अगर पेट्रोल में इथेनॉल मिलाया जाता है, तो E20 पेट्रोल से सस्ता क्यों नहीं? पढ़ें सरकार का जवाब

अगर पेट्रोल में इथेनॉल मिलाया जाता है, तो E20 पेट्रोल से सस्ता क्यों नहीं? पढ़ें सरकार का जवाब

इथेनॉल पर कई सवाल हैं. एक सवाल ये भी है कि जब प्योर पेट्रोल में इथेनॉल मिलाया जाता है तो उसका दाम कम क्यों नहीं किया जाता. इस पर सरकार ने जवाब दिया है. सरकार ने कहा है कि दाम इसलिए कम नहीं किया जाता क्योंकि देश को कच्चे तेल में आत्मनिर्भर बनाना है और उसके लिए बड़ी मात्रा e20 बनाया जाता है जिस पर बहुत अधिक खर्च होता है.

India is quietly in the middle of a massive fuel transition, and most vehicle owners have no idea what it means for their engine, their mileage, or their wallet.India is quietly in the middle of a massive fuel transition, and most vehicle owners have no idea what it means for their engine, their mileage, or their wallet.
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Jul 10, 2026,
  • Updated Jul 10, 2026, 5:47 PM IST

इथेनॉल को लेकर विवाद जारी है. इथेनॉल बनाने से लेकर उसे इस्तेमाल करने तक, हर पहलू पर तमाम तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं. खेती-किसानी को भी केंद्र में रखकर इस पर चर्चा हो रही है. सवाल है कि क्या इथेनॉल को पेट्रोल में मिलाना (इथेनॉल ब्लेंडिंग उचित है? अगर ब्लेंडिंग में किसी तरह का कोई खोट नहीं तो सरकार इस पर विस्तार से स्पष्टीकरण क्यों नहीं दे रही है. इन तमाम सवालों के बीच एक प्रश्न इथेनॉल मिले पेट्रोल की कीमत को लेकर भी है. पेट्रोल गाड़ियों का इस्तेमाल करने वाले लोगों का सवाल है कि अगर पेट्रोल में इथेनॉल मिलाया जा रहा है, तो E20 फ्यूल पेट्रोल से सस्ता क्यों नहीं है?

इस पर सरकार का कहना है कि किसानों को सही दाम दिलाने के लिए इथेनॉल अच्छी कीमतों पर खरीदा जाता है. उदाहरण के लिए, मक्के से बनने वाले इथेनॉल को अभी टैक्स और लॉजिस्टिक्स खर्च से पहले लगभग 71.86 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदा जा रहा है. कच्चे तेल की मौजूदा कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल है. ऐसे में सरकार का कहना है कि शुद्ध पेट्रोल के मुकाबले E20 को बनाने में ज्यादा खर्च आ सकता है. अगर कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, तो इथेनॉल उसकी तुलना में ज्यादा सस्ता पड़ता है.

E20 के दाम कम क्यों नहीं रखती सरकार?

सरकार का कहना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग का मकसद रोज पेट्रोल सस्ता करना नहीं है, बल्कि आयातित कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता कम करना और ग्लोबल स्तर पर तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से ग्राहकों को बचाना है. सरकार का दावा है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम से अब तक विदेशी करेंसी में 1.97 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत हुई है. कच्चे तेल का आयात लगभग 316 लाख मीट्रिक टन कम हुआ है. CO₂ उत्सर्जन में लगभग 952 लाख मीट्रिक टन की कमी आई है. साथ ही, भारतीय किसानों को 1.66 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम ट्रांसफर की गई है.

इथेनॉल को लेकर कुछ ऐसे ही सवाल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से पूछा गया था. इसके जवाब में उन्होंने कहा कि भारत हर साल लगभग 22 लाख करोड़ रुपये के पेट्रोल-डीजल जैसे तेलों का  आयात करता है और अपनी ऊर्जा जरूरत का लगभग 87 प्रतिशत आयात से पूरा करता है. गडकरी ने कहा, "मकसद भारत को आत्मनिर्भर बनाना, आयात कम करना, युवाओं के लिए रोजगार पैदा करना और यह तय करना है कि किसान न केवल अन्न पैदा करने वाले बनें, बल्कि ऊर्जा, ईंधन, एविएशन फ्यूल और विटामिन पैदा करने वाले भी बनें."

क्या E20 से गाड़ियों के इंजन खराब होते हैं?

लोगों के मन में एक और बड़ा सवाल है. क्या E20 पेट्रोल इंजन, रबर पार्ट्स या पुरानी गाड़ियों को नुकसान पहुंचा सकता है?

सरकार इन चिंताओं को गलत जानकारी बताते हुए खारिज करती है. उसका कहना है कि E20 को गाड़ी बनाने वाली कंपनियों, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), SIAM, तेल कंपनियों और टेक्निकल इंस्टीट्यूशन्स की बड़ी टेस्टिंग के बाद ही लाया गया था. सरकार के स्पष्टीकरण के मुताबिक, गाड़ी बनाने वालों ने पूरे प्रोसेस में हिस्सा लिया और अगर सेफ्टी की चिंता होती तो वे E20 या ऑनर्ड वारंटी को सपोर्ट नहीं करते.

सरकार इंडस्ट्री के फीडबैक का भी हवाला देती है, जिसमें दावा किया गया है कि मारुति सुजुकी ने FY 2025-26 के दौरान लगभग 2.84 करोड़ गाड़ियों की सर्विस की, जिसमें लगभग 1.5 करोड़ पुरानी गाड़ियां शामिल हैं जो मूल रूप से E20-कम्पैटिबल के तौर पर सर्टिफाइड नहीं थीं, और E20 से जुड़ी जंग, असामान्य घिसाव या कंपोनेंट फेलियर की रिपोर्ट नहीं की. उसका कहना है कि हीरो मोटोकॉर्प ने भी इसी तरह के फील्ड एक्सपीरियंस की रिपोर्ट दी है.

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