
भारत में चीनी उत्पादन के मोर्चे पर चालू सीजन में तस्वीर काफी मजबूत नजर आ रही है. अक्टूबर से जनवरी के बीच 2025-26 चीनी सीजन में देश का कुल चीनी उत्पादन 18.35 प्रतिशत बढ़कर 1.95 करोड़ टन तक पहुंच गया है. पिछले सीजन की इसी अवधि में यह आंकड़ा करीब 1.65 करोड़ टन रहा था. उद्योग संगठन इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के अनुसार, बेहतर पेराई और प्रमुख राज्यों में उत्पादन में बढ़ोतरी के चलते यह उछाल देखने को मिला है. इस समय देशभर में 515 चीनी मिलें परिचालन में हैं, जबकि पिछले साल इसी समय 501 मिलें चल रही थीं.
महाराष्ट्र में इस सीजन चीनी उत्पादन में सबसे तेज बढ़त दर्ज की गई है. जनवरी के अंत तक राज्य में उत्पादन करीब 42 प्रतिशत बढ़कर 78.7 लाख टन तक पहुंच गया. यहां 206 मिलें काम कर रही हैं, जो पिछले साल की तुलना में अधिक हैं. बेहतर रिकवरी और गन्ने की अधिक उपलब्धता ने राज्य के उत्पादन को मजबूती दी है.
उत्तर प्रदेश में भी पेराई की रफ्तार स्थिर बनी हुई है. अब तक राज्य में चीनी उत्पादन 55.1 लाख टन तक पहुंच चुका है, जो पिछले सीजन से करीब 5 प्रतिशत अधिक है. गन्ना पेराई और रिकवरी दर में हल्का सुधार देखने को मिला है, जिससे उत्पादन को सहारा मिला.
कर्नाटक में भी स्थिति बेहतर रही है. राज्य में चीनी उत्पादन में लगभग 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. बेहतर मौसम और मिलों के सुचारू संचालन से पेराई का काम तेज हुआ है.
पूरे सीजन को लेकर ISMA का अनुमान है कि 2025-26 में देश का शुद्ध चीनी उत्पादन बढ़कर करीब 3.09 करोड़ टन तक पहुंच सकता है. यह पिछले सीजन के 2.61 करोड़ टन के मुकाबले करीब 18.6 प्रतिशत अधिक होगा. बढ़ा हुआ उत्पादन घरेलू आपूर्ति को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभा सकता है.
इससे पहले उद्योग संगठन अखिल भारतीय चीनी व्यापार संघ (AISTA- All India Sugar Trade Association) ने अपने शुरुआती अनुमान में कहा है कि 2025-26 सीजन में देश का चीनी उत्पादन बढ़कर करीब 2.96 करोड़ टन तक पहुंच सकता है, जो पिछले सीजन की तुलना में लगभग 13 प्रतिशत ज्यादा होगा. हालांकि, यह आकलन इथेनॉल के लिए होने वाले डायवर्जन को शामिल किए बिना किया गया है.
AISTA ने कहा है कि इस सीजन में इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी का इस्तेमाल पिछले साल के मुकाबले कम रह सकता है, क्योंकि लॉजिस्टिक स्तर पर कुछ दिक्कतें सामने आ रही हैं. वहीं, निर्यात के मोर्चे पर तस्वीर सीमित ही रहने की उम्मीद है और चीनी निर्यात तय कोटे से नीचे रहकर करीब 8 लाख टन तक सिमट सकता है. (एजेंसी)