महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में 6 महीने में 465 किसानों ने की आत्महत्या, इस जिले में सबसे ज्यादा मामले

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में 6 महीने में 465 किसानों ने की आत्महत्या, इस जिले में सबसे ज्यादा मामले

मराठवाड़ा में जनवरी से जून 2026 के बीच 465 किसान आत्महत्या के मामले दर्ज हुए हैं. प्रशासन के अनुसार, 108 पात्र मामलों में अब तक आर्थिक सहायता दी जा चुकी है, जबकि 215 मामलों को सहायता के लिए योग्य माना गया है. वर्ष 2025 में इस क्षेत्र में किसानों की आत्महत्या के 1,131 मामले दर्ज किए गए थे.

Farmer SuicideFarmer Suicide
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jul 09, 2026,
  • Updated Jul 09, 2026, 1:20 PM IST

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में वर्ष 2026 में जनवरी से जून के दौरान किसानों की आत्महत्या के 465 मामले दर्ज किए गए हैं. संभागीय आयुक्त कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से जून के बीच सबसे अधिक 109 मामले छत्रपति संभाजीनगर जिले में दर्ज हुए, जबकि सबसे कम 26 मामले लातूर जिले से सामने आए. मराठवाड़ा में कुल आठ जिले शामिल हैं और प्रशासन ने इन मामलों की समीक्षा भी शुरू कर दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में मराठवाड़ा क्षेत्र में किसानों की आत्महत्या के कुल 1,131 मामले प्रशासन के रिकॉर्ड में दर्ज किए गए थे. इस वर्ष पहले छह महीनों में ही 465 मामले सामने आने से क्षेत्र में किसानों की स्थिति एक बार फिर चिंता का विषय बनी हुई है.

आर्थिक सहायता के लिए मामलों की जांच जारी

प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार, 465 मामलों में से 215 मामलों को सरकारी आर्थिक सहायता के लिए पात्र माना गया है, जबकि 26 मामलों को सहायता के लिए अपात्र घोषित किया गया है. इसके अलावा 222 मामलों की जांच अभी जारी है. अब तक 108 पात्र मामलों में आर्थिक सहायता स्वीकृत की जा चुकी है.

छत्रपति संभाजीनगर में 109, बीड में 95, धाराशिव में 65, नांदेड़ में 61, जालना में 40, हिंगोली में 35, परभणी में 34 और लातूर में 26 किसान आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए हैं. इन आंकड़ों से साफ है कि क्षेत्र के ज्‍यादातर जिलों में किसानों से जुड़ी गंभीर चुनौतियां बनी हुई हैं.

लातूर में खेत मजदूर की हत्या के दोषी को उम्रकैद

उधर, लातूर जिले में वर्ष 2019 में खेत मजदूर की हत्या के मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है. निलंगा की अतिरिक्त सत्र अदालत ने बालाजी रामराव वरवटे को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया है. जुर्माना जमा नहीं करने की स्थिति में आरोपी को एक साल का अतिरिक्त कठोर कारावास भी भुगतना होगा.

साथ ही अदालत ने पीड़ित के अनुसूचित जाति समुदाय से होने के कारण आरोपी को एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत भी दोषी माना और 7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई. पुलिस के अनुसार, यह फैसला वैज्ञानिक जांच, साक्ष्यों के व्यवस्थित संकलन और अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी के आधार पर आया.

घर की चाबी को लेकर हुआ था विवाद

अभियोजन के मुताबिक, 13 मार्च 2019 की रात निलंगा-अंसरवाड़ा मार्ग स्थित एक खेत में घर की चाबी को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ था. विवाद बढ़ने पर आरोपी ने खेत मजदूर अंकुश निवृत्ति आवले पर लकड़ी और कुल्हाड़ी से हमला कर दिया, जिससे उनके हाथ, पैर, पीठ, पेट, सीने और सिर पर गंभीर चोटें आईं. पहले उन्हें निलंगा के ग्रामीण अस्पताल में भर्ती कराया गया, बाद में लातूर के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन आगे इलाज के लिए ले जाते समय 15 मार्च 2019 को उनकी मौत हो गई.

मृतक के बेटे की शिकायत पर पुलिस ने हत्या और एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया था. जांच तत्कालीन उपविभागीय पुलिस अधिकारी गोपाल रंजनकर और पुलिस निरीक्षक अनिल चोरमले ने की, जबकि मामले की पैरवी अतिरिक्त लोक अभियोजक के. वी. पंढरीकर ने की. अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई. (पीटीआई)

MORE NEWS

Read more!