया और देरी का कोई संतोषजनक कारण भी नहीं बताया. आयोग ने इसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत सेवा में कमी माना.

आदेश के मुताबिक, बिजली कंपनी को किसान के खेत में 60 दिन के भीतर 3 HP का सोलर कृषि पंप कनेक्शन देना होगा. इसके लिए किसान से पहले जमा किए गए 16,560 रुपये के अलावा कोई अतिरिक्त राशि नहीं ली जाएगी.

मानसिक उत्‍पीड़न के लिए 25 हजार देने होंगे

आयोग ने MSEDCL को किसान को मानसिक उत्पीड़न के लिए 25,000 रुपये और मुकदमे के खर्च के लिए 10,000 रुपये देने का भी निर्देश दिया है. कंपनी को यह भुगतान 30 दिन के भीतर करना होगा. निर्धारित समय में भुगतान नहीं करने पर मुआवजे की राशि पर 9 फीसदी सालाना ब्याज देना होगा.

किसान ने आयोग से 2019 और 2020 में पानी की कमी के कारण सूख गई कपास की फसल के नुकसान के लिए 24.93 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग भी की थी. हालांकि, आयोग ने इस दावे को स्वीकार नहीं किया. आयोग ने कहा कि किसान की ओर से प्रति एकड़ 20 क्विंटल कपास उत्पादन का अनुमान पेश किया गया था, लेकिन इसके समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण नहीं दिया गया. ऐसे में यह साबित नहीं हो सका कि फसल का नुकसान केवल बिजली कनेक्शन नहीं मिलने के कारण हुआ था. (पीटीआई)

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